पंजाब कांग्रेस में अंतर्कलह के बीच विधायक राणा गुरजीत सिंह का दावा — 'पार्टी सही दिशा में, सब ठीक'
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व विवाद और गुटबाजी की चर्चाओं के बीच कपूरथला से विधायक राणा गुरजीत सिंह ने 18 जुलाई को दावा किया कि पार्टी में सब कुछ ठीक है और कांग्रेस सही दिशा में आगे बढ़ रही है। उनका यह बयान ऐसे समय आया जब पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले राज्य कांग्रेस इकाई में नेतृत्व को लेकर खींचतान सार्वजनिक रूप से सामने आ चुकी है।
विधायक का बयान
राणा गुरजीत सिंह ने कहा, 'सब कुछ ठीक है। कांग्रेस सही दिशा में आगे बढ़ रही है। पार्टी आलाकमान इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर रहा है।' उन्होंने यह भी दावा किया कि पंजाब में कांग्रेस ही जीतेगी और सरकार बनाएगी, चाहे नेतृत्व किसी का भी हो।
हालिया बैठकों पर उन्होंने कहा, 'बातचीत से हमेशा सकारात्मक नतीजे निकलते हैं। मतभेदों से नकारात्मकता पैदा हो सकती है, लेकिन बातचीत हो रही है और चीजें सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही हैं।'
PM मोदी का कटाक्ष
राणा गुरजीत सिंह के इस बयान से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जालंधर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए पंजाब कांग्रेस की अंतर्कलह पर तीखा कटाक्ष किया। मोदी ने कहा, 'पंजाब में कांग्रेस में कुर्सी का किस्सा ही खत्म नहीं होता। ये इसलिए नहीं लड़ रहे कि पंजाब का हित कैसे होगा, इनकी लड़ाई इसलिए है कि इनकी जो कुर्सी है, वो किसके पास रहेगी।'
कांग्रेस में नेतृत्व विवाद की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि कांग्रेस आलाकमान ने राजा अमरिंदर सिंह वड़िंग को राज्य इकाई का प्रमुख बनाए रखा है, लेकिन कथित तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और उनके गुट के नेता इस फैसले से नाखुश बताए जा रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, 90 से अधिक नेताओं वाले एक प्रतिद्वंद्वी गुट ने वड़िंग को हटाने की माँग की थी।
पार्टी में गतिरोध को दूर करने के उद्देश्य से कांग्रेस के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल ने हाल ही में राज्य का दौरा किया और नेताओं के बीच नाराजगी दूर करने की कोशिश की। हालाँकि, बैठकों का यह दौर कथित तौर पर असफल रहा।
आम जनता और चुनाव पर असर
आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले इस आंतरिक विवाद का सीधा असर पार्टी की चुनावी तैयारियों पर पड़ सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गुटबाजी खुलकर सामने आने से मतदाताओं में पार्टी की एकजुटता को लेकर संशय बढ़ सकता है। राणा गुरजीत सिंह का यह बयान पार्टी की छवि को संभालने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन असली परीक्षा आलाकमान के अगले कदम पर निर्भर करेगी।