पंजाब कांग्रेस में बगावत: बघेल से मिला चन्नी गुट, वड़िंग को हटाने की माँग पर अड़े 90+ नेता
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी कलह एक नए मोड़ पर पहुँच गई है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी गुट और कांग्रेस महासचिव एवं पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल के बीच 11 जुलाई, शनिवार को चंडीगढ़ में बहुप्रतीक्षित बैठक हुई। 90 से अधिक नेताओं वाले इस गुट ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को पद से हटाने की माँग दोहराई।
बैठक में क्या हुआ
बैठक के बाद सांसद सुखजिंदर रंधावा ने मीडिया से साफ शब्दों में कहा, 'कभी-कभी पार्टी को कुछ फैसले पलटने पड़ते हैं… हमें समझौतावादी नेताओं की जरूरत नहीं है।' रंधावा ने यह भी जोड़ा कि पार्टी को ऐसे नेताओं की ज़रूरत है जो निडर और निर्णायक रूप से बोलते हों। प्रतिद्वंद्वी गुट ने वड़िंग पर पार्टी नेतृत्व में फूट डालने के विशिष्ट उदाहरण भी बघेल के सामने रखे।
बघेल की प्रतिक्रिया
मीडिया के एक सवाल के जवाब में भूपेश बघेल ने कहा, 'हाँ, मैं सहमत हूँ कि समझौता करने वाला कोई भी नेता काम नहीं करेगा। अगर भाजपा किसी नेता से समझौता करेगी, तो पार्टी काम नहीं करेगी। यह मेरी जिम्मेदारी है कि मैं ऐसा होने नहीं दूंगा।' हालाँकि, बघेल ने यह भी स्पष्ट किया कि राजा वड़िंग के प्रतिस्थापन पर इस बैठक में कोई चर्चा नहीं हुई।
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि चंडीगढ़ में पाँच दिन बिताने के दौरान उन्होंने सभी सहयोगियों से मुलाकात की और उनकी चिंताएँ सुनीं। उन्होंने भरोसा दिलाया, 'प्रभारी महासचिव के रूप में मैं सभी के हितों की रक्षा करूंगा और सभी मुद्दों को पार्टी हाई कमांड तक पहुँचाऊंगा।'
चन्नी के CM उम्मीदवार होने की अटकलें
आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों में चरणजीत सिंह चन्नी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार होने की अटकलों पर बघेल ने सीधे खंडन किया। उन्होंने कहा, 'यह झूठ है। ऐसी कोई बात नहीं हुई है। हम तो बस यही चाहते हैं कि कांग्रेस सरकार बनाए।' बघेल ने यह भी कहा कि अगर कोई योग्य और जीतने योग्य उम्मीदवार है, तो उसे निश्चित रूप से टिकट दिया जाएगा।
आम जनता और पार्टी पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) के खिलाफ विपक्षी एकजुटता की दरकार है। गौरतलब है कि कांग्रेस की आंतरिक खींचतान पार्टी की जमीनी तैयारी को कमजोर कर सकती है। आलोचकों का कहना है कि नेतृत्व विवाद मतदाताओं को भ्रमित करता है और पार्टी की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है।
आगे क्या होगा
बघेल के दिल्ली लौटने के बाद अब सभी की नजरें पार्टी हाई कमांड की प्रतिक्रिया पर हैं। सूत्रों के अनुसार, प्रतिद्वंद्वी गुट की माँगों पर हाई कमांड जल्द निर्णय ले सकती है। पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को एकजुट दिखाना पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।