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टिहरी में मशरूम उत्पादन से महिलाओं को मिली आर्थिक ताकत, मशरूम बेकरी इकाइयों से ₹1 लाख मासिक बिक्री

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टिहरी में मशरूम उत्पादन से महिलाओं को मिली आर्थिक ताकत, मशरूम बेकरी इकाइयों से ₹1 लाख मासिक बिक्री

सारांश

उत्तराखंड के टिहरी जिले में चारधाम यात्रा मार्ग की पर्यटन माँग का लाभ उठाते हुए प्रशासन ने महिलाओं को मशरूम उत्पादन और बेकरी इकाइयों से जोड़ा है। कीर्तिनगर-देवप्रयाग क्षेत्र में महिला संचालित इकाइयों से हर माह ₹1 लाख से अधिक की बिक्री हो रही है — पर्वतीय पलायन रोकने की दिशा में एक ठोस जमीनी मॉडल।

मुख्य बातें

टिहरी जिले के नरेंद्र नगर, जौनपुर, कीर्तिनगर, चंबा और घनसाली विकासखंडों में महिलाएँ मशरूम उत्पादन से जुड़ रही हैं।
कीर्तिनगर और देवप्रयाग में बटर मशरूम का बड़े पैमाने पर उत्पादन हो रहा है।
महिला संचालित मशरूम आधारित बेकरी इकाइयों से प्रतिमाह ₹1 लाख से अधिक की बिक्री हो रही है।
चारधाम यात्रा मार्ग पर होटल-रेस्तरां की माँग से मशरूम की स्थानीय खपत सुनिश्चित है।
मुख्य विकास अधिकारी वरुणा अग्रवाल स्वयं परियोजनाओं का क्षेत्रीय निरीक्षण कर रही हैं।
मशरूम के साथ-साथ महिलाओं को उच्च मूल्य फसलों और डायमंड फ्रूट्स के उत्पादन के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

उत्तराखंड के टिहरी जिले में महिला स्वरोजगार को नई दिशा देने के लिए मशरूम उत्पादन को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित किया जा रहा है। नरेंद्र नगर, जौनपुर, कीर्तिनगर, चंबा और घनसाली सहित कई विकासखंडों में महिलाएँ अब मशरूम की खेती से जुड़कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं। यह पहल राज्य सरकार की स्वरोजगार योजनाओं के तहत पर्वतीय क्षेत्रों में आय के नए स्रोत विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्य घटनाक्रम

टिहरी गढ़वाल की मुख्य विकास अधिकारी वरुणा अग्रवाल स्वयं विभिन्न परियोजनाओं का क्षेत्रीय निरीक्षण कर रही हैं, ताकि सरकारी योजनाएँ जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू हो सकें। मशरूम उत्पादन के साथ-साथ महिलाओं को उच्च मूल्य वाली फसलों और डायमंड फ्रूट्स के उत्पादन के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

चारधाम मार्ग पर बढ़ती माँग का लाभ

वरुणा अग्रवाल ने बताया कि चारधाम यात्रा के प्रमुख मार्ग पर स्थित होने के कारण टिहरी जिले में हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं। जिले में बड़ी संख्या में होटल, रेस्तरां और पर्यटन प्रतिष्ठान संचालित होते हैं, जिससे मशरूम की स्थानीय माँग लगातार बनी रहती है। इसी माँग को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने महिलाओं को विभिन्न प्रकार के मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दिया है।

बटर मशरूम और बेकरी इकाइयाँ

विशेष रूप से कीर्तिनगर और देवप्रयाग क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बटर मशरूम का उत्पादन हो रहा है। इसके अतिरिक्त महिलाओं द्वारा संचालित मशरूम आधारित बेकरी इकाइयाँ भी स्थापित की गई हैं, जिनसे प्रत्येक माह ₹1 लाख से अधिक की बिक्री हो रही है। यह आँकड़ा पर्वतीय क्षेत्रों में महिला उद्यमिता की बढ़ती संभावनाओं को रेखांकित करता है।

सरकार की प्रतिक्रिया और लक्ष्य

वरुणा अग्रवाल के अनुसार, प्रशासन का प्रयास उन क्षेत्रों में महिलाओं को मशरूम उत्पादन के लिए अधिकाधिक प्रेरित करना है, जहाँ होटल उद्योग और बेहतर बाजार उपलब्ध हैं। उनका कहना है कि इस पहल से महिलाएँ न केवल आत्मनिर्भर बनेंगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड सरकार पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने के लिए स्थानीय रोजगार सृजन पर जोर दे रही है। गौरतलब है कि मशरूम उत्पादन कम लागत और कम जमीन में अधिक आय देने वाली फसल है, जो पहाड़ी भूगोल के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है। आने वाले समय में अधिक विकासखंडों को इस योजना से जोड़ने की तैयारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

₹1 लाख मासिक बिक्री का आँकड़ा कुल लाभार्थी महिलाओं की संख्या और प्रति महिला औसत आय बताए बिना अधूरा है। असली कसौटी यह होगी कि यह मॉडल चारधाम सीजन के बाहर भी टिकाऊ रहता है या नहीं — और क्या प्रशिक्षित महिलाओं को दीर्घकालिक बाजार संपर्क मिल पाएगा।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टिहरी में महिलाओं को मशरूम उत्पादन से कितनी आय हो रही है?
कीर्तिनगर और देवप्रयाग क्षेत्र में महिलाओं द्वारा संचालित मशरूम आधारित बेकरी इकाइयों से प्रत्येक माह ₹1 लाख से अधिक की बिक्री हो रही है। यह आँकड़ा पर्वतीय महिला उद्यमिता के लिए एक उत्साहजनक संकेत है।
टिहरी में किन विकासखंडों में मशरूम की खेती हो रही है?
नरेंद्र नगर, जौनपुर, कीर्तिनगर, चंबा और घनसाली विकासखंडों में महिलाएँ मशरूम उत्पादन में सक्रिय हैं। विशेष रूप से कीर्तिनगर और देवप्रयाग में बटर मशरूम का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा रहा है।
टिहरी में मशरूम की इतनी माँग क्यों है?
टिहरी जिला चारधाम यात्रा के प्रमुख मार्ग पर स्थित है, जहाँ हर वर्ष लाखों श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं। जिले में बड़ी संख्या में होटल, रेस्तरां और पर्यटन प्रतिष्ठान हैं, जिनसे मशरूम की स्थानीय माँग निरंतर बनी रहती है।
इस योजना में सरकार की क्या भूमिका है?
राज्य सरकार की योजनाओं के तहत प्रशासन महिलाओं को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दे रहा है और बेकरी इकाइयाँ स्थापित करने में सहयोग कर रहा है। मुख्य विकास अधिकारी वरुणा अग्रवाल स्वयं परियोजनाओं का क्षेत्रीय निरीक्षण कर रही हैं।
क्या मशरूम के अलावा भी महिलाओं को अन्य फसलों से जोड़ा जा रहा है?
हाँ, मशरूम उत्पादन के साथ-साथ महिलाओं को उच्च मूल्य वाली फसलों और डायमंड फ्रूट्स के उत्पादन के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य पर्वतीय क्षेत्रों में आय के विविध स्रोत विकसित करना है।
राष्ट्र प्रेस
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