11 जुलाई 2026
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मैसूर दशहरा में 'कंबाला' शामिल करने का प्रस्ताव: शाही परिवार और BJP का कड़ा विरोध, CM शिवकुमार बोले — सबसे चर्चा होगी

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मैसूर दशहरा में 'कंबाला' शामिल करने का प्रस्ताव: शाही परिवार और BJP का कड़ा विरोध, CM शिवकुमार बोले — सबसे चर्चा होगी

सारांश

मैसूर दशहरा में कंबाला जोड़ने का प्रस्ताव एक सांस्कृतिक टकराव बन गया है — एक तरफ कर्नाटक सरकार उत्सव को नया रूप देना चाहती है, दूसरी तरफ शाही परिवार और BJP परंपरा की रक्षा में खड़े हैं। CM शिवकुमार ने अंतिम फैसला टाला।

मुख्य बातें

कर्नाटक सरकार ने मैसूर दशहरा-2026 में तटीय खेल 'कंबाला' शामिल करने का प्रस्ताव रखा।
शाही परिवार के सदस्य व BJP सांसद यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा वाडियार ने उच्चस्तरीय बैठक में ही प्रस्ताव का विरोध किया।
BJP पूर्व सांसद प्रताप सिम्हा ने भी सरकार से शाही परिवार की भावनाओं का सम्मान करने की अपील की।
यदुवीर ने दशहरा की 'पास व्यवस्था' समाप्त करने की माँग भी उठाई।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि अंतिम निर्णय सभी पक्षों से परामर्श के बाद लिया जाएगा।
इस वर्ष 'नादा हब्बा दशहरा-2026' का आयोजन 11 दिनों तक भव्य रूप से किए जाने की घोषणा की गई है।

कर्नाटक सरकार द्वारा प्रतिष्ठित मैसूर दशहरा-2026 समारोह में तटीय कर्नाटक के पारंपरिक भैंस दौड़ खेल 'कंबाला' को शामिल करने के प्रस्ताव ने राजनीतिक और सांस्कृतिक विवाद खड़ा कर दिया है। मैसूर के शाही परिवार, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं और कई सामाजिक संगठनों ने इस प्रस्ताव का खुलकर विरोध किया है, जबकि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा है कि अंतिम निर्णय सभी पक्षों से विचार-विमर्श के बाद ही लिया जाएगा।

विवाद की पृष्ठभूमि

राज्य सरकार ने घोषणा की है कि सूखे जैसी परिस्थितियों के बावजूद इस वर्ष 'नादा हब्बा दशहरा-2026' का आयोजन 11 दिनों तक भव्य रूप से किया जाएगा। इसी क्रम में उत्सव को नया आयाम देने के लिए कंबाला को समारोह में जोड़ने का प्रस्ताव सामने आया। गौरतलब है कि 'कांतारा चैप्टर-1' फिल्म की व्यापक सफलता के बाद यह तटीय परंपरा पूरे देश में चर्चा में आई है। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि इस लोकप्रियता को दशहरा जैसे ऐतिहासिक उत्सव पर थोपना उचित नहीं है।

शाही परिवार का विरोध

मैसूर के शाही परिवार के सदस्य और BJP सांसद यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा वाडियार ने उच्चस्तरीय समिति की बैठक में ही इस प्रस्ताव का विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा, "दशहरा की अपनी अलग सांस्कृतिक पहचान है, जबकि कंबाला एक अलग परंपरा है। मैसूर के लोगों की भावनाएं भी यही कहती हैं। दशहरा के दौरान कंबाला का आयोजन उनकी इच्छा के खिलाफ होगा।"

यदुवीर ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध कंबाला खेल के प्रति नहीं, बल्कि उसे दशहरा के मंच पर लाने की कोशिश के प्रति है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने बार-बार जनता की भावनाओं को नजरअंदाज किया है। कांग्रेस विधायक अशोक राय द्वारा इस प्रस्ताव का समर्थन किए जाने की खबरों पर वाडियार ने कहा कि विधायक ने इस विषय पर उनसे कोई चर्चा नहीं की।

BJP नेताओं की प्रतिक्रिया

BJP के पूर्व सांसद प्रताप सिम्हा ने भी सरकार को आगाह किया कि मैसूर के शाही परिवार की भावनाओं के विरुद्ध कोई निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दशहरा एक पारंपरिक और सांस्कृतिक पर्व है, इसलिए इसकी परंपराओं और रीति-रिवाजों का सम्मान अनिवार्य है।

पास सिस्टम पर भी उठे सवाल

यदुवीर ने कंबाला विवाद के साथ-साथ सरकार से दशहरा कार्यक्रमों की 'पास व्यवस्था' समाप्त करने की भी अपील की। उनका कहना था, "लोग समारोह का आनंद लेने से ज्यादा पास हासिल करने में लग जाते हैं। दशहरा को सिर्फ भव्य नहीं, बल्कि उसकी परंपराओं और उद्देश्य के अनुरूप मनाया जाना चाहिए।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसानों और आम जनता को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री का रुख

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने इस विवाद पर संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि सरकार सभी सुझावों पर गंभीरता से विचार कर रही है। उन्होंने कहा, "हम राज्य की सभी परंपराओं और रीति-रिवाजों को ध्यान में रखकर फैसला करेंगे। अंतरराष्ट्रीय स्तर के गायकों के कार्यक्रम, खेल प्रतियोगिताएं और हिंदू परंपराओं के अनुसार उत्सव मनाने जैसे सुझाव भी मिले हैं। यह फैसला अकेले डीके शिवकुमार नहीं लेंगे।" यह ऐसे समय में आया है जब मैसूर दशहरा को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल कराने की कोशिशें चल रही हैं, जिससे इसकी पारंपरिक शुद्धता का सवाल और संवेदनशील हो जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी जड़ें राजनीतिक हैं — कांग्रेस सरकार 'कांतारा' की लोकप्रियता को भुनाकर तटीय कर्नाटक के मतदाताओं को संदेश देना चाहती है, जबकि BJP मैसूर की विरासत की 'संरक्षक' की छवि मजबूत करना चाहती है। असली सवाल यह है कि क्या दशहरा जैसे जीवंत उत्सव की परंपरा को 'जमी हुई' मान लेना उचित है, या समावेशी सांस्कृतिक विकास भी परंपरा का हिस्सा हो सकता है। मैसूर दशहरा सदियों में कई बार बदला है — पर वे बदलाव राजदरबार की सहमति से आए थे। इस बार शाही परिवार की आपत्ति को नजरअंदाज करना सरकार के लिए राजनीतिक रूप से महँगा पड़ सकता है।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मैसूर दशहरा में 'कंबाला' शामिल करने का विवाद क्या है?
कर्नाटक सरकार ने 2026 के मैसूर दशहरा समारोह में तटीय कर्नाटक के पारंपरिक भैंस दौड़ खेल 'कंबाला' को जोड़ने का प्रस्ताव रखा है। मैसूर के शाही परिवार और BJP नेताओं ने इसे दशहरा की सांस्कृतिक पहचान के विरुद्ध बताते हुए विरोध किया है।
यदुवीर वाडियार ने कंबाला प्रस्ताव का विरोध क्यों किया?
यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा वाडियार का कहना है कि दशहरा और कंबाला दोनों अलग-अलग सांस्कृतिक परंपराएं हैं और उन्हें एक मंच पर मिलाना मैसूर के लोगों की भावनाओं के खिलाफ है। उन्होंने उच्चस्तरीय समिति की बैठक में ही यह आपत्ति दर्ज कराई।
कंबाला खेल क्या है और यह इतना चर्चित क्यों है?
कंबाला तटीय कर्नाटक की पारंपरिक भैंस दौड़ प्रतियोगिता है, जो मुख्यतः तुलुनाडु क्षेत्र में प्रचलित है। 'कांतारा चैप्टर-1' फिल्म की सफलता के बाद यह खेल राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया और इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी।
CM डीके शिवकुमार ने इस विवाद पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि सरकार सभी सुझावों पर विचार कर रही है और अंतिम निर्णय सभी संबंधित पक्षों से चर्चा के बाद लिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह फैसला अकेले उनका नहीं होगा।
इस वर्ष मैसूर दशहरा कब और कैसे मनाया जाएगा?
राज्य सरकार ने घोषणा की है कि 'नादा हब्बा दशहरा-2026' सूखे जैसे हालात के बावजूद 11 दिनों तक भव्य तरीके से मनाया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय गायकों के कार्यक्रम और खेल प्रतियोगिताएं भी प्रस्तावित हैं।
राष्ट्र प्रेस
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