बांदीपुर-नागरहोल सफारी फिर शुरू होगी: CM शिवकुमार के निर्देश, सख्त सुरक्षा उपाय अनिवार्य
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 30 जून 2026 को अधिकारियों को निर्देश दिया कि बांदीपुर और नागरहोल राष्ट्रीय उद्यानों में सफारी और इको-टूरिज्म गतिविधियाँ तत्काल प्रभाव से फिर शुरू की जाएँ — लेकिन केवल तभी जब पर्यटकों की सुरक्षा के लिए कड़े एहतियाती उपाय पूरी तरह लागू कर दिए जाएँ। यह निर्देश विधान सौधा स्थित समिति कक्ष में कर्नाटक राज्य वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए दिए गए।
बैठक में क्या सामने आया
बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि बांदीपुर और नागरहोल के सफारी तथा इको-टूरिज्म क्षेत्रों में बाघों और तेंदुओं की संख्या उन इलाकों की तुलना में अधिक है जहाँ मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएँ ज़्यादा होती हैं। इसी तथ्य को आधार बनाकर मुख्यमंत्री ने सफारी पुनः आरंभ करने की हरी झंडी दी, साथ ही स्पष्ट किया कि सुरक्षा प्रोटोकॉल में कोई समझौता नहीं होगा।
BMIC कॉरिडोर से बाधित हुए वन्यजीव मार्ग
अधिकारियों ने बैठक में एक गंभीर चिंता उजागर की — BMIC कॉरिडोर के निर्माण के कारण हाथियों, बाघों और तेंदुओं के पारंपरिक आवागमन मार्ग बाधित हो गए हैं। इसके परिणामस्वरूप ये जंगली जानवर जंगलों से निकलकर चन्नापटना और रामनगर क्षेत्रों की ओर जा रहे हैं, जिससे इन इलाकों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएँ बढ़ रही हैं।
इसके अलावा अधिकारियों ने बताया कि बेंगलुरु-मैसूर एक्सप्रेसवे को मंजूरी देते समय वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए अंडरपास, ओवरपास और विशेष वन्यजीव गलियारे बनाने की शर्त रखी गई थी, परंतु सड़क निर्माण के दौरान इन शर्तों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया।
मेकेदातु परियोजना पर तमिलनाडु से विवाद
बैठक में मुख्यमंत्री शिवकुमार ने मेकेदातु पेयजल परियोजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने अधिकारियों को इस परियोजना से जुड़े छोटे तकनीकी मुद्दों की पहचान कर उन्हें प्रभावी ढंग से हल करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु इस परियोजना में देरी करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में 'छोटी-छोटी तकनीकी आपत्तियाँ' उठा रहा है।
बेंगलुरु में खतरनाक पेड़ों पर चिंता
स्थायी समिति के सदस्यों ने बेंगलुरु शहर में सूखे और खतरनाक पेड़ों तथा उनकी शाखाओं को हटाने संबंधी पहले दिए गए निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन न होने पर भी गहरी चिंता जताई। सदस्यों ने कहा कि समय पर कार्रवाई न होने के कारण भारी बारिश और तेज़ हवाओं के दौरान पेड़ और शाखाएँ गिरने से कई हादसे हो चुके हैं।
इन चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को सार्वजनिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि खतरनाक पेड़ों और शाखाओं की तुरंत पहचान कर उन्हें हटाया जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक एहतियाती कदम उठाए जाएँ।
आगे क्या होगा
सफारी पुनः शुरू होने की समयसीमा सुरक्षा उपायों के क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी। गौरतलब है कि बांदीपुर और नागरहोल दोनों ही राष्ट्रीय उद्यान कर्नाटक के प्रमुख पर्यटन स्थल हैं और इनके बंद रहने से स्थानीय इको-टूरिज्म अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ा है। वन्यजीव गलियारों की बहाली और BMIC कॉरिडोर के कारण उत्पन्न संघर्ष का दीर्घकालिक समाधान अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।