26 जून 2026
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बांदीपुर और नागरहोल टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी फिर शुरू, कर्नाटक सरकार ने दी मंजूरी

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बांदीपुर और नागरहोल टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी फिर शुरू, कर्नाटक सरकार ने दी मंजूरी

सारांश

100 से अधिक दिनों के प्रतिबंध और ₹400 करोड़ के अनुमानित नुकसान के बाद कर्नाटक सरकार ने बांदीपुर और नागरहोल टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी फिर से शुरू करने की मंजूरी दी। 25 बाघों के स्थानांतरण और वैज्ञानिक वहन क्षमता आकलन के बाद यह फैसला 8,000 से अधिक इको-टूरिज्म कर्मियों को राहत देगा।

मुख्य बातें

कर्नाटक सरकार ने 26 जून 2026 को बांदीपुर और नागरहोल टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी पूर्ण रूप से पुनः शुरू करने की अनुमति दी।
सफारी पर रोक 7 नवंबर 2025 को बाघों के जानलेवा हमलों के बाद 100 से अधिक दिनों के लिए लगाई गई थी।
25 बाघों और शावकों को पकड़कर अन्यत्र स्थानांतरित किया गया, जिससे हमलों की संख्या शून्य हो गई।
इको-टूरिज्म पर निर्भर लगभग 8,000 नौकरियाँ प्रभावित हुई थीं; उद्योग को अनुमानतः ₹400 करोड़ का नुकसान हुआ।
सफारी संचालन तकनीकी समिति की सिफारिशों और वैज्ञानिक इकोलॉजिकल कैरिंग कैपेसिटी के आधार पर विनियमित तरीके से होगा।

कर्नाटक सरकार ने 26 जून 2026 को बांदीपुर टाइगर रिजर्व और नागरहोल टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी संचालन को पूरी तरह पुनः आरंभ करने की अनुमति दे दी। यह निर्णय विशेषज्ञों और सरकारी अधिकारियों की एक तकनीकी समिति द्वारा की गई वैज्ञानिक इकोलॉजिकल कैरिंग कैपेसिटी (वहन क्षमता) की समीक्षा के आधार पर लिया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी।

प्रतिबंध की पृष्ठभूमि

राज्य सरकार ने बाघों के कई जानलेवा हमलों के बाद 7 नवंबर 2025 को इन दोनों रिजर्व में सफारी पर पूर्ण रोक लगा दी थी। इसके बाद स्थिति का वैज्ञानिक आकलन करने के लिए एक तकनीकी समिति गठित की गई। 100 से अधिक दिनों तक चले इस प्रतिबंध के दौरान 25 बाघों और शावकों को पकड़कर अन्यत्र स्थानांतरित किया गया तथा मैसूरु-चामराजनगर बेल्ट में सख्त प्रतिबंध लागू किए गए, जिससे जानवरों के हमलों की संख्या शून्य तक आ गई।

तकनीकी समिति की सिफारिशें

तकनीकी समिति ने दोनों टाइगर रिजर्व की इकोलॉजिकल कैरिंग कैपेसिटी का विस्तृत मूल्यांकन किया और सफारी संचालन को नियंत्रित करने के लिए अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपीं। राज्य सरकार ने समिति की रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए वन विभाग को निर्देश दिया है कि निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार सस्टेनेबल टूरिज्म (टिकाऊ पर्यटन) सुनिश्चित करते हुए सफारी संचालन पुनः शुरू किया जाए। सरकार के अनुसार, सफारी ऑपरेशन विनियमित तरीके से किए जाएंगे और समिति की सिफारिशों का सख्ती से पालन किया जाएगा।

आर्थिक असर और स्थानीय रोजगार

इस इलाके में कथित तौर पर लगभग 8,000 नौकरियाँ इको-टूरिज्म पर प्रत्यक्ष रूप से निर्भर हैं। लंबे समय से चले प्रतिबंध ने स्थानीय लोगों की आजीविका पर गंभीर असर डाला, जिससे इको-टूरिज्म से जुड़े लोगों ने विरोध-प्रदर्शन भी किए। उद्योग प्रतिनिधियों के अनुमान के अनुसार, वर्ष के अंत में छुट्टियों के मौसम के दौरान लगभग ₹400 करोड़ का नुकसान हुआ। पर्यटकों की बुकिंग में उल्लेखनीय गिरावट आई और कई पर्यटक तमिलनाडु में मासिनागुडी तथा केरल में वायनाड जैसे वैकल्पिक गंतव्यों की ओर रुख करने लगे।

इको-टूरिज्म और वन्यजीव संरक्षण में संतुलन

कर्नाटक सरकार ने इको-टूरिज्म मॉडल के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है, जो इकोलॉजिकल अखंडता की रक्षा के साथ-साथ स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार और आजीविका के अवसर सुनिश्चित करता है। सरकार ने स्पष्ट किया कि पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना इस फैसले की मूल भावना है। वैज्ञानिक रूप से विनियमित विज़िटर मैनेजमेंट के जरिए वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाएगी।

आगे की राह

इस निर्णय से पर्यटकों, इको-टूरिज्म पर निर्भर स्थानीय समुदायों और समग्र पर्यटन क्षेत्र को राहत मिलने की उम्मीद है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में इको-टूरिज्म लॉबी और स्थानीय जनता के बीच जान और आजीविका को लेकर तनाव बना हुआ था। वन विभाग द्वारा तय दिशानिर्देशों के अनुपालन की निगरानी के लिए व्यवस्था किए जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होती है — क्या वन विभाग वैज्ञानिक दिशानिर्देशों को दीर्घकालिक रूप से लागू कर पाएगा, या पर्यटन लॉबी का दबाव धीरे-धीरे नियमों को कमजोर करेगा? ₹400 करोड़ के नुकसान का आँकड़ा बताता है कि आर्थिक दबाव नीतिगत फैसलों को कितनी तेजी से प्रभावित करता है। बिना पारदर्शी निगरानी तंत्र के, यह 'वैज्ञानिक विनियमन' महज कागजी खानापूर्ति बनकर रह सकता है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांदीपुर और नागरहोल टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी कब से फिर शुरू होगी?
कर्नाटक सरकार ने 26 जून 2026 को जंगल सफारी पूर्ण रूप से पुनः आरंभ करने की मंजूरी दे दी है। वन विभाग तकनीकी समिति की सिफारिशों के अनुसार विनियमित तरीके से संचालन शुरू करेगा।
बांदीपुर-नागरहोल में सफारी पर प्रतिबंध क्यों लगाया गया था?
राज्य सरकार ने बाघों के कई जानलेवा हमलों के बाद 7 नवंबर 2025 को सफारी पर रोक लगाई थी। इसके बाद स्थिति का आकलन करने और सुरक्षित पुनः संचालन की सिफारिश के लिए एक तकनीकी समिति गठित की गई थी।
प्रतिबंध के दौरान इको-टूरिज्म को कितना नुकसान हुआ?
उद्योग प्रतिनिधियों के अनुमान के अनुसार, छुट्टियों के मौसम के दौरान लगभग ₹400 करोड़ का नुकसान हुआ। इस क्षेत्र में लगभग 8,000 नौकरियाँ इको-टूरिज्म पर निर्भर हैं और लंबे प्रतिबंध से इनकी आजीविका बुरी तरह प्रभावित हुई।
बाघों के हमलों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए?
25 बाघों और शावकों को पकड़कर अन्यत्र स्थानांतरित किया गया और मैसूरु-चामराजनगर बेल्ट में सख्त प्रतिबंध लागू किए गए। इन उपायों से जानवरों के हमलों की संख्या शून्य तक आ गई, जिसके बाद सफारी पुनः शुरू करने का निर्णय लिया गया।
नई सफारी व्यवस्था में क्या बदलाव होंगे?
सफारी संचालन अब तकनीकी समिति द्वारा निर्धारित इकोलॉजिकल कैरिंग कैपेसिटी के आधार पर विनियमित तरीके से होगा। पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए वैज्ञानिक विज़िटर मैनेजमेंट दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन अनिवार्य किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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