बांदीपुर और नागरहोल टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी फिर शुरू, कर्नाटक सरकार ने दी मंजूरी
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक सरकार ने 26 जून 2026 को बांदीपुर टाइगर रिजर्व और नागरहोल टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी संचालन को पूरी तरह पुनः आरंभ करने की अनुमति दे दी। यह निर्णय विशेषज्ञों और सरकारी अधिकारियों की एक तकनीकी समिति द्वारा की गई वैज्ञानिक इकोलॉजिकल कैरिंग कैपेसिटी (वहन क्षमता) की समीक्षा के आधार पर लिया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी।
प्रतिबंध की पृष्ठभूमि
राज्य सरकार ने बाघों के कई जानलेवा हमलों के बाद 7 नवंबर 2025 को इन दोनों रिजर्व में सफारी पर पूर्ण रोक लगा दी थी। इसके बाद स्थिति का वैज्ञानिक आकलन करने के लिए एक तकनीकी समिति गठित की गई। 100 से अधिक दिनों तक चले इस प्रतिबंध के दौरान 25 बाघों और शावकों को पकड़कर अन्यत्र स्थानांतरित किया गया तथा मैसूरु-चामराजनगर बेल्ट में सख्त प्रतिबंध लागू किए गए, जिससे जानवरों के हमलों की संख्या शून्य तक आ गई।
तकनीकी समिति की सिफारिशें
तकनीकी समिति ने दोनों टाइगर रिजर्व की इकोलॉजिकल कैरिंग कैपेसिटी का विस्तृत मूल्यांकन किया और सफारी संचालन को नियंत्रित करने के लिए अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपीं। राज्य सरकार ने समिति की रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए वन विभाग को निर्देश दिया है कि निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार सस्टेनेबल टूरिज्म (टिकाऊ पर्यटन) सुनिश्चित करते हुए सफारी संचालन पुनः शुरू किया जाए। सरकार के अनुसार, सफारी ऑपरेशन विनियमित तरीके से किए जाएंगे और समिति की सिफारिशों का सख्ती से पालन किया जाएगा।
आर्थिक असर और स्थानीय रोजगार
इस इलाके में कथित तौर पर लगभग 8,000 नौकरियाँ इको-टूरिज्म पर प्रत्यक्ष रूप से निर्भर हैं। लंबे समय से चले प्रतिबंध ने स्थानीय लोगों की आजीविका पर गंभीर असर डाला, जिससे इको-टूरिज्म से जुड़े लोगों ने विरोध-प्रदर्शन भी किए। उद्योग प्रतिनिधियों के अनुमान के अनुसार, वर्ष के अंत में छुट्टियों के मौसम के दौरान लगभग ₹400 करोड़ का नुकसान हुआ। पर्यटकों की बुकिंग में उल्लेखनीय गिरावट आई और कई पर्यटक तमिलनाडु में मासिनागुडी तथा केरल में वायनाड जैसे वैकल्पिक गंतव्यों की ओर रुख करने लगे।
इको-टूरिज्म और वन्यजीव संरक्षण में संतुलन
कर्नाटक सरकार ने इको-टूरिज्म मॉडल के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है, जो इकोलॉजिकल अखंडता की रक्षा के साथ-साथ स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार और आजीविका के अवसर सुनिश्चित करता है। सरकार ने स्पष्ट किया कि पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना इस फैसले की मूल भावना है। वैज्ञानिक रूप से विनियमित विज़िटर मैनेजमेंट के जरिए वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाएगी।
आगे की राह
इस निर्णय से पर्यटकों, इको-टूरिज्म पर निर्भर स्थानीय समुदायों और समग्र पर्यटन क्षेत्र को राहत मिलने की उम्मीद है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में इको-टूरिज्म लॉबी और स्थानीय जनता के बीच जान और आजीविका को लेकर तनाव बना हुआ था। वन विभाग द्वारा तय दिशानिर्देशों के अनुपालन की निगरानी के लिए व्यवस्था किए जाने की संभावना है।