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पलामू टाइगर रिजर्व और नेतरहाट ईएसजेड में 59 होटल-रिसॉर्ट निर्माण पर एनजीटी का नोटिस, 8 जुलाई को सुनवाई

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पलामू टाइगर रिजर्व और नेतरहाट ईएसजेड में 59 होटल-रिसॉर्ट निर्माण पर एनजीटी का नोटिस, 8 जुलाई को सुनवाई

सारांश

झारखंड के पलामू टाइगर रिजर्व और नेतरहाट ईएसजेड में कथित तौर पर 59 होटल-रिसॉर्ट बिना अनिवार्य मास्टर प्लान और पर्यावरणीय मंज़ूरी के बन रहे हैं। एनजीटी ने एनटीसीए और झारखंड सरकार को नोटिस देकर एक महीने में जवाब माँगा है — अगली सुनवाई 8 जुलाई को।

मुख्य बातें

एनजीटी की कोलकाता पूर्वी क्षेत्रीय पीठ ने पलामू टाइगर रिजर्व और नेतरहाट ईएसजेड में अवैध निर्माण पर संज्ञान लेते हुए नोटिस जारी किया।
याचिका में दावा: ईएसजेड क्षेत्र में कथित तौर पर 59 होटल-रिसॉर्ट निर्माणाधीन, जिनमें से 2 पलामू वन्यजीव अभयारण्य के भीतर।
एनटीसीए , झारखंड के मुख्य सचिव और पलामू टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर को एक महीने में जवाब देने का निर्देश।
अनिवार्य जोनल मास्टर प्लान , टूरिज्म मास्टर प्लान और मॉनिटरिंग कमेटी अब तक गठित नहीं — निर्माण फिर भी जारी।
अगली सुनवाई 8 जुलाई 2026 को; आवेदक ने अवैध निर्माण पर तत्काल रोक और ध्वस्तीकरण की माँग की।

राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) की कोलकाता स्थित पूर्वी क्षेत्रीय पीठ ने पलामू टाइगर रिजर्व और नेतरहाट इको सेंसिटिव ज़ोन (ईएसजेड) में पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी कर चल रहे व्यावसायिक निर्माण कार्यों पर गंभीर संज्ञान लेते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। पर्यावरण कार्यकर्ता गोविंद पाठक की याचिका पर 25 मई 2026 को हुई सुनवाई के बाद यह नोटिस जारी किए गए हैं। अगली सुनवाई 8 जुलाई 2026 को निर्धारित है।

मुख्य आरोप और याचिका का सार

याचिका में दावा किया गया है कि ईएसजेड क्षेत्र के भीतर कथित तौर पर 59 होटल और रिसॉर्ट निर्माणाधीन हैं, जिनमें से दो निर्माण पलामू वन्यजीव अभयारण्य की सीमाओं के भीतर बताए गए हैं। आवेदक का कहना है कि ईएसजेड अधिसूचना के अंतर्गत अनिवार्य जोनल मास्टर प्लान, टूरिज्म मास्टर प्लान और मॉनिटरिंग कमेटी अब तक गठित नहीं की गई है, फिर भी निर्माण कार्य अबाध रूप से जारी हैं। यह मामला बेतला नेशनल पार्क और महुआडांड़ वुल्फ सेंचुरी के आसपास के संवेदनशील वन क्षेत्रों को भी प्रभावित करता है।

एनजीटी की पीठ और नोटिस का विवरण

मामले की सुनवाई न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य ईश्वर सिंह की पीठ के समक्ष हुई। पीठ ने इसे गंभीर पर्यावरणीय मामला मानते हुए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए), झारखंड के मुख्य सचिव, संबंधित ज़िला अधिकारियों और पलामू टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर को नोटिस जारी कर एक महीने के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

आवेदक की माँगें

पर्यावरण कार्यकर्ता गोविंद पाठक ने एनजीटी से तीन प्रमुख माँगें रखी हैं — पहली, ईएसजेड में चल रहे सभी अवैध निर्माण पर तत्काल रोक; दूसरी, पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन में बने होटल-रिसॉर्ट को ध्वस्त किया जाए; और तीसरी, इस चूक के लिए ज़िम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाए।

व्यापक पर्यावरणीय संदर्भ

गौरतलब है कि भारत में संरक्षित वन क्षेत्रों के आसपास ईएसजेड की अधिसूचना सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद जारी की गई थी, ताकि वन्यजीव आवासों पर मानवीय गतिविधियों का दबाव सीमित रखा जा सके। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में पर्यटन के नाम पर संरक्षित क्षेत्रों के निकट वाणिज्यिक गतिविधियों में तेज़ी देखी जा रही है और पर्यावरण कार्यकर्ता लगातार इस पर आपत्ति जता रहे हैं। पलामू टाइगर रिजर्व झारखंड का एकमात्र टाइगर रिजर्व है और यह देश के उन शुरुआती नौ रिजर्वों में से एक है जिन्हें 1973 में 'प्रोजेक्ट टाइगर' के तहत शामिल किया गया था।

आगे क्या होगा

एनजीटी की अगली सुनवाई 8 जुलाई 2026 को होगी, जिसमें नोटिस पाए सभी पक्षों को अपना जवाब दाखिल करना होगा। यदि एनजीटी याचिका में लगाए गए आरोपों को सही पाती है, तो निर्माण पर अंतरिम रोक और संभावित ध्वस्तीकरण आदेश की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ज़मीन पर लागू करने की इच्छाशक्ति नदारद रहती है। जब अनिवार्य मास्टर प्लान और मॉनिटरिंग कमेटी वर्षों बाद भी नहीं बनी, तो सवाल उठता है कि ज़िम्मेदार अधिकारी किसके दबाव में चुप रहे। पलामू जैसे ऐतिहासिक टाइगर रिजर्व में यदि 59 व्यावसायिक निर्माण बिना रोक-टोक के खड़े हो सकते हैं, तो देशभर के अन्य संरक्षित क्षेत्रों की स्थिति का अनुमान लगाना कठिन नहीं। एनजीटी की सक्रियता स्वागत योग्य है, पर असली परीक्षा यह होगी कि क्या अदालती नोटिस से आगे जाकर ठोस ध्वस्तीकरण और जवाबदेही सुनिश्चित होती है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनजीटी ने पलामू टाइगर रिजर्व मामले में किसे नोटिस जारी किया है?
एनजीटी ने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए), झारखंड के मुख्य सचिव, संबंधित ज़िला अधिकारियों और पलामू टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर को नोटिस जारी किया है। सभी को एक महीने के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
नेतरहाट और पलामू ईएसजेड में कितने होटल-रिसॉर्ट बन रहे हैं?
याचिका में दावा किया गया है कि ईएसजेड क्षेत्र में कथित तौर पर 59 होटल और रिसॉर्ट निर्माणाधीन हैं। इनमें से दो निर्माण पलामू वन्यजीव अभयारण्य की सीमाओं के भीतर बताए गए हैं।
इस मामले में पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन कैसे हुआ?
याचिका के अनुसार, ईएसजेड अधिसूचना के तहत अनिवार्य जोनल मास्टर प्लान, टूरिज्म मास्टर प्लान और मॉनिटरिंग कमेटी अब तक तैयार नहीं की गई है। इसके बावजूद बड़े पैमाने पर व्यावसायिक निर्माण कार्य जारी हैं, जो पर्यावरणीय नियमों का सीधा उल्लंघन है।
एनजीटी में इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
अगली सुनवाई 8 जुलाई 2026 को निर्धारित है। तब तक नोटिस पाए सभी पक्षों को अपना जवाब दाखिल करना होगा।
पलामू टाइगर रिजर्व का पर्यावरणीय महत्व क्या है?
पलामू टाइगर रिजर्व झारखंड का एकमात्र टाइगर रिजर्व है और 1973 में 'प्रोजेक्ट टाइगर' के तहत शामिल किए गए देश के शुरुआती नौ रिजर्वों में से एक है। इसके साथ बेतला नेशनल पार्क और महुआडांड़ वुल्फ सेंचुरी भी इस संवेदनशील वन पारिस्थितिकी का हिस्सा हैं।
राष्ट्र प्रेस
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