झारखंड हाईकोर्ट ने पलामू टाइगर रिजर्व में बाघों के संरक्षण पर लिया कड़ा निर्णय
सारांश
Key Takeaways
- पलामू टाइगर रिजर्व में बाघों के संरक्षण के लिए कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया।
- पीसीसीएफ को सशरीर उपस्थित होने का आदेश दिया गया।
- वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर विस्तृत रिपोर्ट की मांग की गई।
- अवयवों के संरक्षण में लापरवाही के मामले में न्याय मित्र के सुझावों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
- राज्य सरकार और वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाए गए।
रांची, २६ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड हाईकोर्ट ने पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) में बाघों के संरक्षण के मुद्दे पर राज्य सरकार और वन विभाग की लापरवाही को लेकर सख्त रुख अपनाया है।
चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए इस बात पर नाराजगी व्यक्त की कि पूर्व में दिए गए स्पष्ट आदेश के बावजूद पीसीसीएफ ने व्यक्तिगत रूप से शपथ पत्र नहीं दाखिल किया और उनके स्थान पर कनीय अधिकारियों ने जवाब प्रस्तुत किया।
खंडपीठ ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि पीसीसीएफ अदालत के निर्देशों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। कोर्ट ने आगामी सुनवाई में पीसीसीएफ और संबंधित वन अधिकारियों को सशरीर उपस्थित होने का आदेश दिया है। अदालत ने राज्य में वन्यजीवों, विशेषकर बाघों और हाथियों की सुरक्षा और पुनर्वास के संबंध में लंबित निर्देशों के अनुपालन की विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी है।
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने इस बात पर निराशा व्यक्त की कि एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण सुझावों पर भी विभाग ने अब तक कोई ठोस जानकारी साझा नहीं की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कनीय अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत शपथ पत्र को स्वीकार नहीं किया जाएगा और पीसीसीएफ को उन सभी बिंदुओं पर जवाब देना होगा, जिन्हें कोर्ट ने पहले जानने की इच्छा व्यक्त की थी।
पलामू टाइगर रिजर्व में अव्यवस्था और वर्षों से लटकी संरक्षण योजनाओं के संदर्भ में हाईकोर्ट ने पूर्व में केंद्र और राज्य दोनों के अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। अदालत ने वन विभाग को निर्देश दिया है कि पीसीसीएफ वन्यजीवों के संरक्षण, पुनर्वास और पीटीआर की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत शपथ पत्र प्रस्तुत करें।
पिछली सुनवाइयों में भी कोर्ट ने जानवरों की सुरक्षा में लापरवाही पर नाराजगी जताई थी, लेकिन विभाग की ओर से अपेक्षित प्रगति न दिखाई देने के कारण अब सख्त रुख अपनाया गया है।