कर्नाटक हाईकोर्ट ने टाइगर सफारी पर रोक लगाने की याचिका को किया खारिज, सरकार को दिए निर्देश

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कर्नाटक हाईकोर्ट ने टाइगर सफारी पर रोक लगाने की याचिका को किया खारिज, सरकार को दिए निर्देश

सारांश

कर्नाटक हाईकोर्ट ने टाइगर सफारी पर रोक लगाने की याचिका को खारिज कर दिया है। यह निर्णय बाघों के संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर आधारित है। जानें, कोर्ट ने राज्य सरकार को क्या निर्देश दिए हैं।

Key Takeaways

  • कर्नाटक हाईकोर्ट ने टाइगर सफारी पर रोक लगाने की याचिका को खारिज किया।
  • राज्य सरकार को कोर, बफर और पर्यटन क्षेत्रों का सीमांकन करने का निर्देश दिया गया।
  • बाघों के संरक्षण के लिए कोर्ट का यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
  • सफारी संचालन के संदर्भ में सरकार को जवाब देने के लिए कहा गया।
  • बांदीपुर और नागरहोल टाइगर रिजर्व दक्षिण भारत के प्रमुख संरक्षित वन क्षेत्र हैं।

बेंगलुरु, 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। कर्नाटक उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने राज्य में टाइगर सफारी पर प्रतिबंध लगाने से इनकार किया है। मुख्य न्यायाधीश विभु बखरू और न्यायमूर्ति सी.एम. पूनाचा की पीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह एक विस्तृत हलफनामा प्रस्तुत कर कोर, बफर और पर्यटन क्षेत्रों का स्पष्ट सीमांकन करे और यह भी बताए कि सफारी कहां-कहां संचालित की जा रही है।

यह निर्णय मैसूरु निवासी वी. रविकुमार द्वारा दायर जनहित याचिका के संदर्भ में दिया गया, जिसमें टाइगर सफारी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि आरक्षित वनों के उन हिस्सों में सफारी कराई जा रही है, जो बाघों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण आवास हैं, और यह स्थापित संरक्षण दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है।

हालांकि, अदालत ने तत्काल प्रतिबंध लगाने से इनकार करते हुए राज्य सरकार को इस याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने सरकार से नक्शों के जरिए कोर, बफर और पर्यटन क्षेत्रों का स्पष्ट विवरण प्रस्तुत करने को कहा।

याचिका में सुप्रीम कोर्ट के वन संरक्षण और वन्यजीव प्रबंधन से जुड़े ऐतिहासिक फैसलों का संदर्भ दिया गया। इसमें दावा किया गया कि जिन क्षेत्रों में सफारी कराई जा रही है, वे वास्तव में कोर टाइगर हैबिटेट हैं, जहां इस तरह की गतिविधियों की अनुमति नहीं है। याचिकाकर्ता ने चेतावनी दी कि इससे मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष बढ़ सकता है।

गौरतलब है कि वर्ष 2025 में बांदीपुर टाइगर रिजर्व से बाघों के ग्रामीणों पर हमले की घटनाओं के बाद राज्य सरकार ने जंगल सफारी पर रोक लगा दी थी। इन घटनाओं में कुछ लोगों की मौत हुई थी। हालांकि, मंत्री ने बाद में कहा था कि इस बात के कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं कि जंगल सफारी से बाघ, तेंदुए या हाथियों को कोई गंभीर व्यवधान होता है या इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ता है। इसके बाद एक तकनीकी समिति की सिफारिशों के आधार पर चरणबद्ध तरीके से टाइगर सफारी को फिर से शुरू करने की अनुमति दी गई।

बांदीपुर टाइगर रिजर्व मैसूरु और चामराजनगर जिलों में फैला हुआ है, जबकि नागरहोल टाइगर रिज़र्व मैसूरु और कोडागु जिलों में स्थित है। ये दोनों ही दक्षिण भारत के महत्वपूर्ण संरक्षित वन क्षेत्र हैं, जो अपनी समृद्ध जैव विविधता और बाघ संरक्षण के लिए जाने जाते हैं।

बांदीपुर टाइगर रिजर्व दक्षिण कर्नाटक में स्थित है और यह बड़े नीलगिरि बायोस्फीयर रिज़र्व का हिस्सा है। यहां बाघों, हाथियों और विविध वनस्पतियों एवं जीव-जंतुओं की बड़ी संख्या पाई जाती है। यह तमिलनाडु और केरल के अन्य संरक्षित वनों से भी जुड़ा हुआ है।

वहीं, नागरहोल टाइगर रिजर्व, जिसे राजीव गांधी नेशनल पार्क के नाम से भी जाना जाता है, अपने घने जंगलों और वन्यजीवों की उच्च घनत्व के लिए प्रसिद्ध है। यहां बाघ, तेंदुए, हाथी और हिरणों की विभिन्न प्रजातियां पाई जाती हैं। इस रिजर्व के भीतर स्थित काबिनी बैकवाटर्स में अक्सर वन्यजीवों के दर्शन होते हैं। दोनों टाइगर रिजर्व प्रोजेक्ट टाइगर के तहत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और पश्चिमी घाट क्षेत्र में पारिस्थितिक संतुलन तथा वन्यजीव संरक्षण के लिए बेहद अहम हैं।

Point of View

जिससे बाघों के संरक्षण में मदद मिलेगी।
NationPress
16/04/2026

Frequently Asked Questions

कर्नाटक हाईकोर्ट ने टाइगर सफारी पर रोक क्यों नहीं लगाई?
कर्नाटक हाईकोर्ट ने यह निर्णय जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान लिया, जिसमें सरकार को सफारी के संचालन के बारे में जानकारी देने को कहा गया।
क्या टाइगर सफारी मानव-वन्यजीव संघर्ष को बढ़ा सकती है?
याचिकाकर्ता ने चेतावनी दी कि टाइगर सफारी से मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ सकता है, लेकिन सरकार ने इससे संबंधित वैज्ञानिक प्रमाणों का अभाव दर्शाया।
बांदीपुर टाइगर रिजर्व कहां स्थित है?
बांदीपुर टाइगर रिजर्व दक्षिण कर्नाटक में स्थित है और यह बड़े नीलगिरि बायोस्फीयर रिज़र्व का हिस्सा है।
नागरहोल टाइगर रिजर्व किसे कहते हैं?
नागरहोल टाइगर रिजर्व, जिसे राजीव गांधी नेशनल पार्क के नाम से भी जाना जाता है, अपने घने जंगलों के लिए प्रसिद्ध है।
टाइगर सफारी का क्या महत्व है?
टाइगर सफारी का महत्व बाघों के संरक्षण और स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने में है।
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