8 अगस्त 2026
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कर्नाटक हाईकोर्ट ने टाइगर सफारी पर प्रतिबंध लगाने की याचिका को किया खारिज, राज्य को स्पष्ट निर्देश

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कर्नाटक हाईकोर्ट ने टाइगर सफारी पर प्रतिबंध लगाने की याचिका को किया खारिज, राज्य को स्पष्ट निर्देश

सारांश

कर्नाटक हाईकोर्ट ने टाइगर सफारी पर प्रतिबंध लगाने से इनकार करते हुए राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वह कोर, बफर और पर्यटन क्षेत्रों का सीमांकन करे। यह निर्णय मैसूरु निवासी द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान आया।

मुख्य बातें

कर्नाटक हाईकोर्ट का निर्णय टाइगर सफारी पर प्रतिबंध से इनकार करता है।
राज्य सरकार को कोर, बफर क्षेत्रों का सीमांकन करने के निर्देश दिए गए हैं।
याचिका में वन्यजीव संरक्षण के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन होने का आरोप लगाया गया था।
बांदीपुर और नागरहोल टाइगर रिजर्व की महत्वपूर्ण भूमिका है।
यह क्षेत्र पारिस्थितिक संतुलन और वन्यजीव संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है।

बेंगलुरु, 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने राज्य में टाइगर सफारी पर प्रतिबंध लगाने से इनकार कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश विभु बखरू और न्यायमूर्ति सी.एम. पूनाचा की पीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह एक विस्तृत हलफनामा दाखिल कर कोर, बफर और पर्यटन क्षेत्रों का स्पष्ट सीमांकन करे और यह भी बताए कि सफारी कहाँ संचालित की जा रही है।

यह निर्णय मैसूरु निवासी वी. रविकुमार द्वारा दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान सुनाया गया। याचिका में टाइगर सफारी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि आरक्षित वनों के उन हिस्सों में सफारी कराई जा रही है, जो बाघों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण आवास (क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट) हैं, और यह स्थापित संरक्षण दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है।

हालांकि, अदालत ने तत्काल प्रतिबंध लगाने से इनकार करते हुए राज्य सरकार को इस याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। साथ ही कोर्ट ने सरकार से यह भी कहा कि वह नक्शों के जरिए कोर, बफर और पर्यटन क्षेत्रों का स्पष्ट विवरण प्रस्तुत करे।

याचिका में सुप्रीम कोर्ट के वन संरक्षण और वन्यजीव प्रबंधन से जुड़े ऐतिहासिक फैसलों का हवाला दिया गया। इसमें दावा किया गया कि जिन क्षेत्रों में सफारी कराई जा रही है, वे वास्तव में कोर टाइगर हैबिटेट हैं, जहां इस तरह की गतिविधियों की अनुमति नहीं है। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि इन्हें फिर से शुरू करने का फैसला राजनीतिक और व्यावसायिक दबाव के चलते लिया गया है। याचिकाकर्ता ने चेतावनी दी कि इससे मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष बढ़ सकता है।

गौरतलब है कि वर्ष 2025 में बांदीपुर टाइगर रिजर्व से बाघों के बाहर निकलकर ग्रामीणों पर हमले की घटनाओं के बाद राज्य सरकार ने जंगल सफारी पर रोक लगा दी थी। इन घटनाओं में कुछ लोगों की मौत हुई थी, जबकि एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ था। हालांकि, बाद में सफारी दोबारा शुरू करने को लेकर मंत्री ने कहा था कि इस बात के कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं कि जंगल सफारी से बाघ, तेंदुए या हाथियों जैसे वन्यजीवों को कोई गंभीर व्यवधान होता है या इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ता है। इसके बाद एक तकनीकी समिति की सिफारिशों के आधार पर चरणबद्ध तरीके से टाइगर सफारी को फिर से शुरू करने की अनुमति दी गई।

बांदीपुर टाइगर रिजर्व मैसूरु और चामराजनगर जिलों में फैला हुआ है, जबकि नागरहोल टाइगर रिज़र्व मैसूरु और कोडागु जिलों में स्थित है। ये दोनों ही दक्षिण भारत के महत्वपूर्ण संरक्षित वन क्षेत्र हैं, जो अपनी समृद्ध जैव विविधता और बाघ संरक्षण के लिए जाने जाते हैं।

बांदीपुर टाइगर रिजर्व दक्षिण कर्नाटक में स्थित है और यह बड़े नीलगिरि बायोस्फीयर रिज़र्व का हिस्सा है। यहां बाघों, हाथियों और विविध वनस्पतियों एवं जीव-जंतुओं की बड़ी संख्या पाई जाती है। यह तमिलनाडु और केरल के अन्य संरक्षित वनों से जुड़ा हुआ है, जिससे यह एक महत्वपूर्ण वन्यजीव कॉरिडोर बनता है।

वहीं, नागरहोल टाइगर रिजर्व, जिसे राजीव गांधी नेशनल पार्क के नाम से भी जाना जाता है, अपने घने जंगलों, नदियों और वन्यजीवों की उच्च घनत्व के लिए प्रसिद्ध है। यहां बाघ, तेंदुए, हाथी और हिरणों की विभिन्न प्रजातियां पाई जाती हैं। इस रिजर्व के भीतर स्थित काबिनी बैकवाटर्स में अक्सर वन्यजीवों के दर्शन होते हैं। दोनों ही टाइगर रिजर्व प्रोजेक्ट टाइगर के तहत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और पश्चिमी घाट क्षेत्र में पारिस्थितिक संतुलन तथा वन्यजीव संरक्षण के लिए बेहद अहम माने जाते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक हाईकोर्ट ने टाइगर सफारी पर प्रतिबंध क्यों नहीं लगाया?
कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि इस विषय पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के बाद ही उचित निर्णय लिया जाएगा।
क्या टाइगर सफारी सुरक्षित है?
यह अभी बहस का विषय है, कोर्ट ने निर्देश दिया है कि कोर और बफर क्षेत्रों का सीमांकन किया जाए।
बांदीपुर टाइगर रिजर्व कहाँ स्थित है?
बांदीपुर टाइगर रिजर्व मैसूरु और चामराजनगर जिलों में स्थित है।
नागरहोल टाइगर रिजर्व को और क्या कहा जाता है?
नागरहोल टाइगर रिजर्व को राजीव गांधी नेशनल पार्क के नाम से भी जाना जाता है।
यह याचिका किसने दायर की थी?
यह याचिका मैसूरु निवासी वी. रविकुमार ने दायर की थी।
राष्ट्र प्रेस
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