क्या बेंगलुरु में अतिक्रमण मामला सरकार के लिए चुनौती बन गया?

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क्या बेंगलुरु में अतिक्रमण मामला सरकार के लिए चुनौती बन गया?

सारांश

बेंगलुरु में अतिक्रमण मामले पर कर्नाटक हाईकोर्ट की सुनवाई ने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया है। क्या यह मामला कर्नाटक सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है? जानिए इस मामले की पूरी जानकारी।

मुख्य बातें

बेंगलुरु में अतिक्रमण मामले पर कर्नाटक हाईकोर्ट की सुनवाई जारी है।
सरकार ने पुनर्वास के दावों को खारिज किया है।
विस्थापितों के लिए अस्थायी व्यवस्था की गई है।
भाजपा ने कांग्रेस पर बांग्लादेशियों को घर देने का आरोप लगाया है।
अगली सुनवाई 22 जनवरी को होगी।

बेंगलुरु, 7 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने बुधवार को एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई की, जिसमें बेंगलुरु के कोगिलु लेआउट के पास सरकारी भूमि पर स्थित आवासीय ढांचों को ध्वस्त करने के मामले को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

याचिकाकर्ता जबिया तबस्सुम और अन्य ने दावा किया कि लगभग 3,000 लोग इस क्षेत्र में पिछले 28 वर्षों से निवास कर रहे थे, और वसीम लेआउट तथा फकीर लेआउट में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा की गई तोड़फोड़ के कारण वे बेघर हो गए।

जनहित याचिका में प्रभावित निवासियों के लिए पुनर्वास और मुआवजे की मांग की गई है। एडवोकेट जनरल शशि किरण शेट्टी ने याचिका में किए गए दावों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह दावा कि लोग उस इलाके में 28 वर्षों से रह रहे हैं, गलत है।

उन्होंने कहा कि सरकार कोर्ट के सामने हर अवैध तरीके से बने घरों की सैटेलाइट तस्वीरें पेश करेगी। उन्होंने आगे तर्क किया कि पुनर्वास से जुड़ा सुप्रीम कोर्ट का निर्णय इस मामले में लागू नहीं होगा।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि विस्थापित लोगों के लिए अस्थायी व्यवस्था की गई है और सरकार खाना और चिकित्सा सुविधाएं प्रदान कर रही है। विस्तृत आपत्तियां दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय भी मांगा गया है।

उन्होंने यह भी बताया कि तोड़ा गया क्षेत्र एक झील के जलग्रहण क्षेत्र में आता है, इसलिए यह निवास के लिए उचित नहीं है। इस संदर्भ में तोड़फोड़ की गई क्योंकि आरोप था कि निवासी वहां अवैध रूप से रह रहे थे।

कोर्ट ने दलीलें सुनने के बाद मामले की अगली सुनवाई 22 जनवरी को तय की। इस बीच, अधिकारियों ने उन निवासियों द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों का सत्यापन किया, जिनके घरों को ध्वस्त किया गया था।

भाजपा ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार बांग्लादेशियों को घर देने की कोशिश कर रही है और चेतावनी दी है कि यदि अतिक्रमणकारियों को घर दिया गया, तो वह कानूनी लड़ाई लड़ेगी और विरोध प्रदर्शन करेगी।

भाजपा नेताओं ने कहा कि यह भूमि कन्नड़ लोगों की है और उन्होंने घोषणा की कि वे इसे बांग्लादेशियों को नहीं सौंपने देंगे। नेताओं ने ऐसे पोस्टर पकड़े हुए थे जिन पर सवाल था कि क्या स्थानीय लोगों के लिए घर उपलब्ध नहीं हैं और कथित अवैध प्रवासियों को घर कैसे दिए जा सकते हैं। पोस्टरों में कांग्रेस की सरकार पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का भी आरोप लगाया गया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बेंगलुरु में अतिक्रमण का मामला क्या है?
यह मामला बेंगलुरु के कोगिलु लेआउट में सरकारी जमीन पर बने आवासीय ढांचों के ध्वस्तीकरण को लेकर है।
कर्नाटक सरकार ने पुनर्वास के दावों को क्यों खारिज किया?
सरकार ने दावा किया है कि लोग उस क्षेत्र में 28 वर्षों से नहीं रह रहे थे और अवैध निर्माण के आधार पर कार्रवाई की गई।
इस मामले की अगली सुनवाई कब है?
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 22 जनवरी को तय की है।
भाजपा का इस मामले में क्या कहना है?
भाजपा ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस सरकार बांग्लादेशियों को घर देना चाहती है।
अवधि में कितने लोग प्रभावित हुए हैं?
लगभग 3,000 लोग इस क्षेत्र में प्रभावित हुए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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