अमृतसर CP तबादला: पूर्व डीजीपी शशिकांत बोले — 'पुलिस का राजनीतिकरण दशकों पुरानी हकीकत'
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब के पूर्व पुलिस महानिदेशक शशिकांत ने 7 अगस्त 2026 को अमृतसर के पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह के अचानक तबादले पर खुलकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस तंत्र में राजनीतिक हस्तक्षेप कोई नई परिघटना नहीं है — यह व्यवस्था का एक स्थापित हिस्सा है। साथ ही उन्होंने संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के नेता सुखबीर सिंह बादल की मुलाकात के संदर्भ में भाजपा-अकाली गठबंधन की संभावनाओं पर भी अपनी राय साझा की।
गुरप्रीत सिंह के तबादले पर शशिकांत का रुख
पूर्व डीजीपी ने कहा कि किसी एक घटना के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। उनके अनुसार, सरकारी सेवा में स्थानांतरण प्रशासनिक कार्यप्रणाली का अनिवार्य हिस्सा है। उन्होंने कहा, 'गुरप्रीत सिंह ने जो भी जानकारी जुटाई, वह अपने खुफिया सूत्रों और उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर जुटाई होगी।' शशिकांत ने गुरप्रीत सिंह को अपने कार्यकाल के दौरान साथ काम कर चुके अधिकारियों में 'सर्वश्रेष्ठ और अत्यंत सक्षम' बताया।
पुलिस के राजनीतिकरण पर बेबाक बयान
पुलिस के राजनीतिकरण के सवाल पर शशिकांत ने कहा कि यह समस्या उनके सेवाकाल के दौरान भी विद्यमान थी और आज भी लगभग हर राज्य में यही स्थिति है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस एक स्वतंत्र एजेंसी नहीं है — यह सरकार के अधीन काम करती है। इसलिए राजनीतिक व्यवस्था का प्रभाव पुलिस तंत्र पर स्वाभाविक रूप से पड़ता है। 'यदि कोई अधिकारी सरकार की कार्यप्रणाली के अनुरूप नहीं चलता, तो उसका तबादला कर दिया जाता है' — यह उनका सीधा कथन था। उन्होंने माना कि इस व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त करना आसान नहीं, क्योंकि प्रशासनिक ढाँचा इसी प्रकार संचालित होता है।
मोदी-बादल मुलाकात और BJP-अकाली गठबंधन की संभावना
संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सुखबीर सिंह बादल की मुलाकात पर शशिकांत ने कहा कि राजनीति में संवाद और गठबंधन की संभावनाएँ हमेशा बनी रहती हैं। गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिरोमणि अकाली दल (SAD) पहले लंबे समय तक पंजाब में गठबंधन सरकार चला चुके हैं। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष प्रस्तावित विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीति मज़बूत करने में जुटे हैं। लोकतंत्र में किसी भी दल को चुनाव से पहले या बाद में गठबंधन करने का पूरा अधिकार है — यह उनका स्पष्ट मत था।
पंजाब की कानून-व्यवस्था: एकपक्षीय नहीं है समस्या
पूर्व डीजीपी ने कहा कि कानून-व्यवस्था की चुनौतियाँ केवल पंजाब तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ भी गैंगस्टर और राजनीतिक अपराध जैसी गंभीर समस्याएँ मौजूद हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पूर्ववर्ती बादल सरकार के दौरान बेअदबी के मामले बड़े मुद्दे बने थे, जबकि कांग्रेस के कार्यकाल में भी हिंसा और गंभीर घटनाएँ सामने आई थीं। इसलिए, उनके अनुसार, कानून-व्यवस्था की विफलता को किसी एक सरकार के खाते में नहीं डाला जा सकता।
पुलिस और अपराध: एक अंतहीन प्रतिस्पर्धा
शशिकांत ने कहा कि पुलिस और अपराधियों के बीच हमेशा एक तरह की प्रतिस्पर्धा चलती रहती है — कभी पुलिस बढ़त बना लेती है, तो कभी अपराधी एक कदम आगे निकल जाते हैं। उनका मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपराध को पूरी तरह समाप्त करना संभव नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में ड्रग तस्करी और संगठित अपराध को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ है। आने वाले विधानसभा चुनाव में कानून-व्यवस्था का मुद्दा निर्णायक भूमिका निभा सकता है।