20 अगस्त 2026
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BJP-अकाली दल गठबंधन के संकेत: हरसिमरत कौर बादल बोलीं — 'समय आने पर सब सामने आएगा'

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BJP-अकाली दल गठबंधन के संकेत: हरसिमरत कौर बादल बोलीं — 'समय आने पर सब सामने आएगा'

सारांश

2020 में NDA से अलग हुए शिरोमणि अकाली दल और BJP के बीच पंजाब चुनाव से पहले फिर नज़दीकियाँ बढ़ रही हैं। हरसिमरत कौर बादल के 'दिल्ली से विकास' वाले बयान और सुखबीर-मोदी मुलाकात ने गठबंधन की अटकलों को नई हवा दी है।

मुख्य बातें

हरसिमरत कौर बादल ने 20 अगस्त को संगरूर में संकेत दिए कि BJP-अकाली दल के बीच गठबंधन संभव है।
उन्होंने कहा — 'इस बारे में घोषणा करना मेरा काम नहीं, समय आने पर सब सामने आएगा।' शिरोमणि अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हालिया मुलाकात के बाद गठबंधन की चर्चाएँ तेज हुईं।
अकाली दल ने महिला आरक्षण को जल्द लागू करने और लोकसभा सीटें बढ़ाने के केंद्र के प्रस्ताव का समर्थन किया।
2020 में कृषि कानूनों पर विवाद के बाद अकाली दल ने NDA से नाता तोड़ा था; 2022 में दोनों दलों को अलग-अलग हार मिली थी।

शिरोमणि अकाली दल (SAD) की नेता और बठिंडा से सांसद हरसिमरत कौर बादल ने 20 अगस्त को संगरूर में दिए एक बयान से पंजाब की राजनीति में हलचल मचा दी है। उनके संकेतों के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिरोमणि अकाली दल के बीच पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन की अटकलें एक बार फिर तेज हो गई हैं। हालाँकि उन्होंने किसी औपचारिक घोषणा से परहेज किया।

क्या बोलीं हरसिमरत कौर बादल

संगरूर में शिरोमणि अकाली दल के पूर्व अध्यक्ष संत हरचंद सिंह लोंगोवाल की बरसी पर आयोजित कार्यक्रम में हरसिमरत ने कहा, 'गुरु साहिब की मेहरबानी हो और अगर पहले की तरह ऐसे समझौते बनें, जिनसे दिल्ली से विकास के काम पंजाब तक पहुँचें, तो प्रदेश में बड़े विकास कार्यों की नींव रखी जाएगी।' उन्होंने स्पष्ट किया कि गठबंधन की घोषणा करना उनका काम नहीं है और 'समय आने पर सब कुछ लोगों के सामने आ जाएगा।'

उनके इस कथन को राजनीतिक विश्लेषक BJP-अकाली गठजोड़ की दिशा में एक सुलझा हुआ संकेत मान रहे हैं — सीधी घोषणा नहीं, पर दरवाज़ा खुला रखने का इशारा ज़रूर।

पृष्ठभूमि: क्यों अहम है यह बयान

गौरतलब है कि BJP और शिरोमणि अकाली दल दशकों तक पंजाब में मज़बूत गठबंधन साझेदार रहे, लेकिन 2020 में तीन कृषि कानूनों को लेकर अकाली दल ने NDA से नाता तोड़ लिया था। इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में दोनों दलों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा और दोनों को भारी हार का सामना करना पड़ा — आम आदमी पार्टी (AAP) ने प्रचंड बहुमत से सत्ता हासिल की।

यह ऐसे समय में आया है जब हाल ही में शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात हो चुकी है। उस मुलाकात के बाद से ही दोनों दलों के नज़दीकी आने की चर्चाएँ शुरू हो गई थीं।

अकाली दल के नए राजनीतिक संकेत

मुलाकात के बाद अकाली दल ने केंद्र सरकार के कई रुखों के साथ तालमेल दिखाया है। दल ने महिला आरक्षण को जल्द लागू करने की माँग का समर्थन किया। साथ ही, लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के केंद्र सरकार के प्रस्ताव के समर्थन की भी बात सामने आई है — ये दोनों कदम BJP की प्राथमिकताओं के करीब माने जाते हैं।

हरसिमरत ने बरसी कार्यक्रम में यह भी कहा कि जब भी शिरोमणि अकाली दल ने पंजाब में शांति और भाईचारे के लिए काम किया, तब 'बाहरी लोगों' ने छोटे-छोटे गुटों को पनपने दिया ताकि दल को कमज़ोर किया जा सके। उनका यह बयान अकाली दल की आंतरिक चुनौतियों और टूटे वोट बैंक की ओर भी इशारा करता है।

पंजाब की राजनीति पर असर

यदि BJP और शिरोमणि अकाली दल का गठबंधन होता है, तो यह पंजाब विधानसभा चुनाव की समीकरणों को बड़े पैमाने पर बदल सकता है। AAP सरकार के खिलाफ विपक्षी एकजुटता की माँग लंबे समय से उठ रही है। कांग्रेस पहले से ही अपने संगठन को पुनर्जीवित करने में जुटी है। ऐसे में BJP-अकाली गठजोड़ त्रिकोणीय मुकाबले को नया आयाम दे सकता है।

आगे क्या होगा

फिलहाल दोनों दलों की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि गठबंधन की बातचीत परदे के पीछे जारी है और चुनाव की तारीखें नज़दीक आने पर ही तस्वीर साफ होगी। हरसिमरत का यह बयान संकेत देता है कि दोनों दल कम से कम एक-दूसरे के साथ संवाद की स्थिति में हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन राजनीतिक संदर्भ में यह काफी स्पष्ट संकेत है — अकाली दल BJP के दरवाज़े पर दस्तक दे रहा है, बस औपचारिक घोषणा का इंतज़ार है। 2020 की विदाई के बाद से अकाली दल का जनाधार लगातार सिकुड़ा है और 2022 में AAP की आँधी ने दोनों पुराने साझेदारों को हाशिये पर धकेल दिया। असली सवाल यह है कि क्या सीट-बँटवारे की शर्तें — जो 2020 से पहले भी विवाद का कारण रही थीं — इस बार दोनों दल सुलझा पाएँगे। अगर गठबंधन नहीं बना, तो पंजाब में विपक्ष बिखरा रहेगा और AAP को सत्ता में वापसी का सीधा रास्ता मिल सकता है।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

BJP और शिरोमणि अकाली दल के बीच गठबंधन की चर्चा क्यों हो रही है?
शिरोमणि अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर बादल ने 20 अगस्त को संगरूर में दिए बयान में 'दिल्ली से विकास के काम पंजाब तक पहुँचाने' जैसे समझौतों का जिक्र किया, जिसे गठबंधन के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के बाद से भी यह अटकलें तेज थीं।
BJP और अकाली दल का पुराना गठबंधन क्यों टूटा था?
2020 में केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों के विरोध में शिरोमणि अकाली दल ने NDA से अलग होने का फैसला किया था। किसान आंदोलन के दौरान अकाली दल ने खुद को किसानों के साथ खड़ा दिखाने के लिए यह कदम उठाया था।
हरसिमरत कौर बादल ने गठबंधन पर सीधी घोषणा क्यों नहीं की?
हरसिमरत ने स्पष्ट कहा कि 'इस बारे में घोषणा करना उनका काम नहीं है।' उनका यह रुख इशारा करता है कि बातचीत अभी भी प्रारंभिक या आंतरिक स्तर पर है और अंतिम निर्णय दल के शीर्ष नेतृत्व का होगा।
अकाली दल ने हाल ही में किन मुद्दों पर BJP के साथ तालमेल दिखाया है?
अकाली दल ने महिला आरक्षण को जल्द लागू करने की माँग का समर्थन किया है और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के केंद्र सरकार के प्रस्ताव का भी समर्थन किया है। ये दोनों कदम BJP की राजनीतिक प्राथमिकताओं के नज़दीक माने जाते हैं।
इस संभावित गठबंधन का पंजाब चुनाव पर क्या असर होगा?
यदि BJP और शिरोमणि अकाली दल फिर से एकजुट होते हैं, तो यह AAP सरकार के खिलाफ एक मज़बूत विपक्षी मोर्चा बना सकता है। 2022 में दोनों दलों के अलग-अलग लड़ने से उनका वोट बिखरा था; गठजोड़ से त्रिकोणीय मुकाबले में उनकी स्थिति बेहतर हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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