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सुखबीर सिंह बादल की PM मोदी से मुलाकात, पंजाब की कानून-व्यवस्था पर हुई अहम चर्चा

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सुखबीर सिंह बादल की PM मोदी से मुलाकात, पंजाब की कानून-व्यवस्था पर हुई अहम चर्चा

सारांश

पंजाब चुनाव से पहले शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने PM मोदी से मुलाकात की और राज्य की कानून-व्यवस्था पर चर्चा की। दो दशक पुराने गठबंधन के टूटने के बाद यह मुलाकात राजनीतिक संकेतों से भरी है — हालाँकि BJP ने सभी 117 सीटों पर अकेले लड़ने का ऐलान किया है।

मुख्य बातें

सुखबीर सिंह बादल ने नई दिल्ली में PM नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर पंजाब की कानून-व्यवस्था का मुद्दा उठाया।
अकाली दल सितंबर 2020 में तीन कृषि कानूनों पर मतभेद के बाद NDA से अलग हुआ था।
2022 विधानसभा चुनाव में SAD के विधायक 15 से घटकर मात्र 3 रह गए — पार्टी का अब तक का सबसे बुरा प्रदर्शन।
पंजाब BJP अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने स्पष्ट किया कि BJP सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी।
17 जुलाई की जालंधर रैली में PM मोदी की टिप्पणियों को लेकर दोनों दलों के बीच पहले ही विवाद हो चुका है।

शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने 8 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और पंजाब में बिगड़ती कानून-व्यवस्था की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई जब राज्य में विधानसभा चुनाव नज़दीक हैं और दोनों दलों के बीच संभावित गठबंधन को लेकर अटकलें तेज़ हो रही हैं।

मुलाकात में क्या हुई बात

एक वरिष्ठ अकाली नेता के अनुसार, बादल और प्रधानमंत्री के बीच बातचीत पूरी तरह पंजाब की स्थिति पर केंद्रित रही। नेता ने कहा, 'प्रधानमंत्री ने भी हमारी सभी चिंताओं को सुना।' पार्टी सूत्रों ने स्पष्ट किया कि यह मुलाकात मुख्य रूप से राज्य में अपराध और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर केंद्रित थी।

गठबंधन की अटकलें और BJP का रुख

अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी (BJP) दो दशकों से अधिक समय तक गठबंधन सहयोगी रहे थे, लेकिन सितंबर 2020 में तीन कृषि कानूनों को लेकर मतभेद के बाद अकाली दल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) से अलग हो गया था। वे कानून बाद में रद्द कर दिए गए। अब इस मुलाकात ने फिर से गठबंधन की संभावनाओं पर बहस छेड़ दी है।

पंजाब BJP अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने इस मुलाकात पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'कोई भी वरिष्ठ नेता प्रधानमंत्री से मिल सकता है। सुखबीर सिंह बादल उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं। मुझे खुशी है कि उन्होंने पंजाब की भलाई के लिए बात की होगी।' हालाँकि, ढिल्लों ने यह भी स्पष्ट किया कि BJP पंजाब की सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी।

17 जुलाई की रैली और विवाद

गौरतलब है कि 17 जुलाई को जालंधर में एक रैली के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार की आलोचना की थी और कांग्रेस व शिरोमणि अकाली दल पर भी निशाना साधा था। एक दिन बाद बादल ने दावा किया था कि प्रधानमंत्री की टिप्पणी उनकी पार्टी के विरुद्ध नहीं, बल्कि एक अन्य अकाली गुट के खिलाफ थी — एक ऐसा दावा जो उस समय विवादास्पद रहा।

अकाली दल की मौजूदा स्थिति

शिरोमणि अकाली दल इस समय अपने इतिहास के सबसे गहरे संकट से गुज़र रहा है। 2021 में अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे करने वाली इस पार्टी को 2022 के विधानसभा चुनावों में करारी हार का सामना करना पड़ा, जब उसके विधायकों की संख्या 15 से घटकर मात्र 3 रह गई — पार्टी के इतिहास में अब तक की सबसे कम संख्या।

बड़े पैमाने पर नेताओं के पार्टी छोड़ने से संगठनात्मक और वैचारिक नेतृत्व दोनों स्तरों पर खालीपन आया है। ऐतिहासिक रूप से, अकाली दल 1996 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 13 दिन की सरकार का समर्थन करने वाले शुरुआती दलों में था — जो भारतीय इतिहास का सबसे छोटा प्रधानमंत्री कार्यकाल रहा।

आगे क्या

पंजाब चुनाव से पहले यह मुलाकात राजनीतिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है। हालाँकि BJP ने अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा की है, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में दोनों दलों के बीच बातचीत के नए दौर की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

वे कानून रद्द हो चुके हैं — फिर भी पार्टी की वापसी की राह आसान नहीं है। BJP का 'सभी 117 सीटों पर अकेले' का बयान और बादल की दिल्ली यात्रा एक साथ होना बताता है कि दोनों दल एक-दूसरे को मोलभाव की मेज़ पर दबाव में रखना चाहते हैं। असली सवाल यह है कि क्या SAD का संगठनात्मक ढाँचा इतना कमज़ोर हो चुका है कि वह किसी भी गठबंधन में सौदेबाज़ी की स्थिति में नहीं है।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुखबीर सिंह बादल ने PM मोदी से किस मुद्दे पर मुलाकात की?
बादल ने नई दिल्ली में PM मोदी से पंजाब की बिगड़ती कानून-व्यवस्था की स्थिति पर चर्चा की। एक वरिष्ठ अकाली नेता के अनुसार, प्रधानमंत्री ने पार्टी की सभी चिंताओं को ध्यान से सुना।
अकाली दल और BJP का गठबंधन क्यों टूटा था?
शिरोमणि अकाली दल ने सितंबर 2020 में तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को लेकर मतभेद के बाद BJP के नेतृत्व वाले NDA से अलग होने का फैसला किया था। वे तीनों कानून बाद में केंद्र सरकार ने रद्द कर दिए।
2022 के पंजाब चुनाव में अकाली दल का प्रदर्शन कैसा रहा?
2022 के विधानसभा चुनाव में SAD को लगातार दूसरी बार हार का सामना करना पड़ा और उसके विधायकों की संख्या 15 से घटकर मात्र 3 रह गई — जो पार्टी के इतिहास में अब तक की सबसे कम है।
क्या BJP और अकाली दल पंजाब चुनाव में साथ लड़ेंगे?
पंजाब BJP अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने स्पष्ट किया है कि BJP सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी। हालाँकि बादल की PM से मुलाकात के बाद गठबंधन की अटकलें तेज़ हो गई हैं, फिलहाल कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।
17 जुलाई की जालंधर रैली को लेकर क्या विवाद था?
17 जुलाई को जालंधर रैली में PM मोदी ने AAP सरकार के साथ-साथ कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल की भी आलोचना की थी। एक दिन बाद सुखबीर बादल ने दावा किया कि PM की टिप्पणी उनकी पार्टी के खिलाफ नहीं, बल्कि एक अन्य अकाली गुट के बारे में थी।
राष्ट्र प्रेस
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