सुखबीर सिंह बादल की PM मोदी से मुलाकात, पंजाब की कानून-व्यवस्था पर हुई अहम चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने 8 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और पंजाब में बिगड़ती कानून-व्यवस्था की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई जब राज्य में विधानसभा चुनाव नज़दीक हैं और दोनों दलों के बीच संभावित गठबंधन को लेकर अटकलें तेज़ हो रही हैं।
मुलाकात में क्या हुई बात
एक वरिष्ठ अकाली नेता के अनुसार, बादल और प्रधानमंत्री के बीच बातचीत पूरी तरह पंजाब की स्थिति पर केंद्रित रही। नेता ने कहा, 'प्रधानमंत्री ने भी हमारी सभी चिंताओं को सुना।' पार्टी सूत्रों ने स्पष्ट किया कि यह मुलाकात मुख्य रूप से राज्य में अपराध और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर केंद्रित थी।
गठबंधन की अटकलें और BJP का रुख
अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी (BJP) दो दशकों से अधिक समय तक गठबंधन सहयोगी रहे थे, लेकिन सितंबर 2020 में तीन कृषि कानूनों को लेकर मतभेद के बाद अकाली दल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) से अलग हो गया था। वे कानून बाद में रद्द कर दिए गए। अब इस मुलाकात ने फिर से गठबंधन की संभावनाओं पर बहस छेड़ दी है।
पंजाब BJP अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने इस मुलाकात पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'कोई भी वरिष्ठ नेता प्रधानमंत्री से मिल सकता है। सुखबीर सिंह बादल उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं। मुझे खुशी है कि उन्होंने पंजाब की भलाई के लिए बात की होगी।' हालाँकि, ढिल्लों ने यह भी स्पष्ट किया कि BJP पंजाब की सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी।
17 जुलाई की रैली और विवाद
गौरतलब है कि 17 जुलाई को जालंधर में एक रैली के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार की आलोचना की थी और कांग्रेस व शिरोमणि अकाली दल पर भी निशाना साधा था। एक दिन बाद बादल ने दावा किया था कि प्रधानमंत्री की टिप्पणी उनकी पार्टी के विरुद्ध नहीं, बल्कि एक अन्य अकाली गुट के खिलाफ थी — एक ऐसा दावा जो उस समय विवादास्पद रहा।
अकाली दल की मौजूदा स्थिति
शिरोमणि अकाली दल इस समय अपने इतिहास के सबसे गहरे संकट से गुज़र रहा है। 2021 में अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे करने वाली इस पार्टी को 2022 के विधानसभा चुनावों में करारी हार का सामना करना पड़ा, जब उसके विधायकों की संख्या 15 से घटकर मात्र 3 रह गई — पार्टी के इतिहास में अब तक की सबसे कम संख्या।
बड़े पैमाने पर नेताओं के पार्टी छोड़ने से संगठनात्मक और वैचारिक नेतृत्व दोनों स्तरों पर खालीपन आया है। ऐतिहासिक रूप से, अकाली दल 1996 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 13 दिन की सरकार का समर्थन करने वाले शुरुआती दलों में था — जो भारतीय इतिहास का सबसे छोटा प्रधानमंत्री कार्यकाल रहा।
आगे क्या
पंजाब चुनाव से पहले यह मुलाकात राजनीतिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है। हालाँकि BJP ने अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा की है, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में दोनों दलों के बीच बातचीत के नए दौर की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।