9 अगस्त 2026
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अकाली दल-भाजपा गठबंधन पर वड़िंग का सवाल: सुखबीर बादल परिसीमन पर यू-टर्न क्यों?

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अकाली दल-भाजपा गठबंधन पर वड़िंग का सवाल: सुखबीर बादल परिसीमन पर यू-टर्न क्यों?

सारांश

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष वड़िंग ने सुखबीर बादल पर सीधा हमला बोला — तीन महीने में परिसीमन पर पलटी क्यों? उनका आरोप है कि बादल 2027 चुनाव से पहले BJP को लुभाने के लिए पंजाब के हितों को दाँव पर लगा रहे हैं, और यह अवसरवाद एक बार फिर बेनकाब हो गया है।

मुख्य बातें

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने 9 अगस्त को शिरोमणि अकाली दल प्रमुख सुखबीर सिंह बादल पर BJP गठबंधन के लिए परिसीमन मुद्दे पर यू-टर्न लेने का आरोप लगाया।
अकाली दल ने महज तीन महीने पहले परिसीमन विधेयक को पंजाब के हितों के विरुद्ध बताया था।
वड़िंग के अनुसार, 2024 के लोकसभा चुनावों में गठबंधन विफल होने पर बादल ने 'पंजाब हित' का हवाला दिया था, अब वही तर्क छोड़ दिया।
कांग्रेस का दावा है कि अकाली-BJP गठबंधन से 2027 विधानसभा चुनावों में दोनों पार्टियों के भाग्य पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा।
वड़िंग ने कहा कि पंजाब की जनता किसानों पर अत्याचार और अकाली दल के कार्यकाल के कथित अपराधों को नहीं भूली।

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने रविवार, 9 अगस्त को शिरोमणि अकाली दल (SAD) के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल पर सीधा हमला बोला और पूछा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ चुनावी गठबंधन के लिए वे इस कदर बेताब क्यों हैं कि उन्हें विधानसभा और संसदीय क्षेत्रों के परिसीमन जैसे संवेदनशील मुद्दे पर यू-टर्न लेना पड़ा। वड़िंग का यह बयान चंडीगढ़ में आया, जहाँ पंजाब की राजनीतिक सरगर्मी 2027 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए तेज़ हो रही है।

परिसीमन पर पलटी मारने का आरोप

वड़िंग ने बादल को याद दिलाया कि महज तीन महीने पहले शिरोमणि अकाली दल ने परिसीमन विधेयक का खुलकर विरोध किया था और इसे पंजाब के हितों के विरुद्ध करार दिया था। उन्होंने तीखे अंदाज़ में पूछा कि इन तीन महीनों में ऐसा क्या बदल गया कि जिस विधेयक को पार्टी ने पंजाब-विरोधी बताया था, उसी में अब अच्छाई दिखने लगी।

कांग्रेस नेता का कहना है कि यह रुख-बदलाव किसी नीतिगत पुनर्विचार का नतीजा नहीं, बल्कि राजनीतिक अस्तित्व की बेचैनी का प्रतिफल है।

2024 के संसदीय चुनाव और बादल का पुराना दावा

वड़िंग ने याद दिलाया कि 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले जब अकाली दल और BJP के बीच गठबंधन की बातचीत विफल रही थी, तब बादल ने सार्वजनिक रूप से दावा किया था कि वे पंजाब के हितों से समझौता नहीं कर सकते। अब उसी नेतृत्व का रुख बदलना, वड़िंग के अनुसार, राजनीतिक अवसरवाद का स्पष्ट उदाहरण है।

उन्होंने कहा कि जब अस्तित्व दाँव पर हो, तो पहले जो 'सिद्धांत' थे वे पीछे छूट जाते हैं — और बादल का यह अवसरवाद एक बार फिर बेनकाब हो गया है।

अकाली-भाजपा गठबंधन की संभावना पर कांग्रेस का आकलन

राज्य कांग्रेस अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि यदि अकाली दल और BJP 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए एकजुट भी होते हैं, तो इससे उनके चुनावी भाग्य में कोई बड़ा बदलाव नहीं आएगा। उनका तर्क है कि पंजाब की जनता न तो अकाली दल के कार्यकाल के दौरान हुए कथित अपराधों को भूली है, और न ही किसान आंदोलन के दौरान किसानों पर हुए अत्याचारों को — जिसके लिए वे BJP को ज़िम्मेदार मानते हैं।

वड़िंग के अनुसार, इन दोनों पार्टियों का एक साथ आना उनकी ताकत नहीं, बल्कि उनके अवसरवाद का प्रदर्शन होगा।

आगे क्या

पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव करीब आते ही गठबंधन की राजनीति तेज़ होती जा रही है। अकाली दल और BJP के बीच संभावित तालमेल पर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कांग्रेस इस मुद्दे को जनता के बीच उठाकर विपक्षी एकता की कमज़ोरियाँ उजागर करने की कोशिश में है। आने वाले हफ्तों में यह राजनीतिक बहस और तीखी होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह 2027 से पहले कांग्रेस की उस रणनीति का हिस्सा है जो अकाली दल को 'सिद्धांतहीन' और BJP को 'किसान-विरोधी' के रूप में एक साथ घेरना चाहती है। विडंबना यह है कि परिसीमन पर रुख बदलने का आरोप लगाने वाली कांग्रेस खुद राष्ट्रीय स्तर पर परिसीमन के मुद्दे पर एकजुट नहीं रही है। असली सवाल यह है कि क्या पंजाब की जनता 2027 में किसी एक पार्टी को स्पष्ट जनादेश देगी, या त्रिकोणीय मुकाबला एक बार फिर AAP को फायदा पहुँचाएगा — जो इस पूरी बहस में अभी चुप है।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजा वड़िंग ने सुखबीर बादल पर क्या आरोप लगाए?
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष वड़िंग ने आरोप लगाया कि सुखबीर बादल BJP के साथ गठबंधन के लिए परिसीमन विधेयक पर यू-टर्न ले रहे हैं, जिसे अकाली दल ने तीन महीने पहले पंजाब-विरोधी बताया था। वड़िंग के अनुसार, यह राजनीतिक अवसरवाद है जो 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले अस्तित्व बचाने की बेचैनी से उपजा है।
अकाली दल का परिसीमन विधेयक पर पहले क्या रुख था?
शिरोमणि अकाली दल ने तीन महीने पहले विधानसभा और संसदीय क्षेत्रों के परिसीमन विधेयक का विरोध किया था और इसे पंजाब के हितों के विरुद्ध करार दिया था। अब कथित तौर पर पार्टी का रुख बदला है, जिसे कांग्रेस BJP गठबंधन की चाहत से जोड़ रही है।
क्या अकाली दल और BJP का गठबंधन 2027 में होगा?
अभी तक अकाली दल और BJP के बीच किसी गठबंधन की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। 2024 के लोकसभा चुनावों में दोनों पार्टियाँ अलग-अलग लड़ी थीं; अब 2027 विधानसभा चुनावों से पहले संभावित तालमेल की चर्चा है।
वड़िंग के अनुसार अकाली-BJP गठबंधन से पंजाब में क्या असर पड़ेगा?
वड़िंग का कहना है कि यदि दोनों पार्टियाँ एकजुट भी होती हैं, तो पंजाब की जनता अकाली दल के कार्यकाल के कथित अपराधों और किसानों पर अत्याचारों को नहीं भूली है। उनके अनुसार, इस गठबंधन से दोनों पार्टियों के चुनावी भाग्य में कोई उल्लेखनीय बदलाव नहीं आएगा।
2024 के लोकसभा चुनावों में अकाली दल और BJP का क्या हुआ था?
2024 के संसदीय चुनावों से पहले अकाली दल और BJP के बीच गठबंधन वार्ता विफल हो गई थी। उस समय सुखबीर बादल ने कहा था कि वे पंजाब के हितों से समझौता नहीं करना चाहते — यही बयान अब कांग्रेस उनके खिलाफ इस्तेमाल कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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