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एशियन गेम्स 2026: सुचिका तरियाल को विवादित फैसले के बाद ब्रॉन्ज, सेमीफाइनल में भ्रष्टाचार का आरोप

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एशियन गेम्स 2026: सुचिका तरियाल को विवादित फैसले के बाद ब्रॉन्ज, सेमीफाइनल में भ्रष्टाचार का आरोप

सारांश

एशियन गेम्स 2026 में सुचिका तरियाल ने MMA सेमीफाइनल में दबदबा बनाने के बावजूद विवादित आर्बिट्रेशन और AMMA के वेट टाई नियम की वजह से सिल्वर गँवाया और ब्रॉन्ज पर रहीं। उन्होंने भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है — यह 2022 के चौथे स्थान के बाद फिर एक बार न्याय से वंचित रहने की कहानी है।

मुख्य बातें

सुचिका तरियाल ने एशियन गेम्स 2026 में महिलाओं की ट्रेडिशनल 60 किग्रा कैटेगरी में ब्रॉन्ज मेडल जीता।
सेमीफाइनल में सिंगापुर की हुई हून टून के खिलाफ मुकाबला आर्बिट्रेशन के बाद ड्रॉ घोषित हुआ।
AMMA के वेट टाई नियम के तहत कम वजन वाली सिंगापुरी फाइटर को विजेता घोषित किया गया।
सुचिका ने आर्बिट्रेशन के फैसले पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है।
2022 एशियन गेम्स में भी वह चौथे स्थान पर रही थीं; इस बार पहला पदक हासिल किया।
सुचिका उत्तराखंड की मूल निवासी हैं, परवरिश दिल्ली में और विवाह हरियाणा में हुआ।

भारतीय मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) फाइटर सुचिका तरियाल ने एशियन गेम्स 2026 में महिलाओं की ट्रेडिशनल 60 किग्रा कैटेगरी में ब्रॉन्ज मेडल जीता, लेकिन यह जीत विवादों की छाया में रही। सोमवार, 21 सितंबर को खेले गए सेमीफाइनल में सिंगापुर की हुई हून टून के खिलाफ मुकाबले में सुचिका ने दबदबा बनाने के बावजूद हार का फैसला आने पर आर्बिट्रेशन के लिए विरोध जताया, जिसके बाद जजों ने मुकाबले को ड्रॉ घोषित कर दिया। एशियन मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स एसोसिएशन (AMMA) के नियमों के तहत ड्रॉ की स्थिति में कम वजन वाली फाइटर को विजेता माना जाता है, जिससे सुचिका का सिल्वर मेडल का सपना टूट गया।

मुकाबले का विवाद और आर्बिट्रेशन

सुचिका के अनुसार, उन्होंने सेमीफाइनल में प्रतिद्वंद्वी पर स्पष्ट बढ़त बनाई थी, परंतु शुरुआती फैसला उनके खिलाफ आया। विरोध दर्ज कराने के बाद हुई आर्बिट्रेशन प्रक्रिया में जजों ने मुकाबले की समीक्षा कर उसे ड्रॉ घोषित किया। AMMA के वेट टाई नियम के तहत कम वजन वाली सिंगापुरी फाइटर को विजेता करार दिया गया, और सुचिका ब्रॉन्ज पर सिमट गईं। इस फैसले से नाराज सुचिका ने कथित तौर पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है।

परिवार की प्रतिक्रिया

हरियाणा के रोहतक में सुचिका के परिजनों ने बहू की उपलब्धि पर गर्व जताया, लेकिन निर्णय पर असंतोष भी व्यक्त किया। सुचिका की सास ने कहा, "सुचिका ने शुरू से ही लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है। 2022 में वह चौथे स्थान पर रहीं और तब भी लगा कि बेहतर नतीजे की हकदार थीं। अब तीसरे स्थान पर हैं, हालांकि उन्हें दूसरा स्थान मिलना चाहिए था। देश के लिए मेडल जीतने का उनका जज्बा हमेशा से मजबूत रहा है।"

सुचिका के दादा ससुर ने कहा, "हमें उनकी जीत का पूरा भरोसा था। शादी से पहले भी वह कड़ी मेहनत कर रही थीं। हमने उन्हें घर की कोई भी जिम्मेदारी नहीं सौंपी और अपना खेल खेलने दिया।" उनके अनुसार सुचिका हर हफ्ते डेढ़ हफ्ते में घर आती हैं।

सुचिका तरियाल की पृष्ठभूमि

सुचिका मूलत: उत्तराखंड से हैं, उनकी परवरिश दिल्ली में हुई और विवाह हरियाणा में। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय दोनों परिवारों — मायके और ससुराल — को दिया है। गौरतलब है कि 2022 एशियन गेम्स में भी वह चौथे स्थान पर रही थीं और इस बार ब्रॉन्ज के साथ उन्होंने पदक की दहलीज पार की, भले ही फैसले से वह संतुष्ट नहीं हैं।

नियम और विवाद की जड़

AMMA का वेट टाई नियम — जिसमें ड्रॉ की स्थिति में कम वजन वाले फाइटर को विजेता घोषित किया जाता है — इस विवाद की केंद्रीय वजह बना। आलोचकों का कहना है कि यह नियम खेल के प्रदर्शन आधारित मूल्यांकन के विरुद्ध है। सुचिका ने आर्बिट्रेशन के नतीजे पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए आधिकारिक विरोध दर्ज कराया है, जिसकी समीक्षा संबंधित अधिकारियों द्वारा किए जाने की संभावना है।

आगे की राह

सुचिका का यह ब्रॉन्ज मेडल भारतीय MMA के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, परंतु उनका आरोप और विरोध यह सुनिश्चित करता है कि यह मामला यहीं नहीं रुकेगा। भारतीय खेल अधिकारियों द्वारा AMMA को औपचारिक शिकायत भेजे जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। सुचिका का संघर्ष भारतीय महिला MMA के उभार की कहानी का हिस्सा बन चुका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तकनीकी पैमाने को तरजीह देते हैं। AMMA का वेट टाई नियम, जो खेल के भीतर हुए प्रदर्शन की बजाय शारीरिक बनावट को निर्णायक मानता है, मूल रूप से विवादास्पद है। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय महिला MMA अपनी वैश्विक पहचान बनाने की कोशिश में है — ऐसे फैसले इस यात्रा को और कठिन बना देते हैं। भारतीय खेल अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे इस शिकायत को संस्थागत स्तर पर उठाएँ, न कि इसे महज एक खिलाड़ी की निजी नाराजगी बनने दें।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुचिका तरियाल को एशियन गेम्स 2026 में ब्रॉन्ज क्यों मिला, सिल्वर क्यों नहीं?
सुचिका ने सेमीफाइनल में सिंगापुर की हुई हून टून के खिलाफ मुकाबले में बढ़त बनाई, लेकिन शुरुआती फैसला उनके खिलाफ आया। आर्बिट्रेशन के बाद मुकाबले को ड्रॉ घोषित किया गया और AMMA के नियम के तहत कम वजन वाली सिंगापुरी फाइटर को विजेता माना गया, जिससे सुचिका ब्रॉन्ज पर रहीं।
AMMA का वेट टाई नियम क्या है?
एशियन मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स एसोसिएशन (AMMA) के नियमों के अनुसार, यदि किसी मुकाबले का फैसला ड्रॉ रहे, तो कम वजन वाले फाइटर को विजेता घोषित किया जाता है। इस नियम को लेकर खेल विशेषज्ञों में पहले से विवाद है, क्योंकि यह प्रदर्शन की बजाय शारीरिक पैमाने को निर्णायक बनाता है।
सुचिका तरियाल ने भ्रष्टाचार का आरोप क्यों लगाया?
सुचिका का मानना है कि आर्बिट्रेशन के दौरान हुई समीक्षा निष्पक्ष नहीं थी और उन्हें जानबूझकर नुकसान पहुँचाया गया। फैसले से नाखुश होकर उन्होंने कथित तौर पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है, हालांकि इसकी आधिकारिक जाँच की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
सुचिका तरियाल का एशियन गेम्स में पिछला प्रदर्शन कैसा रहा है?
2022 एशियन गेम्स में सुचिका तरियाल चौथे स्थान पर रही थीं और तब भी उन्हें लगा था कि वह बेहतर नतीजे की हकदार थीं। 2026 में ब्रॉन्ज उनका पहला एशियन गेम्स पदक है, भले ही वह इस नतीजे से संतुष्ट नहीं हैं।
सुचिका तरियाल कहाँ की हैं और उनके परिवार की क्या प्रतिक्रिया है?
सुचिका मूलत: उत्तराखंड की हैं, उनकी परवरिश दिल्ली में हुई और विवाह हरियाणा में। उनके परिवार ने पदक पर गर्व जताया है, लेकिन सास और दादा ससुर दोनों ने माना कि सुचिका बेहतर नतीजे की हकदार थीं। परिवार ने हमेशा उनके खेल को प्राथमिकता दी और घरेलू जिम्मेदारियों से मुक्त रखा।
राष्ट्र प्रेस
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