एशियन गेम्स 2026: सुजीत कलकल ने 2-9 से पिछड़कर जीता गोल्ड, फ्रीस्टाइल 65 किग्रा में भारत का पहला स्वर्ण
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय पहलवान सुजीत कलकल ने 2 अक्टूबर 2026 को नागोया सिटी इनाए स्पोर्ट्स सेंटर में हुए रोमांचक फाइनल मुकाबले में ताजिकिस्तान के अब्दुलमजीद कुदियेव को 10-9 से शिकस्त देकर एशियन गेम्स 2026 में रेसलिंग का पहला गोल्ड मेडल भारत की झोली में डाला। पुरुषों की फ्रीस्टाइल 65 किलोग्राम स्पर्धा में यह जीत उतनी ही असाधारण थी, जितना उसे हासिल करने का तरीका — कलकल फाइनल के अधिकांश समय 2-9 के बड़े अंतर से पिछड़ रहे थे।
फाइनल का नाटकीय घटनाक्रम
23 वर्षीय कलकल का फाइनल मुकाबला करियर की सबसे कड़ी परीक्षा साबित हुआ। कुदियेव ने मैच पर मजबूत पकड़ बनाते हुए 9-2 की भारी बढ़त हासिल कर ली थी और गोल्ड मेडल उनकी मुट्ठी में दिखने लगा था। लेकिन कलकल ने हार मानने से इनकार किया।
मैच के अंतिम मिनटों में कलकल ने लगातार आठ अंक अर्जित किए और स्कोर 10-9 कर दिया। यह वापसी न केवल इस टूर्नामेंट की, बल्कि हाल के एशियाई खेलों के इतिहास की सबसे यादगार कमबैक में गिनी जाएगी।
फाइनल तक का सफर
कलकल का एशियन गेम्स अभियान शुरुआत से ही चुनौतियों से भरा रहा। अफगानिस्तान के सैयद उमर ज़जई के खिलाफ पहले दौर में वे 0-3 से पीछे थे, लेकिन 'पुश-आउट' और 'शोल्डर थ्रो' से अंक बटोरते हुए 5-3 की बढ़त बनाई और आगे 'थ्रो' व 'रोल' से चार और अंक जोड़कर 13-3 की 'तकनीकी श्रेष्ठता' से जीत दर्ज की।
क्वार्टर फाइनल में ईरान के अब्बास इब्राहिमजादेहसावदकोही के खिलाफ कलकल ने बिना एक भी अंक गंवाए 'तकनीकी श्रेष्ठता' के आधार पर जीत हासिल की — यह उनकी तकनीकी परिपक्वता का प्रमाण था।
ओलंपिक चैंपियन को दी शिकस्त
सेमीफाइनल में कलकल के सामने सबसे कठिन चुनौती थी — जापान के ओलंपिक चैंपियन कोटारो कियोका। पहले पीरियड के अंत में कलकल 0-2 से पीछे थे। दूसरे पीरियड में उन्होंने तीन अंक अर्जित किए, जबकि कियोका केवल एक ही जोड़ पाए। मैच 3-3 की बराबरी पर समाप्त हुआ, और नियमों के तहत कलकल को विजेता घोषित किया गया।
गौरतलब है कि एक ओलंपिक चैंपियन को हराकर फाइनल में पहुँचना अपने आप में बड़ी उपलब्धि थी, लेकिन कलकल ने उससे भी बड़ा करिश्मा फाइनल में कर दिखाया।
भारतीय रेसलिंग के लिए अहमियत
यह जीत आइची-नागोया एशियन गेम्स 2026 में भारत के लिए रेसलिंग का पहला स्वर्ण पदक है। कलकल ने फाइनल तक के सफर में अफगानिस्तान, ईरान और जापान के शीर्ष पहलवानों को मात दी — जो इस भार वर्ग में भारतीय कुश्ती की बढ़ती ताकत को रेखांकित करता है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय रेसलिंग संघ देश में कुश्ती के पुनर्निर्माण की कोशिश में जुटा है। कलकल की यह स्वर्णिम वापसी आने वाली पीढ़ी के पहलवानों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी।