सुजीत कलकल बोले — 'देश के लिए गोल्ड जीतना ही मेरी दिवाली', वर्ल्ड चैंपियनशिप पर नज़र
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय पहलवान सुजीत कलकल ने 7 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) द्वारा आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ किया कि देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना ही उनके लिए असली दिवाली है। एशियन गेम्स 2026 में 65 किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग में स्वर्ण पदक जीत चुके 23 वर्षीय इस रेसलर की नज़र अब 24 अक्टूबर से 1 नवंबर तक कजाकिस्तान के अस्ताना में होने वाली UWW रेसलिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप पर टिकी है।
एशियन गेम्स में ऐतिहासिक वापसी
हरियाणा के चरखी दादरी जिले के इमलोटा गाँव के रहने वाले सुजीत ने एशियन गेम्स के 65 किग्रा फाइनल में पहले जापान के ओलंपिक चैंपियन कोटारो कियोका को हराया। इसके बाद गोल्ड मेडल मुकाबले में ताजिकिस्तान के अब्दुलमजीद कुदिएव के खिलाफ पहले पीरियड के अंत में 2-9 से पिछड़ते हुए उन्होंने शानदार पलटवार किया।
जब मुकाबले में सिर्फ 1 मिनट 40 सेकंड बचे थे, तब सुजीत ने एक के बाद एक हमले किए — पहले स्कोर 9-8 किया और फिर दो प्वाइंट का 'टेकडाउन' कर 10-9 से जीत दर्ज की। इस जीत ने उन्हें एशियाई महाद्वीपीय स्तर पर भारत का नया हीरो बना दिया।
सुजीत के अपने शब्दों में
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुजीत ने अपनी भावनाएँ बेबाकी से साझा कीं। उन्होंने कहा, 'एशियन गेम्स में देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना ही मेरे लिए दिवाली है। मैं अभी तक होली या दिवाली पर घर भी नहीं जा पाया हूं, क्योंकि हमेशा कोई न कोई प्रतियोगिता होती रहती है। मेरे पिता कहते हैं कि अगर तुम घर गोल्ड लेकर आते हो, तो वही दिवाली और होली है।'
फाइनल में पिछड़ने के बारे में उन्होंने स्वीकार किया, 'शुरुआत में मैं मुकाबले पर काबू नहीं रख पाया क्योंकि उस समय मैं ठीक से वार्मअप नहीं कर पाया था। दूसरे पीरियड में मैंने अच्छी पकड़ बनाई और मेरे हर हमले कामयाब रहे। मैच खत्म होने तक मैंने सारे प्वाइंट्स हासिल कर लिए थे।'
वर्ल्ड चैंपियनशिप की तैयारी
सुजीत ने स्पष्ट किया कि UWW वर्ल्ड चैंपियनशिप ओलंपिक से भी कठिन प्रतियोगिता है। उन्होंने बताया कि वे किसी विशेष रणनीतिक ढाँचे की बजाय पिछली प्रतियोगिताओं में हुई गलतियों पर काम करने को प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने कहा, 'हम बस पिछली प्रतियोगिताओं में हुई गलतियों पर काम करते हैं ताकि आने वाली प्रतियोगिताओं में वे गलतियाँ न दोहराई जाएं।'
SAI सोनीपत में नियमित अभ्यास करने वाले सुजीत ने एशियन गेम्स और वर्ल्ड चैंपियनशिप की तैयारी के लिए रूस और आर्मेनिया में भी ट्रेनिंग की। रूस में उन्हें वर्ल्ड चैंपियनशिप, एशियन गेम्स और ओलंपिक के पदक विजेताओं के साथ अभ्यास का मौका मिला।
ट्रेनिंग में TOPS और SAI की भूमिका
विदेशी ट्रेनिंग के अनुभव पर सुजीत ने TOPS, SAI और WFI (भारतीय कुश्ती महासंघ) का आभार जताया। उन्होंने कहा, 'उन्हीं की वजह से हमें विदेश में ट्रेनिंग का मौका मिलता है। हमारे जीते गए मेडल्स में ट्रेनिंग सबसे अहम भूमिका निभाती है।' गौरतलब है कि भारतीय कुश्ती अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही है, और सुजीत जैसे युवा पहलवान इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। आगामी वर्ल्ड चैंपियनशिप में उनका प्रदर्शन भारतीय कुश्ती के लिए एक और मील का पत्थर साबित हो सकता है।