सुजीत कलकल का एशियन गेम्स 2026 गोल्ड: जापान से लौटकर मां के हाथ का चूरमा-खीर खाकर मनाया जश्न
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय पहलवान सुजीत कलकल ने एशियन गेम्स 2026 में 65 किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। जापान से स्वदेश लौटने के बाद सुजीत ने बताया कि उनके लिए सबसे बड़ी खुशी मां के हाथ का बना चूरमा और खीर खाना रही — यही उनके संघर्ष और सफलता का सबसे मीठा इनाम था।
मां के हाथ का स्वाद — सबसे बड़ा पुरस्कार
स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुजीत ने कहा, 'मैं ट्रेनिंग और कॉम्पिटिशन की वजह से घर से दूर रहता हूं, ऐसे में मां के हाथ का चूरमा बहुत याद आता है। एशियन गेम्स के बाद जैसे ही मैं लौटा, मेरी मां ने चूरमा और खीर भेजी।' उन्होंने आगे जोड़ा, 'मैं घर से दूर सोनीपत में ट्रेनिंग करता हूं, इसलिए मेरी मां मेरे लिए ये चीज़ें भेजती रहती हैं। जापान से लौटने के बाद, मैंने सबसे ज्यादा चूरमा और खीर खाई है।'
2026 सीज़न में अजेय रहे सुजीत
सुजीत कलकल का 2026 सीज़न अब तक बेमिसाल रहा है। उन्होंने 2025 अंडर-23 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप और 2026 एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप — दोनों 65 किग्रा वर्ग में — जीती हैं। इसके अलावा, उन्होंने फरवरी 2026 में अल्बानिया में आयोजित UWW रैंकिंग सीरीज़ में भी स्वर्ण पदक हासिल किया। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय कुश्ती में नेतृत्व संकट और विवादों के बावजूद युवा पहलवान मैदान में शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं।
संघर्ष की कहानी — कोर्ट से मैदान तक
सुजीत की यह सफलता बिना मुश्किलों के नहीं मिली। 2023 में उन्हें एशियन गेम्स 2023 के लिए चयन ट्रायल में उचित अवसर पाने हेतु हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाना पड़ा था। तत्कालीन एड-हॉक कमेटी ने पहलवान बजरंग को सीधे टीम में स्थान दे दिया था, जिसे सुजीत ने कानूनी चुनौती दी।
इसके बाद अप्रैल 2024 में भी उनके रास्ते में एक और रुकावट आई। जब सुजीत और साथी पहलवान दीपक पुनिया एशियन ओलंपिक क्वालीफायर के लिए बिश्केक जा रहे थे, तो यूएई में रिकॉर्ड बारिश और बाढ़ के कारण फ्लाइट ऑपरेशन ठप हो गए और दोनों दुबई में फंस गए। आखिरकार वे बिश्केक तो पहुंचे, लेकिन सुबह का वेट-इन शुरू होने के बाद — और आयोजकों ने उन्हें मुकाबला करने की अनुमति नहीं दी।
युवा पहलवानों को सुजीत का संदेश
उन्हें 2023 के कठिन दौर के बारे में पूछे जाने पर सुजीत ने कहा, 'खुद पर भरोसा रखो और मेहनत करते रहो। भगवान इंसाफ में देर कर सकते हैं, लेकिन उसे कभी मना नहीं किया जा सकता।' उन्होंने आगे जोड़ा, 'अगर हम बीते कल में फंसे रहेंगे, तो हमारा वर्तमान खराब होगा, और हम भविष्य में भी अच्छा नहीं कर पाएंगे। जो बीत गया, उसे जाने दो।' यह संदेश उन तमाम युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है जो व्यवस्थागत अवरोधों से जूझ रहे हैं।
आगे की राह
एशियन गेम्स 2026 के स्वर्ण पदक के साथ सुजीत कलकल अब भारतीय कुश्ती के सबसे चमकते सितारों में शामिल हो गए हैं। आगामी अंतरराष्ट्रीय सीज़न में उनसे विश्व चैंपियनशिप में भी पदक की उम्मीद रहेगी।