काजल ढोचक का वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में सिल्वर, 2028 ओलंपिक क्वालिफिकेशन पर 100% आत्मविश्वास
सारांश
मुख्य बातें
कजाकिस्तान में संपन्न हुई वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में 76 किग्रा भार वर्ग में ऐतिहासिक सिल्वर मेडल जीतने वाली भारत की उभरती पहलवान काजल ढोचक ने 1 नवंबर 2026 को मीडिया से बातचीत में कहा कि इस प्रदर्शन ने उनका हौसला बुलंद किया है और उन्हें लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने का पूरा भरोसा है। सीनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में अपना डेब्यू कर रहीं 18 वर्षीय काजल के इस पदक ने भारतीय कुश्ती को एक नया नाम दिया है।
फाइनल मुकाबले का रोमांचक घटनाक्रम
फाइनल में काजल का सामना यूक्रेन की अनास्तासिया अल्पियेवा से हुआ, जो दो बार की यूरोपीय चैंपियन रह चुकी हैं। मुकाबला बेहद रोमांचक रहा — दूसरे राउंड में स्कोर 2 2 से बराबर था। अल्पियेवा ने 'डबल लेग टेकडाउन' किया, लेकिन काजल ने तुरंत जवाब देते हुए उन्हें गिराया। इसके बाद अल्पियेवा ने एक और टेकडाउन के साथ 2 अंक और जोड़ लिए।
मात्र 0:06 सेकंड शेष रहते काजल ने एक महत्वपूर्ण टेकडाउन से चार अंकों की बढ़त बनाई, किंतु जीत दिलाने वाला अंतिम दांव लगाने का समय नहीं मिला और वह 6 8 से हार गईं।
काजल ने बताया — 'रक्षात्मक खेल बना हार की वजह'
काजल ने फाइनल की समीक्षा करते हुए कहा, "स्कोर 4 4 था और मैं लगभग जीत ही रही थी। अगर मैं आखिरी पलों में रक्षात्मक होने के बजाय अटैकिंग खेलती, तो गोल्ड मेरा होता।" उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने मुकाबले के दौरान दो बार बढ़त हासिल की थी, लेकिन बाद में अंक गंवा दिए।
कोच की सलाह का हवाला देते हुए काजल ने कहा, "कोच ने कहा है कि हमें डिफेंस पर थोड़ा काम करना होगा। शुरुआत में हम जिस तरह अटैकिंग खेल दिखाते हैं, उसे अंत तक बनाए रखना जरूरी है — ये कुछ ऐसी कमियाँ हैं जिन पर काम करने की ज़रूरत है।"
ओलंपिक क्वालिफिकेशन पर पूरा भरोसा
काजल ने अपने 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक क्वालिफिकेशन को लेकर दृढ़ विश्वास जताया। उन्होंने कहा, "मेरा भार वर्ग ओलंपिक में शामिल है और अगले साल क्वालिफिकेशन इवेंट भी होने वाले हैं। वर्ल्ड चैंपियनशिप में जिन पहलवानों से मैंने मुकाबला किया, उन्हें मैं पहले भी हरा चुकी हूँ। फाइनल में जिसका सामना हुआ, उसे भी मैंने पहले हराया है — वह मेरे मुकाबले उतनी मजबूत नहीं थी। मुझे खुद पर 100 प्रतिशत भरोसा है।"
एशियन गेम्स की निराशा से वर्ल्ड मेडल तक का सफर
गौरतलब है कि जापान के आइची नागोया में आयोजित एशियन गेम्स के ट्रायल में अंतिम क्षणों में नाटकीय ढंग से बाहर होने के बाद यह सिल्वर मेडल काजल के लिए शानदार वापसी है। काजल ने उस पीड़ादायक पल को याद करते हुए कहा, "ट्रायल के फाइनल में जब कुछ ही सेकंड बचे थे, मुझे लगा मेरा चयन हो गया है — मैंने सोचा कि अब जाकर अपने अंकल को गले लगाऊंगी। मगर आखिरी पलों में मैच पलट गया। मुझे समझने में वक्त लगा कि मैंने क्या खो दिया है। लेकिन उसके बाद मैंने विश्व चैंपियनशिप के लिए ट्रेनिंग शुरू कर दी और यहाँ मेडल जीत लिया।"
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय कुश्ती ऑलिंपिक चक्र के लिहाज़ से खुद को नए सिरे से तैयार कर रहा है। JSW की एथलीट काजल, 72 किग्रा और 76 किग्रा — दोनों भार वर्गों में दो बार की अंडर 20 वर्ल्ड चैंपियन रह चुकी हैं।
आगे का रोडमैप
काजल ने स्पष्ट किया कि वह रुकने के मूड में नहीं हैं। उन्होंने कहा, "जब सब कुछ कुश्ती के लिए ही हो रहा है, तो ब्रेक लेने का क्या मतलब है?" आने वाले महीनों में वह कॉमनवेल्थ रेसलिंग चैंपियनशिप के ट्रायल, सीनियर नेशनल चैंपियनशिप, प्रो रेसलिंग लीग (PWL) और सीनियर एशियन रैंकिंग इवेंट्स में हिस्सा लेने की तैयारी में हैं। भारतीय कुश्ती के लिए काजल ढोचक का यह सफर अभी शुरू हुआ है।