PM मोदी 2 नवंबर को भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन 2026 का उद्घाटन करेंगे, 130+ देश होंगे शामिल
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2 नवंबर 2026 को भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन एवं एक्सपो 2026 का उद्घाटन करेंगे, जिसमें 130 से अधिक देशों के प्रतिनिधि और 40 से अधिक मंत्री भाग लेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा 1 नवंबर को जारी एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई। यह सम्मेलन स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में भारत की वैश्विक नेतृत्व की महत्वाकांक्षा को रेखांकित करता है।
शिखर सम्मेलन का स्वरूप और विषय
चार दिवसीय यह आयोजन 2 से 5 नवंबर 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में होगा। सम्मेलन का केंद्रीय विषय है — 'निवेश करें, नवाचार करें, प्रेरणा दें'। देश भागीदारों में ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क, यूरोपीय संघ, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, नॉर्वे, स्वीडन और यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं।
सम्मेलन में पूर्ण सत्र, मंत्रिस्तरीय चर्चाएँ, सीईओ गोलमेज बैठकें और देश-राज्य सत्रों के साथ-साथ व्यापार-से-व्यापार, व्यापार-से-सरकार और सरकार-से-सरकार स्तर के संवाद भी आयोजित होंगे।
तीन प्रमुख मंचों का संयुक्त आयोजन
भारत नवीकरणीय ऊर्जा 2026 के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) की 9वीं सभा और ग्रीन हाइड्रोजन पर चौथा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (ICGH) भी आयोजित किया जाएगा। ISA सभा सौर ऊर्जा में अंतर्राष्ट्रीय वित्त और संस्थागत क्षमता विस्तार पर ध्यान देगी, जबकि ICGH ग्रीन हाइड्रोजन प्रौद्योगिकियों, निवेश और विस्तार पर केंद्रित रहेगा। ये तीनों मंच मिलकर स्वच्छ ऊर्जा के वैश्विक प्रसार को नई गति देने का प्रयास करेंगे।
एक्सपो और राज्यों की भागीदारी
एक्सपो में 400 से अधिक प्रदर्शक सौर और पवन ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, ऊर्जा भंडारण तथा उभरती स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों का प्रदर्शन करेंगे। 13 राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश — आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल — अपनी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता, निवेश के अवसरों और विनिर्माण क्षमताओं का प्रदर्शन करेंगे।
री-इन्वेस्ट की विरासत और वैश्विक संदर्भ
यह आयोजन भारत के प्रमुख नवीकरणीय ऊर्जा निवेश शिखर सम्मेलन री-इन्वेस्ट की विरासत को आगे बढ़ाता है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में हो रहा है जब भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य निर्धारित किया हुआ है और वैश्विक स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा निवेश के लिए प्रतिस्पर्धा तेज़ हो रही है। नीति निर्माताओं, निवेशकों, वित्तीय संस्थानों और उद्योग जगत के नेताओं की एक साथ उपस्थिति इस मंच को महज एक प्रदर्शनी से कहीं आगे ले जाती है।
क्या होगा आगे
सम्मेलन के दौरान होने वाली मंत्रिस्तरीय चर्चाओं और सीईओ गोलमेज बैठकों से निवेश प्रतिबद्धताओं और द्विपक्षीय ऊर्जा साझेदारियों की घोषणाएँ अपेक्षित हैं। 5 नवंबर 2026 को सम्मेलन के समापन तक इन परिणामों पर करीबी नज़र रहेगी।