10 अगस्त 2026
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11वीं ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक गुरुग्राम में शुरू, भारत की अध्यक्षता में 'सभी के लिए ऊर्जा' एजेंडा

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11वीं ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक गुरुग्राम में शुरू, भारत की अध्यक्षता में 'सभी के लिए ऊर्जा' एजेंडा

सारांश

गुरुग्राम में 11वीं ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक शुरू — 11 देश, दुनिया की आधी आबादी और वैश्विक जीडीपी का 40 प्रतिशत एक मेज़ पर। भारत 'सभी के लिए ऊर्जा' के एजेंडे के साथ ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को ब्रिक्स के केंद्र में रखने की कोशिश कर रहा है।

मुख्य बातें

25 जून 2026 को गुरुग्राम में 11वीं ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक का आयोजन हुआ, जिसकी अध्यक्षता भारत कर रहा है।
भारत ने ऊर्जा ट्रैक के लिए 'सभी के लिए ऊर्जा' थीम अपनाई है; तीन प्राथमिकताएँ — ऊर्जा सुरक्षा, ऊर्जा पहुँच और तकनीक-नवाचार।
ब्रिक्स के 11 सदस्य देश मिलकर विश्व की लगभग आधी आबादी और वैश्विक जीडीपी के 40 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करते हैं।
भारत ने पिछले दस वर्षों में सौर क्षमता 50 गुना से अधिक बढ़ाई; 6 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाए और 2032 तक 410 GWh ऊर्जा भंडारण का लक्ष्य रखा।
भारत अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) और वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन (GBA) के ज़रिये वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा सहयोग का नेतृत्व कर रहा है।

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के अंतर्गत 25 जून 2026 को गुरुग्राम में 11वीं ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक का आगाज़ हुआ, जिसमें सभी 11 ब्रिक्स सदस्य देशों के ऊर्जा मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी एकत्रित हुए। ऊर्जा सुरक्षा, स्थिरता और नवाचार पर बहुपक्षीय सहयोग को नई दिशा देने के उद्देश्य से आयोजित यह बैठक भारत के लिए वैश्विक ऊर्जा कूटनीति में अपनी बढ़ती भूमिका को रेखांकित करने का अवसर है।

बैठक की थीम और प्राथमिकताएँ

भारत की ब्रिक्स चेयरशिप 2026 की मुख्य थीम 'बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी' है। ऊर्जा ट्रैक के लिए भारत ने 'सभी के लिए ऊर्जा' का उपविषय चुना है, जो वैश्विक स्तर पर समावेशी ऊर्जा पहुँच सुनिश्चित करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। भारत की अध्यक्षता ने ब्रिक्स ऊर्जा एजेंडा को तीन केंद्रीय स्तंभों पर खड़ा किया है: ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता; ऊर्जा तक पहुँच और स्वामित्व; तथा तकनीक और नवाचार

ब्रिक्स का वैश्विक कद

वर्तमान में ब्रिक्स में ब्राज़ील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। ये सदस्य देश मिलकर विश्व की लगभग आधी आबादी और वैश्विक जीडीपी के करीब 40 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया भर के देश जलवायु परिवर्तन, तकनीकी बदलाव और बढ़ती ऊर्जा माँग की चुनौतियों के बीच ऊर्जा सुरक्षा, किफ़ायतीपन और स्थिरता के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रहे हैं।

भारत की ऊर्जा उपलब्धियाँ

दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बिजली उत्पादक और उपभोक्ता होने के नाते भारत सुरक्षित, सस्ती और स्थिर ऊर्जा को अपने विकसित भारत 2047 विजन की आधारशिला मानता है। पिछले दस वर्षों में भारत ने अपनी सौर ऊर्जा क्षमता को 50 गुना से अधिक बढ़ाया है, 6 करोड़ से अधिक स्मार्ट मीटर स्थापित किए हैं और 2032 तक 410 GWh ऊर्जा भंडारण क्षमता हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। नवीकरणीय ऊर्जा के बड़े पैमाने पर एकीकरण को सुगम बनाने के लिए राष्ट्रीय ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार और ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर का विकास भी तेज़ किया गया है। बायोफ्यूल क्षेत्र में 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग और E85 फ्यूल (80-85 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण) का रोलआउट इस दिशा में भारत की ठोस प्रगति को दर्शाता है।

वैश्विक ऊर्जा सहयोग में भारत की भूमिका

वैश्विक स्तर पर भारत अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) और वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन (GBA) जैसी महत्त्वाकांक्षी पहलों के ज़रिये स्वच्छ ऊर्जा सहयोग का प्रमुख पैरोकार बनकर उभरा है। ब्रिक्स अध्यक्ष के रूप में भारत ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को केंद्र में रखते हुए ऊर्जा सुरक्षा, सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखला, नवाचार और सतत विकास पर व्यावहारिक सहयोग को बढ़ावा देने का प्रयास करेगा। गौरतलब है कि तेज़ी से अनिश्चित होते वैश्विक ऊर्जा माहौल में ब्रिक्स देशों के बीच यह समन्वय पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गया है।

आगे की राह

इस बैठक से ऊर्जा सुरक्षा, नवाचार और सतत विकास पर ब्रिक्स सहयोग के और सुदृढ़ होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि सदस्य देश साझा तकनीक-हस्तांतरण और वित्तपोषण ढाँचे पर सहमति बना सकें, तो यह बैठक वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन में ब्रिक्स की सामूहिक भूमिका को परिभाषित करने वाला मील का पत्थर साबित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह होगी कि क्या 11 विविध देश — जिनमें रूस और सऊदी अरब जैसे जीवाश्म ईंधन निर्यातक और भारत-ब्राज़ील जैसे नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बढ़ते देश शामिल हैं — किसी बाध्यकारी सहयोग ढाँचे पर सहमत हो सकते हैं। ब्रिक्स की संरचनागत विविधता ऐसे साझा एजेंडे को अक्सर सबसे छोटे सार्वजनिक भाजक तक सीमित कर देती है। भारत के लिए यह बैठक घरेलू ऊर्जा उपलब्धियों को वैश्विक कूटनीतिक पूँजी में बदलने का अवसर है, पर इसके लिए ठोस प्रतिबद्धताएँ — न कि केवल साझा वक्तव्य — ज़रूरी होंगी।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

11वीं ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक क्या है और यह कहाँ हो रही है?
यह ब्रिक्स देशों के ऊर्जा मंत्रियों की 11वीं वार्षिक बैठक है, जो 25 जून 2026 को गुरुग्राम में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के तहत आयोजित हो रही है। इसमें सभी 11 ब्रिक्स सदस्य देशों के ऊर्जा मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी भाग ले रहे हैं।
इस बैठक में भारत का मुख्य एजेंडा क्या है?
भारत ने ऊर्जा ट्रैक के लिए 'सभी के लिए ऊर्जा' थीम अपनाई है। तीन केंद्रीय प्राथमिकताएँ हैं — ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता; ऊर्जा तक पहुँच और स्वामित्व; और तकनीक व नवाचार। भारत ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को ब्रिक्स के ऊर्जा एजेंडे के केंद्र में रखने का प्रयास कर रहा है।
ब्रिक्स में कौन-कौन से देश शामिल हैं और इनका वैश्विक महत्त्व क्या है?
ब्रिक्स में अभी ब्राज़ील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात — कुल 11 देश शामिल हैं। ये देश मिलकर विश्व की लगभग आधी आबादी और वैश्विक जीडीपी के करीब 40 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करते हैं।
ऊर्जा क्षेत्र में भारत की हालिया उपलब्धियाँ क्या हैं?
पिछले दस वर्षों में भारत ने सौर ऊर्जा क्षमता 50 गुना से अधिक बढ़ाई है और 6 करोड़ से अधिक स्मार्ट मीटर लगाए हैं। इसके अलावा 2032 तक 410 GWh ऊर्जा भंडारण क्षमता का लक्ष्य, 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग और E85 फ्यूल का रोलआउट भी इस दिशा में प्रमुख कदम हैं।
इस बैठक से क्या परिणाम अपेक्षित हैं?
बैठक से ऊर्जा सुरक्षा, नवाचार और सतत विकास पर ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग और मज़बूत होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि सदस्य देश साझा तकनीक-हस्तांतरण और वित्तपोषण ढाँचे पर सहमति बना सकें, तो यह वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन में ब्रिक्स की भूमिका को नई परिभाषा दे सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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