1 नवंबर 2026
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मनीषा भनवाला का खुलासा: 0-6 से पिछड़कर भी नहीं टूटा हौसला, कोचों की ट्रेनिंग ने दिलाया वर्ल्ड चैंपियनशिप गोल्ड

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मनीषा भनवाला का खुलासा: 0-6 से पिछड़कर भी नहीं टूटा हौसला, कोचों की ट्रेनिंग ने दिलाया वर्ल्ड चैंपियनशिप गोल्ड

सारांश

0-6 से पिछड़कर वापसी करना सिर्फ जज़्बे की कहानी नहीं — यह वर्षों की सुनियोजित ट्रेनिंग का नतीजा था। मनीषा भनवाला ने बताया कि कोचों ने उन्हें ठीक ऐसी ही परिस्थितियों के लिए तैयार किया था। अब उनकी नज़र लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 पर है।

मुख्य बातें

मनीषा भनवाला सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनीं।
फाइनल में एबिगेल नेटो के खिलाफ 0-6 से पिछड़ने के बाद ऐतिहासिक वापसी कर 59 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीता।
एशियन गेम्स में निराशा के केवल 10 दिन बाद वर्ल्ड चैंपियनशिप में उतरीं और कमियों पर काम कर इतिहास रचा।
टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) से 2024 से जुड़ी हैं; आर्थिक सहायता और विदेशी ट्रेनिंग कैंप्स को सफलता का श्रेय दिया।
लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 के लिए 57 किग्रा वर्ग में क्वालिफाई करने का लक्ष्य; 2027 में चार रैंकिंग सीरीज़ में भाग लेने की योजना।
अस्ताना विश्व चैंपियनशिप में भारत ने कुल 4 पदक जीते — 1 स्वर्ण, 2 रजत, 1 कांस्य ।

भारतीय पहलवान मनीषा भनवाला ने बताया कि सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप के फाइनल में 0-6 से पिछड़ने के बावजूद उन पर कोई मानसिक दबाव नहीं था, क्योंकि उनके कोचों ने उन्हें ठीक ऐसी ही विकट परिस्थितियों के लिए वर्षों तक तैयार किया था। कजाकिस्तान के अस्ताना में आयोजित इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में महिलाओं के 59 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर वह सीनियर विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बन गई हैं।

मानसिक मजबूती का रहस्य

1 नवंबर 2026 को साई मीडिया द्वारा आयोजित एक बातचीत में 23 वर्षीय मनीषा ने फाइनल में एबिगेल नेटो के खिलाफ उस ऐतिहासिक वापसी का राज़ साझा किया। उन्होंने कहा, 'जब हम प्रैक्टिस करते हैं, तो हमारे कोच हमें ऐसी स्थितियाँ देते हैं जहाँ हमें 30 सेकंड के अंदर अंक हासिल करने होते हैं। हम इसी पर प्रैक्टिस करते हैं। मैं लंबे समय से इसके लिए काम कर रही थी। मुझे ऐसी स्थितियों को संभालना था, इसलिए मैंने प्रैक्टिस की और इससे मदद मिली। वहाँ कोई मानसिक दबाव नहीं था।'

गौरतलब है कि आखिरी कुछ सेकंड में अंक हासिल करने की यह क्षमता ही उनके प्रशिक्षण का केंद्रबिंदु रही, और फाइनल के निर्णायक क्षणों में यही रणनीति काम आई।

एशियन गेम्स की निराशा से वर्ल्ड चैंपियन तक का सफर

मनीषा ने एशियन गेम्स में मिली निराशा का भी उल्लेख किया, जहाँ वह महिलाओं के 57 किग्रा वर्ग में कोई पदक नहीं जीत पाई थीं। उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं लगा था कि मैं एशियन गेम्स 2026 से बिना कोई पदक जीते वापस आऊंगी। मैं बहुत निराश थी। लेकिन जो हो गया, मैं उस पर ध्यान नहीं देती। मैं आगे जो होने वाला है, उस पर विश्वास रखती हूँ।'

एशियन गेम्स के केवल 10 दिन बाद वर्ल्ड चैंपियनशिप थी। मनीषा ने इस छोटे से अंतराल का पूरा उपयोग अपनी कमज़ोरियों पर काम करने में किया। उन्होंने बताया, 'इन 10 दिनों में मैंने अपनी कमियों पर काम किया। तो हाँ, इससे मुझे मदद मिली।' अस्ताना में उन्होंने 59 किग्रा वर्ग में प्रतिस्पर्धा की, क्योंकि दो टूर्नामेंटों के बीच कम समय में 57 किग्रा के लिए वजन प्रबंधन और रिकवरी कठिन होती।

लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 का लक्ष्य

लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 को ध्यान में रखते हुए मनीषा ने स्पष्ट किया कि वह अगले साल होने वाले क्वालिफिकेशन इवेंट्स में 57 किग्रा वर्ग पर फोकस करेंगी, क्योंकि 59 किग्रा वर्ग ओलंपिक कार्यक्रम का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा, 'अगले साल होने वाले लॉस एंजिल्स क्वालिफायर्स के लिए मैं 57 किलोग्राम कैटेगरी में हिस्सा लेना चाहती हूँ।'

उन्होंने 2027 में होने वाली चार रैंकिंग सीरीज़ प्रतियोगिताओं में भाग लेने के महत्व पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, 'अगर हम इनमें हिस्सा लेते हैं, तो हमें बहुत कुछ सीखने को मिलेगा, जिससे लॉस एंजिल्स क्वालिफायर्स आसान हो जाएंगे।'

टॉप्स स्कीम की भूमिका

मनीषा ने 'टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम' (TOPS) से मिले समर्थन को अपनी सफलता का अहम हिस्सा बताया। 2024 से इस योजना से जुड़ी मनीषा ने कहा, 'टॉप्स स्कीम के तहत हमें हर महीने पॉकेट मनी मिलती है। एक खिलाड़ी के लिए यह बहुत जरूरी है। कई चीज़ें काफी महँगी होती हैं, जिनका खर्च उठाना हमारे परिवार के लिए मुमकिन नहीं होता।'

उन्होंने यह भी कहा कि एशियन गेम्स में पदक न मिलने के बावजूद TOPS ने उनका साथ नहीं छोड़ा। 'एशियन गेम्स में मेडल न जीत पाने के बाद भी, उन्होंने मुझे लॉस एंजिल्स पर फोकस करने के लिए कहा। इसके लिए मैं टॉप्स का धन्यवाद करती हूँ।'

विश्व चैंपियनशिप में भारत का प्रदर्शन

अस्ताना में आयोजित इस विश्व चैंपियनशिप में भारत ने कुल चार पदक जीते — मनीषा का ऐतिहासिक स्वर्ण पदक, दो रजत और एक कांस्य पदक। मनीषा ने एशिया और विश्व स्तर की प्रतिस्पर्धा की तुलना करते हुए कहा कि दोनों में मज़बूत प्रतिद्वंद्वी होते हैं, हालाँकि विश्व चैंपियनशिप में यूरोपीय खिलाड़ियों का पलड़ा थोड़ा भारी रहता है। आने वाले वर्षों में मनीषा की नज़र अब लॉस एंजिल्स के ओलंपिक पोडियम पर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारतीय खेल तंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण सवाल उठाती है — क्या TOPS जैसी योजनाएँ तभी काम करती हैं जब एथलीट स्वयं असाधारण मानसिक दृढ़ता रखता हो? एशियन गेम्स की विफलता के बाद भी सपोर्ट जारी रखना सराहनीय है, लेकिन यह भी उल्लेखनीय है कि 59 किग्रा वर्ग ओलंपिक कार्यक्रम में नहीं है, यानी यह ऐतिहासिक गोल्ड ओलंपिक रास्ते को स्वतः नहीं खोलता। असली परीक्षा 2027 की रैंकिंग सीरीज़ और 57 किग्रा में वापसी होगी — और वहाँ वज़न प्रबंधन की चुनौती फिर सामने आएगी।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मनीषा भनवाला ने वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड कैसे जीता?
मनीषा ने कजाकिस्तान के अस्ताना में महिलाओं के 59 किग्रा वर्ग के फाइनल में एबिगेल नेटो के खिलाफ 0-6 से पिछड़ने के बाद शानदार वापसी कर स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने बताया कि कोचों ने उन्हें 30 सेकंड में अंक हासिल करने जैसी विकट परिस्थितियों के लिए वर्षों तक प्रशिक्षित किया था, जिससे फाइनल में कोई मानसिक दबाव नहीं था।
क्या मनीषा भनवाला वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला हैं?
हाँ, मनीषा भनवाला सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनी हैं। यह उपलब्धि उन्होंने अस्ताना में 59 किग्रा वर्ग में हासिल की।
मनीषा भनवाला लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 के लिए कैसे तैयारी करेंगी?
मनीषा ने बताया कि चूँकि 59 किग्रा वर्ग ओलंपिक कार्यक्रम में नहीं है, इसलिए वह 2027 के लॉस एंजिल्स क्वालिफायर्स के लिए 57 किग्रा वर्ग में उतरेंगी। इसके साथ ही वह 2027 में होने वाली चार रैंकिंग सीरीज़ प्रतियोगिताओं में भाग लेकर अपनी तैयारी को मज़बूत करेंगी।
टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) ने मनीषा की सफलता में क्या भूमिका निभाई?
मनीषा 2024 से TOPS से जुड़ी हैं। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत मिलने वाली मासिक आर्थिक सहायता और विदेशी ट्रेनिंग कैंप्स में भाग लेने के अवसर ने उनके आत्मविश्वास और कौशल को निखारने में अहम भूमिका निभाई। एशियन गेम्स में पदक न मिलने के बाद भी TOPS ने उनका साथ नहीं छोड़ा।
विश्व चैंपियनशिप 2026 में भारत ने कुल कितने पदक जीते?
अस्ताना में आयोजित सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में भारत ने कुल चार पदक जीते — मनीषा भनवाला का एक स्वर्ण, दो रजत और एक कांस्य पदक।
राष्ट्र प्रेस
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