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ओडिशा में बड़ा आईपीएस फेरबदल: यौन उत्पीड़न आरोप के बाद डीजीपी जेल सुशांत नाथ ओएसडी बनाए गए

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ओडिशा में बड़ा आईपीएस फेरबदल: यौन उत्पीड़न आरोप के बाद डीजीपी जेल सुशांत नाथ ओएसडी बनाए गए

सारांश

ओडिशा सरकार ने यौन उत्पीड़न आरोपों के बाद डीजीपी जेल सुशांत नाथ को ओएसडी बनाया। 1 नवंबर को हुए इस व्यापक आईपीएस फेरबदल में झारसुगुड़ा, नुआपाड़ा और कटक समेत कई पदों पर नई तैनातियाँ की गई हैं। चौद्वार पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर की जाँच अब निर्णायक होगी।

मुख्य बातें

डीजीपी जेल सुशांत कुमार नाथ को यौन उत्पीड़न और आपराधिक धमकी के आरोपों के बाद गृह विभाग का ओएसडी बनाया गया।
31 अक्टूबर 2026 को चौद्वार पुलिस स्टेशन में चौद्वार सर्कल जेल की पूर्व महिला जेलर ने शिकायत दर्ज कराई।
1995 बैच के आईपीएस संतोष बाला को अतिरिक्त महानिदेशक कारागार का प्रभार जारी रखने की अनुमति।
2010 बैच की सारा शर्मा केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से वापस; उप महानिरीक्षक (सतर्कता) के पद पर नियुक्त।
2022 बैच की सोनाली सिंह परमार खोरधा से झारसुगुड़ा एसपी बनाई गईं।
अमिताभ ठाकुर को अतिरिक्त जेल प्रभार से मुक्त कर परिवहन आयुक्त पद पर केंद्रित किया गया।

ओडिशा सरकार ने 1 नवंबर 2026 को वरिष्ठ भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारियों का व्यापक फेरबदल किया, जिसमें पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) जेल सुशांत कुमार नाथ का तबादला सबसे अहम है। चौद्वार सर्कल जेल की एक पूर्व महिला जेलर द्वारा उनके विरुद्ध यौन उत्पीड़न और आपराधिक धमकी के आरोप लगाए जाने के बाद यह कदम उठाया गया है। नाथ को अब गृह विभाग के विशेष कर्तव्य अधिकारी (ओएसडी) के रूप में तैनात किया गया है।

मामले की पृष्ठभूमि

31 अक्टूबर 2026 को चौद्वार पुलिस स्टेशन में पूर्व महिला जेलर ने डीजीपी नाथ के विरुद्ध लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर उनके खिलाफ औपचारिक मामला दर्ज किया गया। शिकायत में यौन उत्पीड़न और आपराधिक धमकी के आरोप शामिल हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में पुलिस बल की जवाबदेही को लेकर सार्वजनिक चर्चा तेज़ है।

मुख्य तबादले और नई तैनातियाँ

1995 बैच के आईपीएस अधिकारी और राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एसएफएसएल) के निदेशक संतोष बाला को अतिरिक्त महानिदेशक कारागार एवं ओडिशा सुधार सेवाओं के निदेशक का अतिरिक्त प्रभार जारी रखने की अनुमति दी गई है।

1998 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर, जो कटक में ओडिशा परिवहन आयुक्त के रूप में कार्यरत हैं और पूर्व में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (जेल) का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे, को उस अतिरिक्त जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया है। वह अब पूर्णतः परिवहन आयुक्त के पद पर केंद्रित रहेंगे।

इसी बैच के आईपीएस अधिकारी राजेश कुमार, जो अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एसएपी) के रूप में कार्यरत हैं, को गृह विभाग के विशेष सचिव का अतिरिक्त प्रभार जारी रखने की अनुमति दी गई है।

महिला अधिकारी की वापसी और अन्य नियुक्तियाँ

2010 बैच की आईपीएस अधिकारी सारा शर्मा को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से वापस बुलाकर पुलिस उप महानिरीक्षक (सतर्कता) के पद पर नियुक्त किया गया है। यह तैनाती उल्लेखनीय है, क्योंकि सतर्कता विभाग आंतरिक जवाबदेही तंत्र का एक प्रमुख हिस्सा है।

2019 बैच के आईपीएस अधिकारी गुंडाला रेड्डी राघवेंद्र, जो झारसुगुड़ा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) थे, को स्थानांतरित कर कटक स्थित राज्य पुलिस मुख्यालय में सहायक पुलिस महानिरीक्षक (एआईजी) के रूप में तैनात किया गया है।

2021 बैच के आईपीएस अधिकारी अमृतपाल सिंह को नुआपाड़ा एसपी पद से हटाकर राज्य पुलिस मुख्यालय के एसपी के रूप में नियुक्त किया गया है। 2022 बैच की आईपीएस अधिकारी सोनाली सिंह परमार, जो खोरधा में अतिरिक्त एसपी थीं, अब झारसुगुड़ा एसपी का पदभार संभालेंगी।

ओपीएस अधिकारी का पुनर्नियोजन

ओडिशा पुलिस सेवा (ओपीएस) अधिकारी तपन नारायण रथ को कटक स्थित राज्य पुलिस मुख्यालय के एआईजी पद से स्थानांतरित कर नुआपाड़ा एसपी के रूप में तैनात किया गया है।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि यह फेरबदल राज्य सरकार की ओर से त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि तबादला मात्र से आरोपों की निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित नहीं होती — यह देखना अभी बाकी है कि पंजीकृत मामले में अन्वेषण कितनी तेज़ी और स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि जवाबदेही की गारंटी — ओएसडी पद पर भेजना एफआईआर की जाँच को न तो तेज़ करता है और न ही स्वतंत्र बनाता है। सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार किसी वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के विरुद्ध दर्ज मामले की जाँच किसी निष्पक्ष एजेंसी को सौंपेगी या यह विभागीय दायरे में ही सिमट जाएगा। गौरतलब है कि देश के विभिन्न राज्यों में कार्यस्थल उत्पीड़न के मामलों में वरिष्ठ अधिकारियों को 'साइडलाइन' कर मामला ठंडा करने का चलन रहा है। शिकायतकर्ता महिला जेलर और उनके साथ खड़े होने का साहस करने वालों के लिए असली परीक्षा अब शुरू होती है।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीजीपी जेल सुशांत कुमार नाथ का तबादला क्यों किया गया?
चौद्वार सर्कल जेल की एक पूर्व महिला जेलर ने 31 अक्टूबर 2026 को उनके विरुद्ध यौन उत्पीड़न और आपराधिक धमकी की शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद ओडिशा सरकार ने उन्हें डीजीपी जेल पद से हटाकर गृह विभाग का ओएसडी बनाया। मामला चौद्वार पुलिस स्टेशन में दर्ज है।
ओडिशा के नए डीजीपी जेल कौन होंगे?
1995 बैच के आईपीएस अधिकारी और एसएफएसएल निदेशक संतोष बाला को अतिरिक्त महानिदेशक कारागार एवं ओडिशा सुधार सेवाओं के निदेशक का अतिरिक्त प्रभार जारी रखने की अनुमति दी गई है। कोई नई स्थायी नियुक्ति की घोषणा अभी नहीं की गई है।
ओडिशा आईपीएस फेरबदल में कितने अधिकारी प्रभावित हुए?
1 नवंबर 2026 के आदेश में कई वरिष्ठ आईपीएस और ओपीएस अधिकारी प्रभावित हुए हैं, जिनमें सुशांत नाथ, संतोष बाला, अमिताभ ठाकुर, राजेश कुमार, सारा शर्मा, गुंडाला रेड्डी राघवेंद्र, अमृतपाल सिंह, सोनाली सिंह परमार और तपन नारायण रथ शामिल हैं।
सारा शर्मा को किस पद पर तैनात किया गया है?
2010 बैच की आईपीएस अधिकारी सारा शर्मा को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से वापस बुलाकर पुलिस उप महानिरीक्षक (सतर्कता) के पद पर तैनात किया गया है।
चौद्वार जेल यौन उत्पीड़न मामले में आगे क्या होगा?
31 अक्टूबर को दर्ज एफआईआर के आधार पर जाँच जारी है। सुशांत नाथ के तबादले के बाद अब यह देखना अहम होगा कि राज्य सरकार जाँच किस एजेंसी को सौंपती है और क्या यह प्रक्रिया स्वतंत्र एवं निष्पक्ष रहती है।
राष्ट्र प्रेस
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