ओडिशा: जारपाडा थाने की एएसआई सीता नायक ₹8,000 की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा विजिलेंस ने अंगुल जिले के जारपाडा पुलिस स्टेशन में तैनात असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर (एएसआई) सीता नायक को ₹8,000 की रिश्वत लेते हुए शनिवार की सुबह रंगेहाथ गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई एक पूर्व-नियोजित जाल के तहत की गई, जिसमें शिकायतकर्ता लक्ष्मीधर साहू ने विजिलेंस को सूचित किया था।
मामले की पृष्ठभूमि
जारपाडा थाना क्षेत्र के बडाहीनसार गाँव के निवासी लक्ष्मीधर साहू और उनके एक मित्र के बीच कुछ समय पूर्व विवाद हुआ था, जो पुलिस स्टेशन तक पहुँचा। बाद में दोनों पक्षों के बीच आपसी समझौता हो गया। हालाँकि, एएसआई सीता नायक ने लक्ष्मीधर को सूचित किए बिना मामले को न्यायालय में भेज दिया।
जब लक्ष्मीधर को इस बात की जानकारी हुई, तो वे पुलिस स्टेशन गए और एएसआई सीता नायक से बात की। सीता नायक ने कथित तौर पर मामला वापस सुलझाने के बदले ₹8,000 की माँग रखी।
विजिलेंस का जाल और गिरफ्तारी
लक्ष्मीधर साहू ने रिश्वत की माँग की जानकारी तुरंत विजिलेंस विभाग को दी। इसके बाद विजिलेंस की टीम ने एक सुनियोजित जाल बिछाया। शनिवार की सुबह जब एएसआई सीता नायक ने जारपाडा पुलिस स्टेशन के भीतर ही रिश्वत की रकम स्वीकार की, तो विजिलेंस अधिकारियों ने उन्हें मौके पर ही दबोच लिया। फिलहाल वे हिरासत में हैं और विजिलेंस विभाग आगे की जाँच कर रहा है।
पश्चिम बंगाल में भी भ्रष्टाचार पर बड़ी कार्रवाई
इसी अवधि में पश्चिम बंगाल से भी एक बड़े भ्रष्टाचार मामले की खबर सामने आई। बहुचर्चित नगर पालिका भर्ती घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायक और पूर्व मंत्री मदन मित्रा से जुड़े 7 ठिकानों पर शनिवार को तलाशी अभियान चलाया।
सूत्रों के अनुसार, यह मामला नगरपालिकाओं में नौकरी दिलाने के बदले कथित तौर पर करोड़ों रुपये लेने से जुड़ा है। जाँच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक, मदन मित्रा पर आरोप है कि उन्होंने मध्यस्थों के ज़रिए नकद और सोने के रूप में रिश्वत ली — जिसमें कामारहाटी नगर पालिका भी शामिल है। सूत्रों ने बताया कि मदन मित्रा 125 से अधिक कथित अवैध नियुक्तियों से सीधे जुड़े पाए गए हैं, जिनमें अयोग्य उम्मीदवारों को नौकरियाँ दिलाई गईं।
आगे क्या होगा
ओडिशा विजिलेंस एएसआई सीता नायक के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत आगे की कार्रवाई कर रही है। यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि पुलिस तंत्र के भीतर जवाबदेही तय करना अभी भी एक बड़ी चुनौती है।