सीबीआई ने चंडीगढ़ पुलिस के एएसआई हितेश कुमार को ₹40,000 रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 7 जून 2026 को चंडीगढ़ के सेक्टर-39 पुलिस स्टेशन में तैनात असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (एएसआई) हितेश कुमार को ₹40,000 की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया। आरोप है कि एएसआई ने एक सड़क दुर्घटना मामले में शिकायतकर्ता की गाड़ी छोड़ने और उसके खिलाफ आपराधिक केस दर्ज न करने के बदले यह रकम मांगी थी।
मामले का पूरा घटनाक्रम
सीबीआई ने 6 जून को एक शिकायत के आधार पर यह केस दर्ज किया था। शिकायत के अनुसार, आरोपी एएसआई हितेश कुमार ने शुरू में शिकायतकर्ता से ₹50,000 की मांग की थी। बातचीत के बाद यह राशि ₹40,000 पर तय हुई। सीबीआई ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जाल बिछाया और आरोपी को रकम लेते हुए रंगेहाथ दबोच लिया।
तलाशी और आगे की कार्रवाई
गिरफ्तारी के बाद सीबीआई की टीम आरोपी के ठिकानों पर तलाशी अभियान चला रही है। आरोपी एएसआई को चंडीगढ़ की सक्षम अदालत में पेश किया जाएगा। जांच एजेंसी के अनुसार इस मामले में जांच अभी जारी है और आगे और खुलासे हो सकते हैं।
कानपुर में भी सीबीआई की कार्रवाई
इसी क्रम में सीबीआई ने हाल ही में उत्तर प्रदेश के कानपुर में बैंक ऑफ बड़ौदा की नोनारी बुजुर्ग शाखा, जिला कानपुर देहात के ब्रांच मैनेजर गौरव वर्मा और बैंक मित्र राघवेंद्र को गिरफ्तार किया। इन पर एक लोन लाभार्थी से ₹25,000 की रिश्वत मांगने का आरोप है।
सीबीआई ने जाल बिछाकर आरोपी दलाल राघवेंद्र को शिकायतकर्ता से ब्रांच मैनेजर की ओर से ₹15,000 की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ा। दोनों आरोपियों को बाद में लखनऊ की एक विशेष सीबीआई अदालत में पेश किया गया।
कानपुर मामले की पृष्ठभूमि
शिकायत के अनुसार, शिकायतकर्ता ने दिसंबर 2023 में सोलर आटा मिल स्थापित करने के लिए प्रधानमंत्री रोजगार कार्यक्रम के तहत बैंक ऑफ बड़ौदा की उक्त शाखा से ₹10 लाख का ऋण लिया था। सीबीआई ने इस मामले में 3 जून को केस दर्ज किया था। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब केंद्रीय एजेंसियाँ सरकारी योजनाओं से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों में सक्रियता से कार्रवाई कर रही हैं।
आम जनता पर असर
ये दोनों मामले दर्शाते हैं कि सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार का सिलसिला पुलिस थानों से लेकर सरकारी बैंकों तक फैला हुआ है। सीबीआई की त्वरित कार्रवाई से आम नागरिकों में यह संदेश जाता है कि शिकायत दर्ज कराने पर जांच एजेंसी तत्परता से कदम उठाती है।