ओडिशा विजिलेंस की बड़ी कार्रवाई: बालेश्वर सीडीपीओ और मलकानगिरि राजस्व निरीक्षक रिश्वत लेते गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा विजिलेंस विभाग ने 18 अगस्त 2026 को दो अलग-अलग जिलों में एक साथ की गई ट्रैप कार्रवाई में दो सरकारी अधिकारियों को रिश्वत लेते रंगेहाथों गिरफ्तार किया। गिरफ्तार अधिकारियों में बालेश्वर की बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) मधुस्मिता मोहंती और मलकानगिरि जिले के झरापाली सर्किल के राजस्व निरीक्षक सूरज बाला शामिल हैं। दोनों मामलों में भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।
बालेश्वर में सीडीपीओ का मामला
मधुस्मिता मोहंती सदर, बालेश्वर की सीडीपीओ होने के साथ-साथ बालेश्वर नगर पालिका की प्रभारी सीडीपीओ के रूप में भी कार्यरत थीं। विजिलेंस के अनुसार, नगर पालिका को किराए पर वाहन उपलब्ध कराने वाले एक व्यक्ति ने जून और जुलाई 2026 के दो महीनों का बकाया बिल — प्रति माह ₹26,000 की दर से — जमा किया था।
आरोप है कि मोहंती ने बिल पास करने और भुगतान जारी करने के बदले ₹5,000 रिश्वत की मांग की। शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस टीम ने जाल बिछाया और उन्हें बालेश्वर कलेक्ट्रेट परिसर में रिश्वत मांगते और स्वीकार करते हुए पकड़ लिया। पूरी रिश्वत राशि उनके पास से बरामद कर जब्त कर ली गई।
गिरफ्तारी के तुरंत बाद विजिलेंस टीम ने गोपालगांव, बालेश्वर स्थित उनके दो मंजिला आवास और कार्यालय कक्ष में एक साथ तलाशी अभियान चलाया। यह मामला बालेश्वर विजिलेंस थाने में भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 की धारा 7 के तहत दर्ज किया गया है।
मलकानगिरि में राजस्व निरीक्षक की गिरफ्तारी
मलकानगिरि तहसील के झरापाली सर्किल के राजस्व निरीक्षक सूरज बाला को विजिलेंस अधिकारियों ने ₹8,000 रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों गिरफ्तार किया। आरोप है कि उन्होंने एक व्यक्ति की पत्नी के पक्ष में अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र जारी करने हेतु आवश्यक सत्यापन रिपोर्ट देने के एवज में ₹10,000 रिश्वत की मांग की थी।
विजिलेंस के अनुसार, आवेदक ने नियमानुसार ऑनलाइन आवेदन और निर्धारित शुल्क भी जमा कर दिया था। इसके बावजूद सूरज बाला ने कथित तौर पर प्रक्रिया में जानबूझकर देरी की और रिश्वत की मांग रखी। शिकायत पर विजिलेंस ने ट्रैप लगाया और उन्हें ₹8,000 स्वीकार करते हुए पकड़ा।
पूर्व में भी दर्ज है मामला
जांच में यह भी सामने आया कि सूरज बाला पहली बार भ्रष्टाचार के आरोप में नहीं फंसे हैं। वर्ष 2023 में कोरापुट विजिलेंस थाने में दर्ज एक मामले में उन पर अतिक्रमण प्रकरण में नोटिस जारी करने के बदले ₹15,000 रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया था। वह मामला फिलहाल अदालत में लंबित है।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब ओडिशा विजिलेंस विभाग ने राज्य में भ्रष्टाचार के विरुद्ध अपनी कार्रवाइयों को तेज किया है। एक ही दिन में दो अलग-अलग जिलों में एक साथ ट्रैप ऑपरेशन चलाना विभाग की बढ़ती सक्रियता का संकेत है।
आगे की कार्रवाई
दोनों अधिकारियों को गिरफ्तार कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। दोनों मामलों में संबंधित विजिलेंस थानों में भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 की धारा 7 के तहत प्राथमिकी दर्ज है। आने वाले दिनों में विजिलेंस विभाग द्वारा दोनों अधिकारियों की संपत्तियों की और जांच किए जाने की संभावना है।