अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे पर संत समाज की चेतावनी: रामलला के दर्शन न किए तो सनातन विरोध सिद्ध होगा
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के प्रस्तावित अयोध्या दौरे को लेकर संत समाज ने अपनी स्पष्ट राय रखी है। तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगतगुरु परमहंस आचार्य और हनुमानगढ़ी के पुजारी देवेश आचार्य ने 4 अक्टूबर 2026 को अखिलेश यादव से राम मंदिर में रामलला के दर्शन करने की अपेक्षा जताई है। संतों का कहना है कि यदि वे दर्शन नहीं करते, तो उनकी और उनकी पार्टी की सनातन-विरोधी विचारधारा सिद्ध होती दिखेगी।
परमहंस आचार्य का स्वागत और शर्त
जगतगुरु परमहंस आचार्य ने कहा कि सपा मुखिया का मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की पावन जन्मभूमि अयोध्या में आगमन स्वागत योग्य है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि अखिलेश यादव राम मंदिर जाकर रामलला का आशीर्वाद लेंगे।
उन्होंने राम मंदिर से जुड़े वित्तीय अनियमितता के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा, 'बीते दिनों जो वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया था, उसे लेकर अखिलेश यादव ने सबसे पहले सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। जब लोगों ने उनसे पूछा कि उन्हें यह सूचना किसने दी, तो उन्होंने कहा कि प्रभु श्री राम ने बताया। यदि प्रभु श्री राम ने ही उन्हें सूचना दी है, तो उन्हें कम से कम प्रभु के चरण स्पर्श कर दर्शन तो करना ही चाहिए।'
सनातन विरोध का आरोप
परमहंस आचार्य ने आगे कहा, 'अगर वह दर्शन नहीं करेंगे तो यह समझा जाएगा कि आप समय-समय पर सनातन को बदनाम करने के लिए किसी न किसी षड्यंत्र की सोच रखते हैं और उसे करते रहते हैं।' यह टिप्पणी राजनीतिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र धार्मिक मुद्दे एक बार फिर केंद्र में आ गए हैं।
हनुमानगढ़ी के पुजारी की अपील
हनुमानगढ़ी के पुजारी देवेश आचार्य ने भी अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा, 'हम लोगों की और सभी सनातन धर्मावलंबियों की हार्दिक इच्छा है कि अखिलेश यादव अपने परिवार के साथ अयोध्या आकर भगवान रामलला के दर्शन करें और उनका आशीर्वाद लें।'
देवेश आचार्य ने स्पष्ट किया कि अखिलेश यादव एक धार्मिक आयोजन में अयोध्या आ रहे हैं, जो किसी पार्टी का कार्यक्रम नहीं है, इसलिए उन्हें निश्चित रूप से भगवान राम के दरबार में जाकर शीश झुकाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इतने दिनों तक दर्शन न कर पाने के लिए उन्हें भगवान से क्षमा भी माँगनी चाहिए।
राजनीतिक संदर्भ और व्यापक असर
गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी (सपा) और धार्मिक संगठनों के बीच तनाव कोई नई बात नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक ज़मीन मज़बूत करने की कोशिश में हैं और अयोध्या की राजनीतिक प्रतीकात्मकता लगातार बढ़ रही है।
देवेश आचार्य ने यह भी कहा कि यदि वे दर्शन नहीं करते, तो उनकी और उनकी पार्टी की जो विचारधारा रही है — जिसमें कथित तौर पर हिंदुओं, हिंदू ग्रंथों और देवी-देवताओं का विरोध हुआ है — वह सिद्ध होती दिखेगी। संतों की यह अपेक्षा अब अखिलेश यादव के अयोध्या कार्यक्रम पर सबकी नज़र टिका देती है।
आगे क्या
अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे का अंतिम कार्यक्रम अभी तक सार्वजनिक नहीं हुआ है। संत समाज की अपेक्षाओं के बाद अब यह देखना होगा कि सपा मुखिया राम मंदिर जाने का निर्णय लेते हैं या नहीं — यह निर्णय उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे सकता है।