अखिलेश यादव का अयोध्या दौरा: इकबाल अंसारी बोले- राम का आशीर्वाद लेना सबका फर्ज, ट्रस्ट सदस्य ने कहा- राजनीति के लिए आ रहे हैं
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे की घोषणा के बाद 8 नवंबर 2026 को सियासी बयानबाजी का दौर तेज हो गया। बाबरी मस्जिद मामले के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने दौरे का स्वागत करते हुए कहा कि अयोध्या सबकी है और भगवान राम का आशीर्वाद लेना हर नागरिक का फर्ज है, जबकि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य स्वामी कमल नयन दास ने अखिलेश पर सीधा हमला बोलते हुए उनके दौरे को धर्म नहीं, राजनीति से प्रेरित बताया।
इकबाल अंसारी का स्वागत — 'राम की नगरी सबके लिए खुली है'
बाबरी मस्जिद मामले के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा, 'अयोध्या धर्म की नगरी है और भगवान राम और भगवान हनुमान का निवास स्थान है। सरयू नदी और इसकी सदियों पुरानी परंपराओं के साथ इस शहर का अपार धार्मिक महत्व है, जो देशभर से श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि अखिलेश यादव का अयोध्या आना अच्छी बात है और सभी को यहाँ आकर दर्शन और पूजा-अर्चना करनी चाहिए।
अंसारी ने आगे कहा कि यहाँ सबको क्षमा मिलती है, मुरादें पूरी होती हैं और जो भी आता है वह भगवान राम की शरण में आता है। उन्होंने अखिलेश यादव के दौरे को इसी भावना से देखने की अपील की।
ट्रस्ट सदस्य का पलटवार — 'कारसेवक माफ नहीं करेंगे'
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य स्वामी कमल नयन दास ने कड़े शब्दों में कहा कि कारसेवक अखिलेश यादव को कभी माफ नहीं करेंगे। उन्होंने कहा, 'जो अपने पिता के नहीं हुए, वो कारसेवकों के क्या होंगे। मुलायम सिंह यादव ने सपा को खड़ा किया, लेकिन अखिलेश ने उनका बुढ़ापे में किस तरह अपमान किया — वह सबने देखा।' स्वामी कमल नयन दास ने साफ कहा कि अखिलेश दर्शन करने नहीं, बल्कि राजनीति करने अयोध्या आ रहे हैं।
सोनिया गांधी के बयान पर पूर्व पक्षकार की प्रतिक्रिया
कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के बाबरी मस्जिद विध्वंस पर दिए बयान पर इकबाल अंसारी ने कहा कि यह मामला अब बहुत पुराना हो चुका है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपना फैसला सुना दिया है और देशभर के मुसलमानों ने उस फैसले का सम्मान किया है। अंसारी के अनुसार यह विषय अब किसी के लिए भी प्रासंगिक नहीं रह गया है।
पूर्व कारसेवक की विवादित टिप्पणी
पूर्व कारसेवक संतोष दुबे ने सोनिया गांधी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बाबरी मस्जिद विध्वंस के लिए उनका अपना परिवार जिम्मेदार था — उनके पति राजीव गांधी, उनकी सास इंदिरा गांधी, कांग्रेस पार्टी और तत्कालीन प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव की भूमिका का उन्होंने उल्लेख किया। हालांकि, दुबे ने सोनिया गांधी के प्रति एक अत्यंत आपत्तिजनक टिप्पणी भी की, जो व्यापक रूप से निंदनीय मानी जा रही है। उनकी इस टिप्पणी की सामाजिक और राजनीतिक जगत में कड़ी आलोचना हो रही है।
इसके बाद संतोष दुबे ने कहा कि अयोध्या, रामलला और हनुमानगढ़ी सबकी हैं और राम के धाम में सबका स्वागत है। उन्होंने अखिलेश यादव के देरी से आने पर 'देर आए दुरुस्त आए' की भावना व्यक्त की।
क्या होगा आगे — राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावी सरगर्मियाँ तेज हो रही हैं और अयोध्या एक बार फिर राजनीतिक केंद्र बिंदु बन गई है। गौरतलब है कि राम मंदिर के निर्माण के बाद से विपक्षी नेताओं का अयोध्या दौरा सांकेतिक महत्व रखता है। अखिलेश यादव का यह दौरा सपा की सामाजिक और धार्मिक पहुँच के संदर्भ में देखा जा रहा है, वहीं सत्ता पक्ष इसे राजनीतिक अवसरवाद करार दे रहा है।