8 नवंबर 2026
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अखिलेश यादव का अयोध्या दौरा: इकबाल अंसारी बोले- राम का आशीर्वाद लेना सबका फर्ज, ट्रस्ट सदस्य ने कहा- राजनीति के लिए आ रहे हैं

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अखिलेश यादव का अयोध्या दौरा: इकबाल अंसारी बोले- राम का आशीर्वाद लेना सबका फर्ज, ट्रस्ट सदस्य ने कहा- राजनीति के लिए आ रहे हैं

सारांश

अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे ने धर्म और राजनीति की बहस फिर छेड़ दी है। इकबाल अंसारी ने खुले दिल से स्वागत किया, तो ट्रस्ट सदस्य ने इसे 'राजनीतिक पर्यटन' बताया। यूपी की चुनावी जमीन पर यह दौरा सपा की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

मुख्य बातें

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे की घोषणा के बाद 8 नवंबर 2026 को सियासी बयानबाजी तेज हुई।
बाबरी मामले के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने दौरे का स्वागत किया — कहा, 'भगवान राम का आशीर्वाद लेना सबका फर्ज।' श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट सदस्य स्वामी कमल नयन दास ने कहा — अखिलेश दर्शन नहीं, राजनीति करने आ रहे हैं; कारसेवक माफ नहीं करेंगे।
इकबाल अंसारी ने सोनिया गांधी के बाबरी बयान को अप्रासंगिक बताया — कहा, सुप्रीम कोर्ट का फैसला देशभर के मुसलमानों ने माना।
पूर्व कारसेवक संतोष दुबे ने सोनिया गांधी पर विवादित और आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिसकी व्यापक आलोचना हो रही है।

समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे की घोषणा के बाद 8 नवंबर 2026 को सियासी बयानबाजी का दौर तेज हो गया। बाबरी मस्जिद मामले के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने दौरे का स्वागत करते हुए कहा कि अयोध्या सबकी है और भगवान राम का आशीर्वाद लेना हर नागरिक का फर्ज है, जबकि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य स्वामी कमल नयन दास ने अखिलेश पर सीधा हमला बोलते हुए उनके दौरे को धर्म नहीं, राजनीति से प्रेरित बताया।

इकबाल अंसारी का स्वागत — 'राम की नगरी सबके लिए खुली है'

बाबरी मस्जिद मामले के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा, 'अयोध्या धर्म की नगरी है और भगवान राम और भगवान हनुमान का निवास स्थान है। सरयू नदी और इसकी सदियों पुरानी परंपराओं के साथ इस शहर का अपार धार्मिक महत्व है, जो देशभर से श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि अखिलेश यादव का अयोध्या आना अच्छी बात है और सभी को यहाँ आकर दर्शन और पूजा-अर्चना करनी चाहिए।

अंसारी ने आगे कहा कि यहाँ सबको क्षमा मिलती है, मुरादें पूरी होती हैं और जो भी आता है वह भगवान राम की शरण में आता है। उन्होंने अखिलेश यादव के दौरे को इसी भावना से देखने की अपील की।

ट्रस्ट सदस्य का पलटवार — 'कारसेवक माफ नहीं करेंगे'

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य स्वामी कमल नयन दास ने कड़े शब्दों में कहा कि कारसेवक अखिलेश यादव को कभी माफ नहीं करेंगे। उन्होंने कहा, 'जो अपने पिता के नहीं हुए, वो कारसेवकों के क्या होंगे। मुलायम सिंह यादव ने सपा को खड़ा किया, लेकिन अखिलेश ने उनका बुढ़ापे में किस तरह अपमान किया — वह सबने देखा।' स्वामी कमल नयन दास ने साफ कहा कि अखिलेश दर्शन करने नहीं, बल्कि राजनीति करने अयोध्या आ रहे हैं।

सोनिया गांधी के बयान पर पूर्व पक्षकार की प्रतिक्रिया

कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के बाबरी मस्जिद विध्वंस पर दिए बयान पर इकबाल अंसारी ने कहा कि यह मामला अब बहुत पुराना हो चुका है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपना फैसला सुना दिया है और देशभर के मुसलमानों ने उस फैसले का सम्मान किया है। अंसारी के अनुसार यह विषय अब किसी के लिए भी प्रासंगिक नहीं रह गया है।

पूर्व कारसेवक की विवादित टिप्पणी

पूर्व कारसेवक संतोष दुबे ने सोनिया गांधी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बाबरी मस्जिद विध्वंस के लिए उनका अपना परिवार जिम्मेदार था — उनके पति राजीव गांधी, उनकी सास इंदिरा गांधी, कांग्रेस पार्टी और तत्कालीन प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव की भूमिका का उन्होंने उल्लेख किया। हालांकि, दुबे ने सोनिया गांधी के प्रति एक अत्यंत आपत्तिजनक टिप्पणी भी की, जो व्यापक रूप से निंदनीय मानी जा रही है। उनकी इस टिप्पणी की सामाजिक और राजनीतिक जगत में कड़ी आलोचना हो रही है।

इसके बाद संतोष दुबे ने कहा कि अयोध्या, रामलला और हनुमानगढ़ी सबकी हैं और राम के धाम में सबका स्वागत है। उन्होंने अखिलेश यादव के देरी से आने पर 'देर आए दुरुस्त आए' की भावना व्यक्त की।

क्या होगा आगे — राजनीतिक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावी सरगर्मियाँ तेज हो रही हैं और अयोध्या एक बार फिर राजनीतिक केंद्र बिंदु बन गई है। गौरतलब है कि राम मंदिर के निर्माण के बाद से विपक्षी नेताओं का अयोध्या दौरा सांकेतिक महत्व रखता है। अखिलेश यादव का यह दौरा सपा की सामाजिक और धार्मिक पहुँच के संदर्भ में देखा जा रहा है, वहीं सत्ता पक्ष इसे राजनीतिक अवसरवाद करार दे रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उत्तर प्रदेश की बदलती चुनावी जमीन पर सपा की पुनर्स्थापना की कोशिश है। विरोधाभास यह है कि जो पूर्व पक्षकार दशकों तक इस विवाद के केंद्र में रहे, वही अंसारी सबसे उदार स्वर में बोल रहे हैं, जबकि ट्रस्ट सदस्य राजनीतिक अवसरवाद का आरोप लगा रहे हैं। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि राम मंदिर के उद्घाटन के बाद विपक्ष का यह 'दर्शन-कूटनीति' का दौर नई राजनीतिक भाषा गढ़ रहा है — जहाँ हिंदू प्रतीकों को अपनाने की होड़ में धर्म और लोकतंत्र की सीमाएँ धुंधली हो रही हैं।
RashtraPress
8 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अखिलेश यादव अयोध्या क्यों जा रहे हैं?
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अयोध्या दौरे की घोषणा की है, जिसे धार्मिक यात्रा के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। हालांकि, ट्रस्ट सदस्य स्वामी कमल नयन दास ने इसे राजनीतिक प्रेरित बताया है।
इकबाल अंसारी ने अखिलेश के दौरे पर क्या कहा?
बाबरी मस्जिद मामले के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने दौरे का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि अयोध्या सबकी है, यहाँ आकर भगवान राम का आशीर्वाद लेना सबका फर्ज है और राम के धाम में सबको माफी और आशीर्वाद मिलता है।
श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट के सदस्य ने क्या आपत्ति जताई?
ट्रस्ट सदस्य स्वामी कमल नयन दास ने कहा कि कारसेवक अखिलेश यादव को कभी माफ नहीं करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश दर्शन के लिए नहीं, बल्कि राजनीतिक उद्देश्यों से अयोध्या आ रहे हैं।
सोनिया गांधी के बाबरी बयान पर इकबाल अंसारी ने क्या कहा?
इकबाल अंसारी ने कहा कि बाबरी मस्जिद मामला अब बहुत पुराना हो चुका है और सर्वोच्च न्यायालय अपना फैसला सुना चुका है। उन्होंने कहा कि देशभर के मुसलमानों ने उस फैसले का सम्मान किया है और यह विषय अब प्रासंगिक नहीं रह गया।
पूर्व कारसेवक संतोष दुबे का बयान विवादित क्यों है?
संतोष दुबे ने सोनिया गांधी पर अत्यंत आपत्तिजनक और व्यक्तिगत टिप्पणी की, जिसकी राजनीतिक और सामाजिक जगत में व्यापक निंदा हो रही है। इस तरह की भाषा को असंवैधानिक और अशोभनीय माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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