साजिद रशीदी का अखिलेश और सोनिया पर हमला: 'मुसलमान अब अवसरवाद की राजनीति पहचान चुका है'
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के प्रमुख मौलाना साजिद रशीदी ने 7 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी पर तीखा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की आहट सुनकर अखिलेश यादव का अयोध्या स्थित राम मंदिर जाने का प्रस्तावित दौरा महज चुनावी अवसरवाद है।
अखिलेश पर रशीदी के आरोप
मौलाना रशीदी ने कहा कि अखिलेश यादव स्वयं मीडिया और सोशल मीडिया पर यह कहते आए हैं कि वे किसी देवी-देवता में आस्था नहीं रखते। उन्होंने सवाल उठाया कि जो व्यक्ति वर्षों तक राम मंदिर नहीं गया, वह अब चुनाव से ठीक पहले वहाँ क्यों जा रहा है। रशीदी ने समाजवादी पार्टी के उस नारे पर भी कड़ा एतराज जताया जिसमें 'भगवान कृष्ण को लाने' की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि जिन्हें करोड़ों लोग ईश्वर मानकर पूजते हैं, उनके बारे में 'लाने' जैसी भाषा का प्रयोग अत्यंत आपत्तिजनक और ओछी हरकत है।
उन्होंने मुलायम सिंह यादव की एक पुरानी कहावत का हवाला देते हुए कहा कि 'जो पिता का न हुआ, वह किसी का नहीं हो सकता।' रशीदी के अनुसार, अखिलेश यादव का आजम खान से जेल में मिलना और सपा नेताओं का आजम खान को गृहमंत्री बनाने की बात करना — यह सब राजनीतिक अवसरवाद की कड़ियाँ हैं।
मुस्लिम समुदाय को रशीदी का संदेश
मौलाना रशीदी ने दावा किया कि मुस्लिम मतदाता अब इस 'अवसरवादी राजनीति' को भलीभाँति समझ चुके हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अखिलेश यादव का यही अवसरवाद 2027 के विधानसभा चुनाव में उनके लिए राजनीतिक नुकसान का कारण बनेगा।
सोनिया गांधी पर तंज
कांग्रेस की संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा बाबरी मस्जिद विध्वंस का दृश्य देखकर रोने की टिप्पणी पर मौलाना रशीदी ने तीखा व्यंग्य किया। उन्होंने कहा कि यह 'मगरमच्छ के आँसू' हैं, क्योंकि 1992 में जब बाबरी मस्जिद गिराई गई, उस समय केंद्र में सरकार कांग्रेस की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने न तो मस्जिद बचाने का प्रयास किया, न विध्वंस के दोषियों को सजा दिलाने के लिए कोई ठोस कदम उठाया — यहाँ तक कि 2014 तक सत्ता में रहने के बावजूद।
उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के उस उल्लेख का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि 1992 में बाबरी मस्जिद को गैरकानूनी तरीके से गिराया गया था। रशीदी के अनुसार, यदि कांग्रेस सरकार चाहती, तो संवैधानिक तरीके से दोषियों पर कार्रवाई और मस्जिद का पुनर्निर्माण दोनों संभव थे।
कांग्रेस के समक्ष रशीदी की 'शर्तें'
रशीदी ने कहा कि यदि कांग्रेस मुस्लिम समुदाय का विश्वास फिर से अर्जित करना चाहती है, तो उसे बाबरी मस्जिद पुनर्निर्माण का वादा करना होगा, विध्वंस में शामिल लोगों के खिलाफ सत्ता में आने पर कड़ी कार्रवाई का आश्वासन देना होगा और उत्तर प्रदेश में किसी मुस्लिम को मुख्यमंत्री बनाने की प्रतिबद्धता जतानी होगी। उन्होंने कहा कि यह बाबरी मस्जिद मुस्लिम समुदाय के लिए इतना गहरा घाव है कि वे इसे भुला नहीं सकते।
आलोचकों का कहना है कि रशीदी के इस बयान का राजनीतिक संदर्भ 2027 के उत्तर प्रदेश चुनाव की रणनीतिक हलचल से जुड़ा है, जब विभिन्न दल अपनी-अपनी सामाजिक गोलबंदी में जुटे हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में हिंदू-मुस्लिम समीकरण को लेकर चुनावी बयानबाजी तेज होती जा रही है।