21 अक्टूबर 2026
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अखिलेश यादव का रामपुर दौरा मुस्लिम वोट साधने की कवायद: मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी

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अखिलेश यादव का रामपुर दौरा मुस्लिम वोट साधने की कवायद: मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी

सारांश

चुनाव से पहले अखिलेश यादव का रामपुर दौरा — मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी की नज़र में यह मुस्लिम वोट साधने की देर से उठाई गई कोशिश है। साथ ही दिल्ली की मस्जिदों को मिले सात दिन के नोटिस ने मुस्लिम समुदाय में बेचैनी बढ़ा दी है।

मुख्य बातें

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने 21 अक्टूबर 2026 को अखिलेश यादव के रामपुर दौरे को चुनाव से पहले मुस्लिम वोट साधने की कवायद बताया।
मौलाना का दावा — मुस्लिम समाज समाजवादी पार्टी से नाराज़ है और इस दौरे से पार्टी को खास चुनावी फ़ायदा नहीं मिलेगा।
दिल्ली में रेस कोर्स मस्जिद , चाणक्यपुरी मस्जिद और दरगाह शाह जिलानी मियां को कथित तौर पर 7 दिन में परिसर खाली करने का नोटिस मिला।
मौलाना ने पूजा स्थल अधिनियम, 1991 का हवाला देते हुए धार्मिक स्थलों की सुरक्षा की अपील की।
RSS प्रमुख मोहन भागवत की मस्जिदों के नीचे मंदिर न तलाशने वाली टिप्पणी का भी उल्लेख किया गया।

बरेली के著名 इस्लामी विद्वान मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने 21 अक्टूबर 2026 को समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के रामपुर दौरे पर कड़ी टिप्पणी की। उनका आरोप है कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आजम खान से मुलाकात का यह कदम मुस्लिम मतदाताओं को रिझाने की राजनीतिक चाल से अधिक कुछ नहीं है। मौलाना ने दावा किया कि मुस्लिम समाज समाजवादी पार्टी से पहले से नाराज़ है और इस तरह की कवायद चुनावी नतीजों पर कोई उल्लेखनीय असर नहीं डालेगी।

अखिलेश के रामपुर दौरे पर आरोप

मौलाना रजवी बरेलवी ने कहा कि अखिलेश यादव ने मुश्किल वक्त में आजम खान के साथ खड़े होने में देरी की, और अब चुनाव नज़दीक आते ही उनसे मिलने रामपुर पहुँच रहे हैं। उन्होंने तंज़ कसते हुए कहा कि स्थानीय लोग इस दौरे पर कह रहे हैं — 'बहुत देर कर दी मेहरबां आते-आते।' मौलाना के अनुसार, आजम खान ने समाजवादी पार्टी को मज़बूत करने में अहम भूमिका निभाई, लेकिन उनके कठिन दौर में पार्टी नेतृत्व का रवैया सवालों के घेरे में रहा।

आजम खान का घटता प्रभाव

मौलाना ने रामपुर के पिछले चुनावी नतीजों का हवाला देते हुए कहा कि आजम खान का मुस्लिम मतदाताओं पर एकछत्र प्रभाव अब वैसा नहीं रहा जैसा पहले माना जाता था। उनके अनुसार, मुस्लिम वोटर अब अपने विवेक और ज़मीनी मुद्दों के आधार पर फ़ैसला करते हैं, न कि किसी नेता की अपील पर। इसलिए इस मुलाकात से SP को अपेक्षित चुनावी लाभ मिलने की संभावना कम है।

दिल्ली की मस्जिदों को नोटिस पर चिंता

मौलाना ने दूसरे अहम मुद्दे पर भी चिंता जताई — दिल्ली में रेस कोर्स मस्जिद (जो प्रधानमंत्री आवास के निकट बताई जाती है), चाणक्यपुरी की एक मस्जिद और दरगाह शाह जिलानी मियां को कथित तौर पर नोटिस दिए जाने की बात सामने आई है। कहा जा रहा है कि नोटिस में सात दिनों के भीतर परिसर खाली करने को कहा गया है। मौलाना ने बताया कि इस नोटिस के बाद स्थानीय लोगों के साथ-साथ देशभर के मुसलमानों में आशंका और बेचैनी है।

पूजा स्थल अधिनियम और ऐतिहासिक संदर्भ

मौलाना रजवी बरेलवी ने पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 का हवाला दिया, जिसके तहत 15 अगस्त 1947 को धार्मिक स्थलों की जो स्थिति थी, उसे बनाए रखने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि देश में कई मस्जिदें 200, 300, 500 और 700 साल पुरानी हैं, इसके बावजूद उन्हें निशाना बनाए जाने की आशंका जताई जा रही है। उन्होंने उज्जैन और सहारनपुर की मस्जिदों से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया।

भागवत की टिप्पणी और सांप्रदायिक सद्भाव की अपील

मौलाना ने यह भी उल्लेख किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत भी मस्जिदों के नीचे मंदिर तलाशने की प्रवृत्ति से बचने की बात कह चुके हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से अपील की कि मस्जिदों, मज़ारों, दरगाहों और कब्रिस्तानों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। मौलाना ने ज़ोर दिया कि देश की तरक्की और स्थिरता के लिए सभी समुदायों की समान भागीदारी ज़रूरी है और धार्मिक स्थलों के मुद्दे पर तनाव बढ़ने से देश को नुकसान होगा। आने वाले चुनाव में इन मुद्दों का राजनीतिक असर देखने को मिल सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस व्यापक पैटर्न पर है जिसमें पार्टियाँ मुस्लिम नेताओं को मुश्किल वक्त में अकेला छोड़ती हैं और चुनाव आते ही उनकी देहरी पर पहुँच जाती हैं। आजम खान जैसे वरिष्ठ नेता के साथ कथित उदासीनता और अब रामपुर दौरा — यह विरोधाभास SP की मुस्लिम राजनीति की विश्वसनीयता पर गहरा सवाल खड़ा करता है। दूसरी तरफ, दिल्ली की मस्जिदों को नोटिस का मुद्दा उस बड़े तनाव का हिस्सा है जो देशभर में धार्मिक स्थलों की पहचान और सुरक्षा को लेकर बना हुआ है; पूजा स्थल अधिनियम अदालतों में बार-बार परखा जा रहा है। मुख्यधारा की कवरेज इन दोनों मुद्दों को अलग-अलग देखती है, जबकि मौलाना की प्रतिक्रिया यह बताती है कि UP के मुस्लिम मतदाता 2027 के चुनाव में एकजुट होकर किसी एक पार्टी के पीछे नहीं जाएँगे।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने अखिलेश यादव के रामपुर दौरे पर क्या कहा?
मौलाना ने कहा कि अखिलेश यादव का रामपुर दौरा विधानसभा चुनाव से पहले मुस्लिम मतदाताओं को लुभाने की राजनीतिक कोशिश है। उनका दावा है कि मुस्लिम समाज SP से नाराज़ है और इस दौरे से पार्टी को कोई खास फ़ायदा नहीं होगा।
आजम खान और अखिलेश यादव के बीच विवाद क्या है?
मौलाना के अनुसार, आजम खान ने SP को मज़बूत करने में अहम भूमिका निभाई, लेकिन उनके कठिन वक्त में पार्टी नेतृत्व उनके साथ मज़बूती से नहीं खड़ा हुआ। अब चुनाव नज़दीक आने पर अखिलेश यादव उनसे मिलने रामपुर जा रहे हैं, जिसे मौलाना देर से उठाया गया राजनीतिक कदम बताते हैं।
दिल्ली में मस्जिदों को नोटिस क्यों दिया गया?
मौलाना के बयान के अनुसार, दिल्ली में रेस कोर्स मस्जिद, चाणक्यपुरी की एक मस्जिद और दरगाह शाह जिलानी मियां को कथित तौर पर सात दिनों के भीतर परिसर खाली करने का नोटिस दिया गया है। नोटिस के कारणों की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
पूजा स्थल अधिनियम, 1991 से इन मामलों का क्या संबंध है?
पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 के तहत 15 अगस्त 1947 को जिस धार्मिक स्थल की जो स्थिति थी, उसे बनाए रखना अनिवार्य है। मौलाना ने इस कानून का हवाला देते हुए कहा कि सैकड़ों साल पुरानी मस्जिदों और दरगाहों को निशाना बनाना कानूनन सही नहीं है।
क्या आजम खान का रामपुर में अब भी मुस्लिम मतदाताओं पर वैसा प्रभाव है?
मौलाना रजवी बरेलवी का कहना है कि रामपुर के पिछले चुनावी नतीजों से साफ़ है कि आजम खान का पहले जैसा एकछत्र प्रभाव अब नहीं रहा। मुस्लिम मतदाता अब अपने विवेक से फ़ैसला करते हैं, इसलिए अखिलेश यादव की इस मुलाकात से अपेक्षित चुनावी लाभ मिलने की संभावना कम है।
राष्ट्र प्रेस
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