अखिलेश यादव का रामपुर दौरा मुस्लिम वोट साधने की कवायद: मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी
सारांश
मुख्य बातें
बरेली के著名 इस्लामी विद्वान मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने 21 अक्टूबर 2026 को समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के रामपुर दौरे पर कड़ी टिप्पणी की। उनका आरोप है कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आजम खान से मुलाकात का यह कदम मुस्लिम मतदाताओं को रिझाने की राजनीतिक चाल से अधिक कुछ नहीं है। मौलाना ने दावा किया कि मुस्लिम समाज समाजवादी पार्टी से पहले से नाराज़ है और इस तरह की कवायद चुनावी नतीजों पर कोई उल्लेखनीय असर नहीं डालेगी।
अखिलेश के रामपुर दौरे पर आरोप
मौलाना रजवी बरेलवी ने कहा कि अखिलेश यादव ने मुश्किल वक्त में आजम खान के साथ खड़े होने में देरी की, और अब चुनाव नज़दीक आते ही उनसे मिलने रामपुर पहुँच रहे हैं। उन्होंने तंज़ कसते हुए कहा कि स्थानीय लोग इस दौरे पर कह रहे हैं — 'बहुत देर कर दी मेहरबां आते-आते।' मौलाना के अनुसार, आजम खान ने समाजवादी पार्टी को मज़बूत करने में अहम भूमिका निभाई, लेकिन उनके कठिन दौर में पार्टी नेतृत्व का रवैया सवालों के घेरे में रहा।
आजम खान का घटता प्रभाव
मौलाना ने रामपुर के पिछले चुनावी नतीजों का हवाला देते हुए कहा कि आजम खान का मुस्लिम मतदाताओं पर एकछत्र प्रभाव अब वैसा नहीं रहा जैसा पहले माना जाता था। उनके अनुसार, मुस्लिम वोटर अब अपने विवेक और ज़मीनी मुद्दों के आधार पर फ़ैसला करते हैं, न कि किसी नेता की अपील पर। इसलिए इस मुलाकात से SP को अपेक्षित चुनावी लाभ मिलने की संभावना कम है।
दिल्ली की मस्जिदों को नोटिस पर चिंता
मौलाना ने दूसरे अहम मुद्दे पर भी चिंता जताई — दिल्ली में रेस कोर्स मस्जिद (जो प्रधानमंत्री आवास के निकट बताई जाती है), चाणक्यपुरी की एक मस्जिद और दरगाह शाह जिलानी मियां को कथित तौर पर नोटिस दिए जाने की बात सामने आई है। कहा जा रहा है कि नोटिस में सात दिनों के भीतर परिसर खाली करने को कहा गया है। मौलाना ने बताया कि इस नोटिस के बाद स्थानीय लोगों के साथ-साथ देशभर के मुसलमानों में आशंका और बेचैनी है।
पूजा स्थल अधिनियम और ऐतिहासिक संदर्भ
मौलाना रजवी बरेलवी ने पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 का हवाला दिया, जिसके तहत 15 अगस्त 1947 को धार्मिक स्थलों की जो स्थिति थी, उसे बनाए रखने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि देश में कई मस्जिदें 200, 300, 500 और 700 साल पुरानी हैं, इसके बावजूद उन्हें निशाना बनाए जाने की आशंका जताई जा रही है। उन्होंने उज्जैन और सहारनपुर की मस्जिदों से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया।
भागवत की टिप्पणी और सांप्रदायिक सद्भाव की अपील
मौलाना ने यह भी उल्लेख किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत भी मस्जिदों के नीचे मंदिर तलाशने की प्रवृत्ति से बचने की बात कह चुके हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से अपील की कि मस्जिदों, मज़ारों, दरगाहों और कब्रिस्तानों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। मौलाना ने ज़ोर दिया कि देश की तरक्की और स्थिरता के लिए सभी समुदायों की समान भागीदारी ज़रूरी है और धार्मिक स्थलों के मुद्दे पर तनाव बढ़ने से देश को नुकसान होगा। आने वाले चुनाव में इन मुद्दों का राजनीतिक असर देखने को मिल सकता है।