मौलाना रजवी का इंडिया गठबंधन पर हमला: 'बैठक में मुसलमान गायब', राहुल को अखिलेश से सावधान रहने की सलाह
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने 9 जून को बरेली से 'इंडिया' गठबंधन की हालिया बैठक पर कड़े सवाल उठाए, आरोप लगाया कि बैठक और उसके बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुसलमानों के हित और उनसे जुड़े मुद्दे पूरी तरह नज़रअंदाज़ किए गए। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव पर भरोसा न करने की खुली सलाह दी।
बैठक पर मुख्य आपत्तियाँ
मौलाना रजवी ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा, 'इंडिया गठबंधन की बैठक से मुसलमान बिल्कुल गायब था। जब प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई तो वहाँ मुसलमान के हितों को नज़रअंदाज़ करके उन लोगों ने अपने हितों की बात की।' उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सांप्रदायिकता पर चोट करने और नफ़रत के खिलाफ मोहब्बत का पैगाम देने जैसे अहम विषय गठबंधन के एजेंडे से नदारद थे।
यह ऐसे समय में आया है जब 'इंडिया' गठबंधन 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले अपनी रणनीति को धार देने की कोशिश में जुटा है। मुस्लिम नेताओं की इस तरह की आलोचना गठबंधन के भीतर बढ़ते असंतोष का संकेत मानी जा रही है।
अखिलेश यादव पर निशाना
मौलाना रजवी ने समाजवादी पार्टी के रवैये पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि सपा ने छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान के विधानसभा चुनावों में मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में उम्मीदवार उतारकर कांग्रेस को भारी नुकसान पहुँचाया था। उनके अनुसार, इसी कारण इन तीनों राज्यों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनी।
उन्होंने कहा, 'अखिलेश यादव जिस अंदाज़ में राहुल गांधी से हाथ मिला रहे थे, मैं कांग्रेस पार्टी को याद दिलाना चाहता हूँ कि समाजवादी पार्टी ने छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान के विधानसभा चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारे थे।' गौरतलब है कि उन चुनावों में सपा की उपस्थिति ने विपक्षी वोट विभाजित करने में भूमिका निभाई थी।
कांग्रेस को सीधी चेतावनी
मौलाना रजवी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'अखिलेश यादव पर भरोसा नहीं किया जा सकता।' उन्होंने कांग्रेस को सलाह दी कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए सपा के साथ गठबंधन पर पुनर्विचार किया जाए, क्योंकि उनके अनुसार अखिलेश यादव 'वक्त के मुताबिक तरह-तरह के रंग बदलेंगे।'
यह बयान ऐसे वक्त आया है जब कांग्रेस और सपा के बीच 2027 के लिए संभावित गठबंधन की चर्चाएँ जारी हैं। मौलाना रजवी की यह टिप्पणी विपक्षी एकता की कोशिशों के बीच एक नई दरार की ओर इशारा करती है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मुस्लिम नेताओं का 'इंडिया' गठबंधन से इस तरह का मोहभंग गठबंधन के लिए एक चेतावनी है। आलोचकों का कहना है कि यदि गठबंधन अल्पसंख्यक समुदाय की चिंताओं को एजेंडे में शामिल नहीं करता, तो उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में उसका जनाधार कमज़ोर पड़ सकता है।
आगे देखना होगा कि कांग्रेस और सपा मौलाना रजवी की इस सार्वजनिक आलोचना पर किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं और क्या 'इंडिया' गठबंधन अपनी रणनीति में बदलाव लाता है।