18 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी का बड़ा बयान: भारत में मुसलमान आज़ाद, डर की राजनीति छोड़ें

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी का बड़ा बयान: भारत में मुसलमान आज़ाद, डर की राजनीति छोड़ें

सारांश

बरेली से एक असामान्य आवाज़ — ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने मुस्लिम समाज को डर की राजनीति छोड़ने और शिक्षा-रोज़गार को प्राथमिकता देने की अपील की। साथ ही विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वे मुसलमानों का राजनीतिक इस्तेमाल करते हैं।

मुख्य बातें

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने 18 अगस्त को बरेली में कहा कि भारत में मुसलमान धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियाँ स्वतंत्र रूप से कर रहे हैं।
उन्होंने मुस्लिम समाज में फैली 'डर की राजनीति' को नकारा और इसे कुछ राजनीतिक दलों द्वारा निर्मित बताया।
समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर आरोप लगाया कि वे मुस्लिम इलाकों में नकारात्मक माहौल बनाते हैं।
अखिलेश यादव , तेजस्वी यादव , शरद पवार , ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल से अपनी राजनीतिक ज़िम्मेदारी निभाने की अपील की।
मुस्लिम समाज से शिक्षा, रोज़गार और सकारात्मक राजनीतिक भागीदारी को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने 18 अगस्त को बरेली में मुस्लिम राजनीति पर एक स्पष्ट और साहसी बयान देते हुए कहा कि भारत में मुसलमान अपनी धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियाँ पूरी तरह स्वतंत्र रूप से कर रहे हैं। उन्होंने मुस्लिम समाज से अपील की कि वे नकारात्मक राजनीति और विरोध की मानसिकता से बाहर निकलकर शिक्षा, रोज़गार और सामाजिक विकास को प्राथमिकता दें।

मुख्य बयान और तर्क

मौलाना ने कहा कि मुस्लिम समाज में आमतौर पर यह धारणा बनाई जाती है कि 'मुसलमान परेशान है' और इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ज़िम्मेदार ठहराया जाता है। उन्होंने एक बुजुर्ग व्यक्ति से हुई बातचीत का उदाहरण देते हुए बताया कि जब उनसे परेशानी की असल वजह पूछी गई, तो वह कोई ठोस कारण नहीं बता सके।

मौलाना ने सवाल उठाया कि क्या किसी को पाँच वक्त की नमाज़ पढ़ने से रोका जाता है, क्या बच्चों को स्कूल भेजने पर पाबंदी है, या धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करने पर कोई प्रशासनिक रोक है। उन्होंने कहा कि जब ऐसा कोई अनुभव सामने नहीं आता, तो लगातार भय का माहौल बनाना उचित नहीं है।

विपक्षी दलों पर निशाना

मौलाना ने कथित तौर पर समाजवादी पार्टी और उसके प्रमुख अखिलेश यादव पर आरोप लगाया कि कुछ 'सेक्युलर' राजनीतिक दल मुस्लिम इलाकों में जाकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खिलाफ नकारात्मक माहौल बनाते हैं, जिसका असर मुस्लिम समाज की राजनीतिक सोच पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, शरद पवार, ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल जैसे विपक्षी नेताओं को भी अपनी राजनीतिक ज़िम्मेदारी निभानी चाहिए — BJP का मुकाबला करने का बोझ केवल मुस्लिम मतदाताओं पर नहीं डाला जाना चाहिए।

उन्होंने मुलायम सिंह यादव और कल्याण सिंह के दौर की राजनीति का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के BJP के साथ अलग-अलग समय पर राजनीतिक समीकरण बने हैं। उन्होंने मुस्लिम समाज से अपील की कि किसी भी दल का समर्थन या विरोध केवल भावनात्मक आधार पर नहीं होना चाहिए।

राजनीतिक लाभ और नुकसान का विश्लेषण

मौलाना ने कहा कि पिछले कई वर्षों से BJP-विरोध की राजनीति पर ज़ोर दिया गया, लेकिन इसका राजनीतिक लाभ कथित तौर पर अन्य दलों को मिला जबकि मुस्लिम समाज को अपेक्षित राजनीतिक फायदा नहीं हुआ। यह ऐसे समय में आया है जब मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज़ हो रही है।

आम जनता पर असर और आगे की राह

मौलाना ने ज़ोर देकर कहा कि भारत मुसलमानों की भी मातृभूमि है और उनके पूर्वजों की ज़मीन है। इसलिए किसी के डर में रहने की ज़रूरत नहीं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक सत्ता स्थायी नहीं होती और समय के साथ बदलती रहती है। मुस्लिम समाज को आने वाली पीढ़ी के भविष्य को ध्यान में रखते हुए शिक्षा, रोज़गार और सकारात्मक राजनीतिक भागीदारी को प्राथमिकता देनी चाहिए। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियाँ तेज़ हैं और मुस्लिम समुदाय के भीतर नेतृत्व की दिशा पर बहस जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या यह केवल एक व्यक्तिगत बयान बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने मुस्लिम समाज से क्या अपील की?
मौलाना ने मुस्लिम समाज से डर और नकारात्मक राजनीति छोड़कर शिक्षा, रोज़गार और सकारात्मक राजनीतिक भागीदारी को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत में मुसलमान अपनी धार्मिक और सामाजिक गतिविधियाँ स्वतंत्र रूप से कर रहे हैं, इसलिए भय का माहौल बनाना उचित नहीं।
मौलाना रजवी ने समाजवादी पार्टी पर क्या आरोप लगाए?
मौलाना ने कथित तौर पर आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी जैसे 'सेक्युलर' दल मुस्लिम इलाकों में जाकर BJP के खिलाफ नकारात्मक माहौल बनाते हैं और इसका राजनीतिक लाभ खुद उठाते हैं जबकि मुस्लिम समाज को अपेक्षित फायदा नहीं मिलता।
मौलाना ने किन विपक्षी नेताओं का नाम लिया?
मौलाना ने अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, शरद पवार, ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल का नाम लेते हुए कहा कि BJP का राजनीतिक मुकाबला करने की ज़िम्मेदारी केवल मुस्लिम मतदाताओं पर नहीं डाली जानी चाहिए।
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात क्या है और मौलाना रजवी कौन हैं?
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात एक राष्ट्रीय मुस्लिम संगठन है। मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और बरेली से सक्रिय हैं। वे बरेलवी इस्लामी परंपरा से जुड़े एक प्रमुख धार्मिक-सामाजिक व्यक्तित्व हैं।
मौलाना रजवी के अनुसार मुस्लिम समाज को राजनीतिक दिशा कैसे तय करनी चाहिए?
मौलाना ने कहा कि मुस्लिम समाज को किसी भी दल का समर्थन या विरोध भावनात्मक आधार पर नहीं, बल्कि उस दल के इतिहास और व्यवहार को समझकर करना चाहिए। आने वाली पीढ़ी के भविष्य को ध्यान में रखते हुए शिक्षा और रोज़गार के मुद्दों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 12 महीने पहले
  8. 1 साल पहले