22 सितंबर 2026
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अखिलेश यादव 'सॉफ्ट हिंदुत्व' की राह पर: मौलाना रजवी बोले — मुसलमानों को बंधुआ मजदूर समझती है सपा

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अखिलेश यादव 'सॉफ्ट हिंदुत्व' की राह पर: मौलाना रजवी बोले — मुसलमानों को बंधुआ मजदूर समझती है सपा

सारांश

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना रजवी ने अखिलेश यादव पर सीधा हमला बोला — आरोप है कि सपा 2027 की सत्ता के लिए 'सॉफ्ट हिंदुत्व' की राह चुन रही है और मुसलमानों को 'बंधुआ मजदूर' की तरह ट्रीट कर रही है। बाबरी, ज्ञानवापी, वक्फ बिल — हर बड़े मुस्लिम मुद्दे पर अखिलेश की खामोशी को रजवी ने सबूत के तौर पर पेश किया।

मुख्य बातें

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने 22 सितंबर 2026 को बरेली में अखिलेश यादव पर 'सॉफ्ट हिंदुत्व' अपनाने का आरोप लगाया।
रजवी ने कहा कि सपा मुसलमानों को 'बंधुआ मजदूर' समझती है और उन्हें 2027 में वापस लौटने की उम्मीद रखती है।
अखिलेश यादव पर बाबरी मस्जिद, ज्ञानवापी, शाही ईदगाह मथुरा, संभल घटना और वक्फ संशोधन विधेयक पर चुप्पी का आरोप।
मौलाना ने इटली की PM जॉर्जिया मेलोनी के हिजाब-प्रतिबंध बयान की आलोचना की और स्वीडन के उदाहरण से चेतावनी दी।
समाजवादी पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं।

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने 22 सितंबर 2026 को बरेली में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर कड़े आरोप लगाए। उनका कहना है कि अखिलेश 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सत्ता हासिल करने के लिए 'सॉफ्ट हिंदुत्व' की रणनीति अपना रहे हैं और मुस्लिम मुद्दों पर जानबूझकर मौन धारण किए हुए हैं।

मुख्य आरोप: सत्ता के लिए मुसलमानों की अनदेखी

मौलाना रजवी ने कहा, 'समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की सारी कोशिशें और संघर्ष 2027 में सत्ता पाने के लिए हैं। वह किसी भी तरह कुर्सी हासिल करना चाहते हैं। इसीलिए वह 'सॉफ्ट हिंदुत्व' की ओर बढ़ रहे हैं।'

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी मुसलमानों को अपना 'बंधुआ मजदूर' मानती है। उनके शब्दों में, 'उनको लगता है कि मुसलमान तो समाजवादी पार्टी के बंधुआ मजदूर हैं — वे कहाँ जाएँगे? आखिर में हमारे पास ही लौटकर आएँगे।'

मुस्लिम मुद्दों पर खामोशी का विस्तृत आरोप

मौलाना रजवी ने अखिलेश यादव की कथित चुप्पी के कई उदाहरण गिनाए। उनका आरोप है कि अखिलेश ने बाबरी मस्जिद, ज्ञानवापी मस्जिद, शाही ईदगाह मस्जिद मथुरा, संभल की घटना और वक्फ संशोधन विधेयक — किसी भी मुद्दे पर स्पष्ट बयान नहीं दिया।

उन्होंने कहा, 'जिस तरीके से उन्होंने मुसलमानों से दूरियाँ बढ़ाई हैं, वह सबके सामने है। वक्फ संशोधन बिल पर बिल्कुल चुप्पी साधे रहे।' यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में विपक्षी दलों के बीच मुस्लिम मतदाताओं को लेकर राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज़ होती जा रही है।

इटली और स्वीडन का संदर्भ: मेलोनी को चेतावनी

मौलाना रजवी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने अपनी पार्टी ब्रदर्स ऑफ इटली के एक कार्यक्रम में हिजाब पर प्रतिबंध लगाने की बात कही थी।

मौलाना ने स्वीडन का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ के प्रधानमंत्री मुसलमानों के खिलाफ बोलते रहे और विपक्ष की महिला नेता ने मुस्लिम अधिकारों की पैरवी की, जिसके बाद मुसलमानों ने एकजुट होकर उन्हें सफल बनाया और प्रधानमंत्री चुनाव हार गए। उन्होंने कहा, 'ऐसे ही इस्लामोफोबिया की शिकार हैं जॉर्जिया मेलोनी — बहुत जल्द इटली में चुनाव होने वाले हैं, वहाँ की जनता उन्हें मुँहतोड़ जवाब देगी।'

राजनीतिक पृष्ठभूमि और संदर्भ

गौरतलब है कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नज़दीक आ रहे हैं, समाजवादी पार्टी की रणनीति को लेकर मुस्लिम नेताओं और संगठनों में असंतोष की आवाज़ें उठने लगी हैं। यह पहली बार नहीं है जब किसी मुस्लिम धर्मगुरु ने सपा पर मुस्लिम मतदाताओं को 'हल्के में लेने' का आरोप लगाया हो।

मौलाना रजवी के इस बयान पर अभी तक अखिलेश यादव या समाजवादी पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

आगे क्या

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मुस्लिम धार्मिक नेताओं का यह बढ़ता असंतोष 2027 के चुनावी समीकरणों पर असर डाल सकता है। उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मतदाता लगभग 19-20% हैं और पारंपरिक रूप से सपा के मज़बूत समर्थक माने जाते हैं। यह देखना बाकी है कि मौलाना रजवी जैसे नेताओं की आलोचना का मतदाताओं पर कितना प्रभाव पड़ता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो 2027 में दोनों मोर्चों पर नुकसान उठाने का जोखिम है। मुख्यधारा की कवरेज इसे महज़ 'बयानबाजी' मानकर छोड़ देती है, पर असल सवाल यह है कि क्या यह असंतोष चुनाव तक संगठित राजनीतिक दबाव में बदलता है।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना रजवी ने अखिलेश यादव पर क्या आरोप लगाए?
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव 2027 के यूपी चुनाव में सत्ता पाने के लिए 'सॉफ्ट हिंदुत्व' की राजनीति कर रहे हैं और मुस्लिम मुद्दों पर जानबूझकर चुप रह रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सपा मुसलमानों को 'बंधुआ मजदूर' समझती है।
सपा की 'सॉफ्ट हिंदुत्व' रणनीति का क्या मतलब है?
मौलाना रजवी के अनुसार, इसका मतलब है कि अखिलेश यादव बाबरी मस्जिद, ज्ञानवापी, वक्फ संशोधन बिल जैसे संवेदनशील मुस्लिम मुद्दों पर चुप्पी साधकर हिंदू मध्यमार्गी मतदाताओं को आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं। यह रणनीति कथित तौर पर 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर अपनाई जा रही है।
मौलाना रजवी ने इटली की PM मेलोनी पर क्या कहा?
मौलाना रजवी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के हिजाब-प्रतिबंध के बयान की आलोचना की और स्वीडन का उदाहरण देकर चेतावनी दी कि इस्लामोफोबिया की राजनीति चुनाव में उल्टी पड़ती है। उन्होंने कहा कि जल्द होने वाले इटली के चुनावों में वहाँ की जनता मेलोनी को जवाब देगी।
क्या समाजवादी पार्टी ने इन आरोपों पर कोई जवाब दिया?
मौलाना रजवी के बयान पर अभी तक समाजवादी पार्टी या अखिलेश यादव की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
2027 यूपी चुनाव में मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका कितनी अहम है?
उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मतदाता लगभग 19-20% हैं और परंपरागत रूप से सपा के मज़बूत आधार माने जाते हैं। ऐसे में मुस्लिम धार्मिक नेतृत्व की नाराज़गी 2027 के चुनावी गणित पर असर डाल सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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