मौलाना शहाबुद्दीन रजवी का अखिलेश की लाल टोपी पर हमला — 'लाल निशान शैतान का'
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने 8 नवंबर 2026 को बरेली में समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव की लाल टोपी पर तीखी धार्मिक आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने मजहबी दृष्टिकोण से कहा कि लाल रंग इस्लाम में शुभ नहीं माना जाता, और अखिलेश का सफेद टोपी से किनारा करना इस बात का प्रतीक है कि वे अब मुस्लिम समुदाय के 'मसीहा' नहीं रहे।
मौलाना का बयान — धार्मिक संदर्भ क्या है
मौलाना रजवी ने कहा, 'लाल निशान शैतान का है। लाल निशान को अच्छा नहीं माना जाता और हम मजहबी नुक्ता-ए-नजर से यह बात करते हैं। पैगंबर-ए-इस्लाम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने लाल कपड़े की कोई भी चीज या लाल रंग की कोई भी चीज पसंद नहीं फरमाई। पैगंबर-ए-इस्लाम को सफेद रंग पसंद था।'
यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुस्लिम मतदाताओं को लेकर विभिन्न दलों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज बनी हुई है। मौलाना रजवी की टिप्पणी ने सपा और उसके नेतृत्व की मुस्लिम समुदाय से निकटता के दावे पर सवाल उठाया है।
अखिलेश पर सीधा निशाना — सफेद टोपी का सवाल
मौलाना रजवी ने याद दिलाया कि सात-आठ साल पहले तक अखिलेश यादव रमजान के इफ्तार कार्यक्रमों में सफेद टोपी और कंधे पर रूमाल डालकर मुस्लिम समुदाय के बीच जाते थे। उन्होंने कहा कि अब वे हमेशा लाल टोपी पहनते हैं और सफेद टोपी से जैसे नफरत हो गई हो।
रजवी ने एक और वाकये का उल्लेख किया — कि कुछ मुसलमान अखिलेश के पार्टी कार्यालय गए और उन्हें सफेद टोपी व शॉल भेंट की, जिसे अखिलेश ने हाथ में लेने से भी इनकार कर दिया और दूसरों को पहनाने का इशारा कर दिया। रजवी के अनुसार इससे 'हमारी पहचान, हमारी शिनाख्त बिल्कुल अलग-थलग है' — यह संदेश स्पष्ट होता है।
सोनिया गांधी की किताब और बाबरी मस्जिद प्रसंग
मौलाना शहाबुद्दीन ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की चर्चित आत्मकथात्मक किताब का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस समेत अपने जीवन के कई उतार-चढ़ाव का विस्तार से वर्णन किया है।
रजवी ने बताया कि आज से लगभग 15 साल पहले वे उलेमाओं और विद्वानों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ सोनिया गांधी से मिले थे। उस मुलाकात में सोनिया ने कथित तौर पर कहा था कि जब उन्हें पता चला और उन्होंने देखा कि बाबरी मस्जिद गिराई जा रही है, तो रातभर नींद नहीं आई और वे रोती रहीं।
मौलाना रजवी ने कहा कि यह बयान और सोनिया की किताब में लिखा वाकया उनकी 'इंसाफपसंदी, मानवता और अल्पसंख्यकों के प्रति हमदर्दी' का प्रमाण है। उन्होंने जोर दिया कि सोनिया गांधी चाहती हैं कि भारत में सांप्रदायिक सौहार्द बना रहे और सभी लोग मेल-मिलाप से जीवन बिताएं।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में सपा और मुस्लिम समुदाय के बीच समीकरण लंबे समय से राजनीतिक चर्चा का विषय रहा है। मौलाना रजवी की यह टिप्पणी सपा के 'मुस्लिम-पीवी' (पीड़ित-यादव) गठबंधन के दावे पर धार्मिक आधार पर की गई एक असामान्य आपत्ति है।
आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान धार्मिक पहचान को राजनीतिक पहचान की कसौटी बनाते हैं, जो चुनावी लोकतंत्र में विभाजनकारी हो सकता है। वहीं मौलाना रजवी के समर्थकों का तर्क है कि यह महज धार्मिक अवलोकन है, न कि राजनीतिक हमला।
आगे क्या
अब तक समाजवादी पार्टी की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इस पर होगी कि सपा नेतृत्व इस धार्मिक आपत्ति का जवाब देता है या चुप्पी साधता है — दोनों ही स्थितियाँ उत्तर प्रदेश की राजनीति में अलग-अलग संकेत देंगी।