8 नवंबर 2026
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मौलाना शहाबुद्दीन रजवी का अखिलेश की लाल टोपी पर हमला — 'लाल निशान शैतान का'

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मौलाना शहाबुद्दीन रजवी का अखिलेश की लाल टोपी पर हमला — 'लाल निशान शैतान का'

सारांश

बरेली में मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने अखिलेश यादव की लाल टोपी को इस्लामी दृष्टिकोण से 'शैतान का निशान' करार दिया और कहा कि अखिलेश ने सफेद टोपी से नाता तोड़कर मुस्लिम समुदाय से दूरी बना ली है। साथ ही सोनिया गांधी की किताब में बाबरी विध्वंस पर दी गई भावनात्मक प्रतिक्रिया की सराहना की।

मुख्य बातें

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने 8 नवंबर 2026 को बरेली में अखिलेश यादव की लाल टोपी को 'शैतान का निशान' बताया।
मौलाना के अनुसार पैगंबर-ए-इस्लाम को सफेद रंग पसंद था और लाल रंग मजहबी दृष्टि से उचित नहीं।
रजवी ने कहा कि सात-आठ साल पहले तक अखिलेश रमजान इफ्तार में सफेद टोपी पहनते थे, अब वे सफेद टोपी लेने से भी इनकार करते हैं।
सोनिया गांधी की किताब और 6 दिसंबर 1992 की बाबरी मस्जिद विध्वंस पर उनकी भावनात्मक प्रतिक्रिया को रजवी ने 'इंसाफपसंदी' का प्रमाण बताया।
मौलाना रजवी ने लगभग 15 साल पहले सोनिया गांधी से हुई मुलाकात का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने बाबरी विध्वंस पर रातभर रोने की बात कही थी।

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने 8 नवंबर 2026 को बरेली में समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव की लाल टोपी पर तीखी धार्मिक आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने मजहबी दृष्टिकोण से कहा कि लाल रंग इस्लाम में शुभ नहीं माना जाता, और अखिलेश का सफेद टोपी से किनारा करना इस बात का प्रतीक है कि वे अब मुस्लिम समुदाय के 'मसीहा' नहीं रहे।

मौलाना का बयान — धार्मिक संदर्भ क्या है

मौलाना रजवी ने कहा, 'लाल निशान शैतान का है। लाल निशान को अच्छा नहीं माना जाता और हम मजहबी नुक्ता-ए-नजर से यह बात करते हैं। पैगंबर-ए-इस्लाम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने लाल कपड़े की कोई भी चीज या लाल रंग की कोई भी चीज पसंद नहीं फरमाई। पैगंबर-ए-इस्लाम को सफेद रंग पसंद था।'

यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुस्लिम मतदाताओं को लेकर विभिन्न दलों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज बनी हुई है। मौलाना रजवी की टिप्पणी ने सपा और उसके नेतृत्व की मुस्लिम समुदाय से निकटता के दावे पर सवाल उठाया है।

अखिलेश पर सीधा निशाना — सफेद टोपी का सवाल

मौलाना रजवी ने याद दिलाया कि सात-आठ साल पहले तक अखिलेश यादव रमजान के इफ्तार कार्यक्रमों में सफेद टोपी और कंधे पर रूमाल डालकर मुस्लिम समुदाय के बीच जाते थे। उन्होंने कहा कि अब वे हमेशा लाल टोपी पहनते हैं और सफेद टोपी से जैसे नफरत हो गई हो।

रजवी ने एक और वाकये का उल्लेख किया — कि कुछ मुसलमान अखिलेश के पार्टी कार्यालय गए और उन्हें सफेद टोपी व शॉल भेंट की, जिसे अखिलेश ने हाथ में लेने से भी इनकार कर दिया और दूसरों को पहनाने का इशारा कर दिया। रजवी के अनुसार इससे 'हमारी पहचान, हमारी शिनाख्त बिल्कुल अलग-थलग है' — यह संदेश स्पष्ट होता है।

सोनिया गांधी की किताब और बाबरी मस्जिद प्रसंग

मौलाना शहाबुद्दीन ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की चर्चित आत्मकथात्मक किताब का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस समेत अपने जीवन के कई उतार-चढ़ाव का विस्तार से वर्णन किया है।

रजवी ने बताया कि आज से लगभग 15 साल पहले वे उलेमाओं और विद्वानों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ सोनिया गांधी से मिले थे। उस मुलाकात में सोनिया ने कथित तौर पर कहा था कि जब उन्हें पता चला और उन्होंने देखा कि बाबरी मस्जिद गिराई जा रही है, तो रातभर नींद नहीं आई और वे रोती रहीं।

मौलाना रजवी ने कहा कि यह बयान और सोनिया की किताब में लिखा वाकया उनकी 'इंसाफपसंदी, मानवता और अल्पसंख्यकों के प्रति हमदर्दी' का प्रमाण है। उन्होंने जोर दिया कि सोनिया गांधी चाहती हैं कि भारत में सांप्रदायिक सौहार्द बना रहे और सभी लोग मेल-मिलाप से जीवन बिताएं।

राजनीतिक पृष्ठभूमि और व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में सपा और मुस्लिम समुदाय के बीच समीकरण लंबे समय से राजनीतिक चर्चा का विषय रहा है। मौलाना रजवी की यह टिप्पणी सपा के 'मुस्लिम-पीवी' (पीड़ित-यादव) गठबंधन के दावे पर धार्मिक आधार पर की गई एक असामान्य आपत्ति है।

आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान धार्मिक पहचान को राजनीतिक पहचान की कसौटी बनाते हैं, जो चुनावी लोकतंत्र में विभाजनकारी हो सकता है। वहीं मौलाना रजवी के समर्थकों का तर्क है कि यह महज धार्मिक अवलोकन है, न कि राजनीतिक हमला।

आगे क्या

अब तक समाजवादी पार्टी की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इस पर होगी कि सपा नेतृत्व इस धार्मिक आपत्ति का जवाब देता है या चुप्पी साधता है — दोनों ही स्थितियाँ उत्तर प्रदेश की राजनीति में अलग-अलग संकेत देंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि इससे नेताओं पर धार्मिक प्रदर्शन का दबाव बढ़ता है। दूसरी ओर, सोनिया गांधी की प्रशंसा में कांग्रेस-मुस्लिम जमात निकटता का स्पष्ट संकेत है — जो विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में सपा के लिए असुविधाजनक हो सकता है। मुख्यधारा की कवरेज इस बयान को महज विवाद मान सकती है, लेकिन असली कहानी यह है कि मुस्लिम धार्मिक नेतृत्व का एक वर्ग अखिलेश से किनारा करने और कांग्रेस के करीब आने की दिशा में झुक रहा है।
RashtraPress
8 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने अखिलेश यादव की लाल टोपी पर क्या कहा?
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि मजहबी दृष्टिकोण से लाल रंग शुभ नहीं है और 'लाल निशान शैतान का है।' उन्होंने यह भी कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम को सफेद रंग पसंद था, जबकि अखिलेश ने सफेद टोपी से पूरी तरह दूरी बना ली है।
अखिलेश यादव और सफेद टोपी विवाद क्या है?
मौलाना रजवी के अनुसार सात-आठ साल पहले तक अखिलेश यादव रमजान इफ्तार में सफेद टोपी पहनते थे। अब वे लाल टोपी ही पहनते हैं और कुछ मुसलमानों द्वारा भेंट की गई सफेद टोपी और शॉल हाथ में लेने से भी इनकार कर चुके हैं।
सोनिया गांधी की किताब में बाबरी मस्जिद पर क्या लिखा है?
सोनिया गांधी की किताब में 6 दिसंबर 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस का जिक्र है। मौलाना रजवी के अनुसार सोनिया ने लिखा है — और करीब 15 साल पहले उनसे हुई मुलाकात में भी कहा था — कि जब उन्हें पता चला कि बाबरी मस्जिद गिराई जा रही है तो रातभर नींद नहीं आई और वे रोती रहीं।
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात क्या है और मौलाना रजवी कौन हैं?
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात एक धार्मिक संगठन है और मौलाना शहाबुद्दीन रजवी इसके अध्यक्ष हैं। वे बरेली से संचालन करते हैं और मुस्लिम समुदाय से जुड़े धार्मिक व सामाजिक मुद्दों पर नियमित रूप से बयान देते हैं।
इस बयान का उत्तर प्रदेश की राजनीति पर क्या असर हो सकता है?
यह बयान सपा के मुस्लिम वोटबैंक पर सवाल उठाता है और धार्मिक नेतृत्व के एक वर्ग की सोनिया गांधी व कांग्रेस के प्रति सहानुभूति को उजागर करता है। विश्लेषकों के अनुसार इससे उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मतदाताओं के राजनीतिक झुकाव को लेकर बहस तेज हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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