लाल टोपी गुंडागर्दी और भ्रष्टाचार का प्रतीक: भाजपा मंत्री दयाशंकर सिंह का अखिलेश पर तीखा हमला
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मंत्री दयाशंकर सिंह ने 30 सितंबर 2026 को लखनऊ में समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखा निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि यूपी में लाल टोपी को कथित तौर पर गुंडागर्दी, अराजकता और भ्रष्टाचार के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि अखिलेश यादव अब भगवा रंग अपनाने लगे हैं, क्योंकि उन्हें अहसास हो गया है कि जनता लाल टोपी को पसंद नहीं करती।
मंत्री दयाशंकर सिंह के आरोप
मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश के लोग लाल रंग को सीधे समाजवादी पार्टी से जोड़कर देखते हैं। उनके अनुसार जब भी सपा का कोई कार्यकर्ता लाल टोपी पहनकर सामने आता है, तो आम जनता में भय का माहौल बन जाता है।
उन्होंने दावा किया कि भगवा रंग को खुशहाली और सकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है। इसी कारण उनके अनुसार अखिलेश यादव ने अपने प्रचार रथ को भी भगवा रंग में रंगवाया है — जिसे मंत्री ने जनमत के दबाव में उठाया गया कदम बताया।
भूपेंद्र सिंह चौधरी का सपा पर हमला
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष एवं मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी ने अखिलेश यादव की चौधरी चरण सिंह को लेकर की गई टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी ने हमेशा किसानों का अपमान किया है।
उन्होंने कहा कि सपा शासनकाल में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों को मुजफ्फरनगर दंगों जैसी घटनाओं और बिगड़ी कानून-व्यवस्था का सामना करना पड़ा। उनके आरोपों के अनुसार उस दौर में लूटपाट, दंगे और जमीनों पर कब्जे जैसी घटनाएँ आम थीं।
ईवीएम और संवैधानिक संस्थाओं पर विपक्ष के सवाल
विपक्ष द्वारा चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं पर उठाए जा रहे सवालों पर भूपेंद्र सिंह चौधरी ने कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पक्ष में मिले जनादेश को स्वीकार नहीं कर पा रहे।
चौधरी ने आरोप लगाया कि चुनावों में हार के बाद विपक्ष ईवीएम, संवैधानिक संस्थाओं और पुलिस-प्रशासन को कठघरे में खड़ा करने लगता है। यह ऐसे समय में आया है जब यूपी में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ पृष्ठभूमि में तेज हो रही हैं।
राजनीतिक संदर्भ और आगे की स्थिति
गौरतलब है कि रंगों की यह 'प्रतीक-राजनीति' उत्तर प्रदेश में नई नहीं है। सपा का लाल-हरा और BJP का भगवा — दोनों दलों ने वर्षों से इन्हें अपनी राजनीतिक पहचान से जोड़ा है। अखिलेश यादव के प्रचार रथ के रंग को लेकर हाल में जो विवाद उठा है, वह इसी प्रतीक-युद्ध का विस्तार है।
आलोचकों का कहना है कि दोनों पक्षों की यह जुबानी जंग मूल मुद्दों — रोजगार, महंगाई, कानून-व्यवस्था — से ध्यान भटकाने का काम करती है। आने वाले हफ्तों में दोनों दलों के बीच यह प्रतीक-आधारित राजनीतिक संघर्ष और तीखा होने की संभावना है।