अखिलेश यादव यूपी चुनाव से पहले ही डरे: लक्ष्मी नारायण चौधरी का पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने 13 जून को फिरोजाबाद में मीडिया से बातचीत के दौरान समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के बयान पर कड़ा पलटवार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यूपी विधानसभा चुनाव से पहले ही अखिलेश यादव का हौसला टूटने लगा है, तभी वे विपक्षी एकजुटता की माँग करने लगे हैं।
अखिलेश के 'वोट चोरी' के आरोप और BJP का जवाब
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने दावा किया था कि यदि उत्तर प्रदेश में पश्चिम बंगाल जैसे हालात बने तो भविष्य में चुनाव कराना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने एक बार फिर 'वोट चोरी' के गंभीर आरोप दोहराए। इस पर मंत्री चौधरी ने तर्क दिया कि जब कन्नौज से अखिलेश यादव स्वयं जीते और जब उनकी पत्नी डिंपल यादव ने लोकसभा चुनाव जीता, तब 'वोट चोरी' का कोई आरोप नहीं लगाया गया। अयोध्या में सपा सांसद की जीत पर भी यही चुप्पी रही।
चौधरी ने कहा कि जब-जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) को जनता का समर्थन मिलता है, तभी 'वोट चोरी' के आरोप सामने आते हैं। उनके अनुसार यह रवैया स्पष्ट करता है कि अखिलेश यादव आगामी चुनाव से पहले ही भयभीत हो चुके हैं।
PM मोदी के 12 वर्ष और योगी सरकार की उपलब्धियाँ
मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्ष के कार्यकाल के ऐतिहासिक फैसलों की भी चर्चा की। उन्होंने योगी आदित्यनाथ सरकार की सराहना करते हुए कहा कि इस बार महाकुंभ का आयोजन अभूतपूर्व रहा — जहाँ पहले मात्र कुछ लाख श्रद्धालु आते थे, वहीं इस बार 60 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान किया।
राहुल गांधी और संजय राउत पर कटाक्ष
केंद्र की उज्ज्वला योजना पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयान को खारिज करते हुए मंत्री चौधरी ने कहा कि राहुल गांधी की बातों को कोई गंभीरता से नहीं लेता। उनके शब्दों में — 'वह क्या बोलते हैं, क्या नहीं बोलते हैं, उनका तो भगवान ही मालिक है।'
शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत के गुजरात को लेकर दिए विवादित बयान पर भी मंत्री ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि गुजरात केवल औरंगजेब की जन्मस्थली नहीं है — महात्मा गांधी का जन्म भी वहीं हुआ था। ऐसे बयानों पर ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है।
राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ अभी से शुरू हो गई हैं और विपक्षी गठबंधन की रणनीति पर चर्चाएँ तेज हैं। गौरतलब है कि सपा ने पिछले चुनावों में भी चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे, जिन्हें BJP ने हर बार राजनीतिक हताशा करार दिया है।
आने वाले महीनों में दोनों दलों के बीच इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है, क्योंकि चुनावी समीकरण बनाने की प्रक्रिया अभी से शुरू हो चुकी है।