अखिलेश यादव के 'सरकार गिरेगी' दावे पर एनडीए का पलटवार: 'मुंगेरीलाल के हसीन सपने'
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के उस बयान पर सियासी पारा चढ़ गया है, जिसमें उन्होंने भाजपा सरकार के गिरने और सपा के सत्ता में वापसी का दावा किया था। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के घटक दलों ने 27 मई को एकजुट होकर इस दावे को सिरे से खारिज किया और इसे 'मुंगेरीलाल के हसीन सपने' की संज्ञा दी।
मंत्री ओम प्रकाश राजभर का तीखा जवाब
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव को सीधे चुनौती देते हुए कहा, '2014, 2017, 2019 और 2022 में भी अपनी सरकार बनने के दावे कर रहे थे। अब 2027 में भी हम देख लेंगे। जो हाल पश्चिम बंगाल में हुआ है, वही हाल उत्तर प्रदेश में भी होगा।' राजभर का यह बयान इस बात की ओर संकेत करता है कि एनडीए 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है।
जेडीयू प्रवक्ता ने मोदी-योगी की लोकप्रियता का दिया हवाला
जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा, 'वे उत्तर प्रदेश में सरकार कहाँ बनाने जा रहे हैं? पूरे उत्तर प्रदेश में, ठीक वैसे ही जैसे देश के बाकी हिस्सों में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता साफ तौर पर दिखाई दे रही है।' उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर, रोज़गार, निवेश और कानून-व्यवस्था के क्षेत्र में बड़े फैसले लिए हैं, जिसके परिणामस्वरूप भाजपा और उसके सहयोगी दलों को 2027 में भी भारी फायदा होने की उम्मीद है।
बिहार भाजपा अध्यक्ष ने कहा — सपा का अस्तित्व खतरे में
बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने अखिलेश यादव पर तीखा निशाना साधते हुए कहा, 'ठीक वैसे ही जैसे बिहार में चुनावों के बाद विपक्ष पूरी तरह खत्म हो गया था, पश्चिम बंगाल में विपक्ष खत्म हो गया था और असम में कांग्रेस अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही है, वैसे ही समाजवादी पार्टी का भी हाल होने वाला है।' सरावगी ने कहा कि अखिलेश यादव को 'सपने देखते रहना चाहिए' क्योंकि समाजवादी पार्टी 'पूरी तरह खत्म होने वाली है।'
बिहार मंत्री राम कृपाल यादव ने भी किया खारिज
बिहार सरकार में मंत्री राम कृपाल यादव ने अखिलेश के दावे को 'मुंगेरीलाल के हसीन सपने' बताते हुए कहा, 'समाजवादी सरकार कहाँ से आएगी? इस बार तो समाजवादी पार्टी का अस्तित्व ही नहीं बचेगा। जनता इसे पूरी तरह उखाड़ फेंकेगी। इसका कोई नामोनिशान नहीं बचेगा।' गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब अखिलेश यादव ने सत्ता परिवर्तन का दावा किया हो — 2022 के विधानसभा चुनावों में भी उनकी पार्टी ने ऐसे ही दावे किए थे, लेकिन भाजपा ने प्रचंड बहुमत से जीत दर्ज की थी।
2027 की राजनीतिक पृष्ठभूमि
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव करीब दो साल दूर हैं, लेकिन सियासी बयानबाज़ी अभी से तेज हो गई है। यह ऐसे समय में आया है जब सपा हाल के स्थानीय निकाय चुनावों में अपनी स्थिति मज़बूत करने की कोशिश में है, जबकि एनडीए योगी सरकार की उपलब्धियों को आगामी चुनावों में भुनाने की तैयारी में है। आने वाले महीनों में दोनों पक्षों की ओर से और तीखे बयान आने की संभावना है।