कमलनाथ का मध्य प्रदेश सरकार पर हमला: सर्वर फेल और ई-टोकन सिस्टम से किसानों को खाद नहीं मिल रही
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 7 नवंबर 2026 को राज्य की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर तीखा निशाना साधा और आरोप लगाया कि खाद वितरण व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। उन्होंने कहा कि सर्वर फेल होने, खराब इंटरनेट कनेक्टिविटी और ई-टोकन सिस्टम की खामियों के चलते मध्य प्रदेश के किसान बुवाई के मौसम में खाद से वंचित हो रहे हैं।
कमलनाथ के आरोप
कमलनाथ ने सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में कहा, 'मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार को समस्याएं पैदा करने के लिए गोल्ड मेडल मिलना चाहिए। इस पार्टी ने हर सिस्टम को बर्बाद करने में महारत हासिल कर ली है।' उन्होंने यह भी कहा कि किसान पहले से ही सरकारी नीतियों की मार झेल रहे हैं और खाद हासिल करने के लिए उन्हें अतिरिक्त तकनीकी अवरोधों से नहीं जूझना पड़ना चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि सर्वर डाउन होने, ओटीपी (OTP) मिलने में देरी और कमज़ोर नेटवर्क के कारण ई-टोकन सिस्टम एक बार फिर बुरी तरह विफल हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा, 'किसानों को तकनीकी समस्याओं से जूझने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।'
ई-टोकन सिस्टम का विवादित इतिहास
गौरतलब है कि ई-टोकन सिस्टम को किसानों के विरोध-प्रदर्शन के बाद पहले एक बार स्थगित किया जा चुका है। कमलनाथ के अनुसार, सरकार ने बिना किसी ठोस तकनीकी सुधार के इसे दोबारा लागू कर दिया, जिससे वही पुरानी समस्याएँ फिर सामने आ गई हैं। उन्होंने कहा कि गोदामों के बाहर लंबी कतारें, कालाबाजारी और नकली खाद की आपूर्ति किसानों की परेशानियों को और गहरा कर रही है।
यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में रबी बुवाई का मौसम चल रहा है और किसानों को यूरिया व डीएपी जैसी खादों की सर्वाधिक ज़रूरत है। आलोचकों का कहना है कि यह समस्या मध्य प्रदेश में हर साल बुवाई के मौसम में दोहराई जाती है।
सरकार का पक्ष
भाजपा सरकार ने कहा है कि राज्य में खाद का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और वितरण व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के प्रयास जारी हैं। हालाँकि, सरकार की ओर से ई-टोकन सिस्टम की तकनीकी खामियों पर कोई विस्तृत स्पष्टीकरण अभी तक नहीं आया है।
आम किसान पर असर
मध्य प्रदेश में खाद वितरण विवाद लंबे समय से किसानों की पीड़ा का केंद्र रहा है। किसान बताते हैं कि वे अक्सर भोर से कतारों में लग जाते हैं, लेकिन सर्वर फेल होने या टोकन न मिलने पर खाली हाथ लौटना पड़ता है। बुवाई में देरी होने पर फसल उत्पादन सीधे प्रभावित होता है, जो पहले से आर्थिक तनाव में जी रहे किसानों के लिए दोहरी मार है।
क्या होगा आगे
कमलनाथ ने माँग की है कि राज्य सरकार खाद का सुचारू और पर्याप्त वितरण सुनिश्चित करे, ताकि यह समस्या हर साल आने वाले कृषि संकट का स्थायी रूप न ले ले। राजनीतिक दबाव और किसान संगठनों की बढ़ती नाराज़गी के बीच सरकार पर त्वरित कार्रवाई का दबाव अब और बढ़ गया है।