कमलनाथ का मोहन यादव सरकार पर हमला: NCRB रिपोर्ट में MP आदिवासी अत्याचार में पहले, दलित में दूसरे स्थान पर
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 8 मई 2026 को मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि यह सरकार दलित और आदिवासी विरोधी है। उन्होंने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) पर अत्याचार के मामले अत्यंत चिंताजनक स्तर पर हैं।
NCRB रिपोर्ट में मध्य प्रदेश की स्थिति
NCRB की हाल में जारी रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में आदिवासियों पर अत्याचार के मामलों में मध्य प्रदेश देश में पहले स्थान पर रहा, जबकि दलितों पर अत्याचार के मामलों में राज्य दूसरे स्थान पर रहा। कमलनाथ ने इसे राज्य सरकार की नीतिगत विफलता करार दिया। उन्होंने कहा कि ये आँकड़े सरकारी दस्तावेज़ों पर आधारित हैं, इसलिए इन्हें नकारा नहीं जा सकता।
कमलनाथ के आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि NCRB रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि प्रदेश का आदिवासी समाज देश में सबसे ज़्यादा अत्याचारों का सामना कर रहा है। उनके अनुसार, BJP सरकार आदिवासियों को न्याय दिलाने में पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने आगे कहा कि दलितों पर अत्याचार के मामले में प्रदेश का देश में दूसरे स्थान पर होना यह बताता है कि राज्य में दलितों की स्थिति कितनी गंभीर है।
कांग्रेस की रणनीति
राज्य की कांग्रेस इकाई लगातार कानून-व्यवस्था और दलित-आदिवासी अत्याचार के मुद्दों को प्रमुखता से उठाती रही है। NCRB की 2024 की रिपोर्ट आने के बाद कांग्रेस ने इसे सत्तारूढ़ सरकार को घेरने के अवसर के रूप में इस्तेमाल किया है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में विपक्ष सरकार की प्रशासनिक क्षमता पर लगातार सवाल उठा रहा है।
BJP का पक्ष
दूसरी ओर, BJP का दावा है कि मोहन यादव सरकार दलित, आदिवासी और तमाम वर्गों की सुविधाओं में बढ़ोतरी करने और उनके जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए प्रतिबद्ध है। पार्टी ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है, हालाँकि NCRB के आँकड़ों पर सरकार की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आगे क्या
यह मुद्दा मध्य प्रदेश की राजनीति में आने वाले दिनों में और गरमाने की संभावना है, क्योंकि कांग्रेस NCRB के आँकड़ों को आधार बनाकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश में है। दलित और आदिवासी समुदायों की सुरक्षा और न्याय का सवाल अब विधानसभा से लेकर ज़मीनी स्तर तक राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकता है।