कमलनाथ का आरोप: मध्य प्रदेश सरकार ओबीसी आरक्षण को समाप्त करने की साजिश में
सारांश
Key Takeaways
- कमलनाथ ने ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण का समर्थन किया।
- सरकार पर आरक्षण समाप्त करने का आरोप।
- हाईकोर्ट की ओर से आरक्षण पर अंतिम निर्णय की अपेक्षा।
- सरकार की हीलाहवाली पर सवाल उठाए गए।
- ओबीसी वर्ग के अधिकारों की रक्षा की आवश्यकता।
भोपाल, 3 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण न मिलने के लिए वर्तमान सरकार को दोषी ठहराया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आरक्षण को समाप्त करने की साजिश कर रही है।
कमलनाथ ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि हमने कानून के माध्यम से ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया था, लेकिन इसके बाद से भाजपा सरकारों ने छल और षड्यंत्रों के माध्यम से इस आरक्षण को खत्म करने का प्रयास किया है।
उन्होंने कहा कि पिछले छह वर्षों में सरकार ने अदालतों में 27 प्रतिशत आरक्षण का उचित पक्ष नहीं रखा है, या तो अदालत को गुमराह करने की कोशिश की है। असली बात यह है कि आरक्षण के समर्थन में सरकार ने आरक्षण समाप्त करने की साजिश की है, जिसका नतीजा यह है कि ओबीसी वर्ग के लाखों अभ्यर्थी सरकारी नौकरी में 27 प्रतिशत आरक्षण से वंचित रह गए हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह मध्य प्रदेश सरकार की कोई हीलाहवाली नहीं सुनना चाहता और ओबीसी आरक्षण पर अपना अंतिम निर्णय सुनाना चाहता है। कमलनाथ ने कहा कि ओबीसी वर्ग के साथ बेईमानी और षड्यंत्र करना बंद करें। ईमानदारी से अदालत के सामने ओबीसी वर्ग का पक्ष प्रस्तुत करें और ओबीसी को जो 27 प्रतिशत आरक्षण कांग्रेस की सरकार ने दिया था, उसे जस का तस बनाए रखें। यदि मध्य प्रदेश सरकार इस बार फिर कोई चालबाजी करती है तो जनता के सामने स्पष्ट हो जाएगा कि वर्तमान सरकार ओबीसी की शत्रु है।