किसान उत्पीड़न वर्ष मना रही है MP सरकार — कमलनाथ का BJP पर बड़ा हमला
सारांश
Key Takeaways
- पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार पर आरोप लगाया कि 'कृषक कल्याण वर्ष' असल में 'किसान उत्पीड़न वर्ष' है।
- भिंड जिले में ओलावृष्टि से फसल का 100 प्रतिशत नुकसान हुआ, लेकिन सर्वे में केवल 20-25 प्रतिशत नुकसान दर्ज किया गया।
- एक सरकारी मंत्री ने खुद 100 प्रतिशत नुकसान स्वीकार किया, फिर भी मुआवजे की राशि में भारी कटौती का आरोप है।
- किसानों को समय पर खाद-बीज, MSP और फसल खरीदी जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिल रहीं।
- कमलनाथ ने सरकार से मांग की कि ओलावृष्टि प्रभावित सभी जिलों के किसानों को तत्काल पूरा मुआवजा दिया जाए।
- यह विवाद 2028 विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में कांग्रेस की किसान-केंद्रित राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
भोपाल, 25 अप्रैल 2025 — मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मोहन यादव सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि राज्य में "कृषक कल्याण वर्ष" की घोषणा महज एक छलावा है और वास्तविकता में यह सरकार "किसान उत्पीड़न वर्ष" मना रही है। भिंड जिले में ओलावृष्टि से तबाह हुई फसलों के मुआवजे में कथित धांधली को लेकर उन्होंने राज्य सरकार को घेरा।
कृषक कल्याण वर्ष का ऐलान और जमीनी हकीकत
मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने वर्ष 2026 को "कृषक कल्याण वर्ष" घोषित किया है और किसानों के हित में बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। लेकिन कमलनाथ ने इन दावों को खोखला बताते हुए कहा कि भाजपा के शब्दकोश में "किसान कल्याण" का वास्तविक अर्थ "किसान उत्पीड़न" बन चुका है।
उन्होंने कहा कि किसान कल्याण के नाम पर न तो किसानों को समय पर खाद-बीज मिलता है, न फसल की खरीदी सही वक्त पर शुरू होती है और न ही न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) वादे के मुताबिक दिया जाता है। उपार्जन प्रक्रिया भी सुचारू रूप से नहीं चलाई जाती, जिससे किसान हर मोर्चे पर ठगा महसूस करता है।
भिंड में ओलावृष्टि — मुआवजे में कथित हेरफेर
कमलनाथ ने भिंड जिले का विशेष उल्लेख किया जहां ओलावृष्टि ने किसानों की फसल को 100 प्रतिशत तक नष्ट कर दिया। उन्होंने कहा कि स्वयं एक मंत्री ने भी माना कि फसल का पूर्ण नुकसान हुआ है, फिर भी सर्वे में केवल 20 से 25 प्रतिशत नुकसान दर्शाया जा रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री का आरोप है कि यह जानबूझकर किया जा रहा है ताकि सरकार को किसानों को मुआवजा न देना पड़े। यह विरोधाभास उजागर करता है कि जहां एक ओर सरकार कृषक कल्याण के ढोल पीट रही है, वहीं दूसरी ओर पीड़ित किसान राहत के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
कमलनाथ की मांग — तत्काल पूरा मुआवजा दिया जाए
कमलनाथ ने मोहन यादव सरकार से स्पष्ट मांग की है कि भिंड सहित प्रदेश के उन तमाम जिलों में जहां ओलावृष्टि ने फसलें बर्बाद की हैं, वहां के किसानों को बिना देरी के पूरा मुआवजा दिया जाए। उन्होंने कहा कि किसान पहले से ही आर्थिक संकट में है और सरकारी उदासीनता उसकी पीड़ा को और गहरा कर रही है।
गहरा संदर्भ — किसान और सत्ता का पुराना टकराव
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में 2017 में मंदसौर किसान आंदोलन के दौरान पुलिस फायरिंग में 6 किसानों की मौत हुई थी, जो राज्य में कृषि संकट की गहरी जड़ों को दर्शाता है। तब से लेकर अब तक किसानों की दशा में सुधार के दावे हर सरकार करती रही है, लेकिन जमीनी हालात बदले कम हैं।
आलोचकों का कहना है कि फसल बीमा योजना, MSP गारंटी और कर्ज माफी जैसे वादे चुनावी मौसम में तो खूब होते हैं, लेकिन क्रियान्वयन के स्तर पर किसान हमेशा पिछड़ता रहा है। मध्य प्रदेश में कृषि योग्य भूमि का बड़ा हिस्सा होने के बावजूद किसान आत्महत्या के आंकड़े चिंताजनक बने हुए हैं।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां राजनीतिक दलों ने अभी से शुरू कर दी हैं और किसान वोट बैंक दोनों प्रमुख दलों के लिए निर्णायक भूमिका निभाता है। कमलनाथ का यह हमला कांग्रेस की उस रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है जिसमें वह ग्रामीण मतदाताओं को साधने की कोशिश कर रही है।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मोहन यादव सरकार भिंड के किसानों के मुआवजे पर क्या कदम उठाती है और क्या "कृषक कल्याण वर्ष" की घोषणाएं जमीन पर उतर पाती हैं।