आम आदमी पार्टी का भविष्य खतरे में: संदीप दीक्षित का केजरीवाल पर बड़ा हमला
सारांश
Key Takeaways
- कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने 25 अप्रैल को राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि AAP केजरीवाल की मौजूदा कार्यशैली के साथ लंबे समय तक नहीं टिकेगी।
- राघव चड्ढा समेत 7 राज्यसभा सांसद AAP छोड़कर BJP में शामिल हो गए, जिसे दीक्षित ने अप्रत्याशित नहीं बताया।
- पंजाब में AAP की जीत के बाद फंड कलेक्शन की जिम्मेदारी पहले राघव चड्ढा को दी गई, फिर केजरीवाल ने खुद संभाली — इससे दोनों में तनाव बढ़ा।
- केजरीवाल के नए सरकारी आवास में CPWD सीमा से अधिक महंगे फर्नीचर लगाने के आरोप पर संदीप दीक्षित ने जांच की मांग की।
- फरवरी 2025 के दिल्ली चुनाव में AAP को केवल 8 सीटें मिलीं, जो पार्टी के लिए ऐतिहासिक हार थी।
- 73 राज्यसभा सदस्यों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ रुख अपनाया; विपक्ष सदन में चर्चा और मतदान की मांग पर अड़ा है।
नई दिल्ली, 25 अप्रैल। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता संदीप दीक्षित ने आम आदमी पार्टी (AAP) के राजनीतिक भविष्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि अरविंद केजरीवाल की कार्यशैली और व्यवहार में बदलाव नहीं आया, तो यह पार्टी अधिक समय तक अपना अस्तित्व नहीं बचा पाएगी। राष्ट्र प्रेस से विशेष बातचीत में उन्होंने AAP के भीतर बढ़ती दरारों और नेताओं के पार्टी छोड़ने की प्रवृत्ति पर खुलकर अपनी राय रखी।
राघव चड्ढा समेत सात राज्यसभा सदस्यों का AAP छोड़ना
राघव चड्ढा सहित सात राज्यसभा सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने पर संदीप दीक्षित ने कहा कि यह कोई अप्रत्याशित घटना नहीं है। उनके अनुसार, राघव चड्ढा कुछ समय से ऐसे संकेत दे रहे थे जो पार्टी की मुख्यधारा से अलग थे। साथ ही उनकी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाएं भी बढ़ती जा रही थीं।
पंजाब में AAP की सरकार बनने के तुरंत बाद राघव चड्ढा को फंड कलेक्शन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लेकिन कुछ समय बाद अरविंद केजरीवाल ने यह कार्यभार खुद अपने हाथों में ले लिया, जिससे दोनों नेताओं के बीच तनाव उत्पन्न हुआ और रिश्तों में कड़वाहट आई।
AAP में वैचारिक संकट और आंतरिक टूटन
संदीप दीक्षित ने कहा कि AAP में वैचारिक मतभेद की बात करना ही बेमानी है, क्योंकि इस पार्टी में कोई स्पष्ट विचारधारा है ही नहीं। उन्होंने संदीप पाठक का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे सुलझे हुए और गंभीर नेता भी केजरीवाल की कार्यप्रणाली से परेशान हो चुके हैं।
उन्होंने आगाह किया कि आने वाले समय में और भी नेता पार्टी से अलग हो सकते हैं। यह एक चेतावनी है जिसे AAP नेतृत्व को गंभीरता से लेना चाहिए। गौरतलब है कि 2022 में पंजाब में ऐतिहासिक जीत के बाद AAP राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत दिख रही थी, लेकिन 2025 में दिल्ली विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद पार्टी की साख को गहरा धक्का लगा।
मुख्य चुनाव आयुक्त विवाद और विपक्षी रणनीति
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ 73 राज्यसभा सदस्यों के रुख पर संदीप दीक्षित ने कहा कि यह पहले से ही अनुमानित था। उन्होंने कहा कि पिछली बार केवल स्पेलिंग की गलती का बहाना बनाकर मामले को टाला गया था। अब दो विपक्षी सांसद लगातार नोटिस देते रहेंगे जब तक इस विषय पर सदन में चर्चा और मतदान नहीं हो जाता।
केजरीवाल के नए बंगले में महंगे फर्नीचर का विवाद
अरविंद केजरीवाल के नए सरकारी आवास में कथित तौर पर अत्यधिक महंगे फर्नीचर लगाए जाने के आरोपों पर संदीप दीक्षित ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह बेहद चौंकाने वाला है, क्योंकि मुख्यमंत्री रहते हुए भी केजरीवाल 'शीश महल' विवाद में बदनामी झेल चुके हैं।
संदीप दीक्षित ने सवाल उठाया कि सांसद या पार्टी अध्यक्ष के रूप में मिले सरकारी आवास में CPWD की निर्धारित सीमा से अधिक खर्च कैसे हो सकता है। उनका कहना था कि या तो अपना निजी फर्नीचर रखा जाए या CPWD द्वारा आवंटित फर्नीचर का उपयोग किया जाए। इतने महंगे फर्नीचर की खरीद और उसके भुगतान की जांच होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच हुई, तो कई और परतें खुल सकती हैं। यह विरोधाभास उल्लेखनीय है — एक ऐसी पार्टी जो 'आम आदमी' के नाम पर सत्ता में आई, उसके शीर्ष नेता पर विलासिता के आरोप लगातार लग रहे हैं।
AAP का राजनीतिक भविष्य: आगे क्या?
AAP की स्थापना 2012 में हुई थी और 2015 तथा 2020 में दिल्ली में प्रचंड बहुमत मिला था। लेकिन फरवरी 2025 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में पार्टी को महज 8 सीटें मिलीं और BJP ने 48 सीटें जीतकर सत्ता हासिल की। इस हार के बाद से पार्टी के भीतर नेतृत्व पर सवाल उठने लगे हैं।
आलोचकों का कहना है कि केजरीवाल की केंद्रीकृत नेतृत्व शैली, जहां सभी निर्णय एक व्यक्ति पर निर्भर हों, किसी भी लोकतांत्रिक दल के दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए उचित नहीं है। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि AAP अपनी आंतरिक संरचना को कैसे पुनर्गठित करती है और क्या केजरीवाल अपनी कार्यशैली में कोई बदलाव लाते हैं।