चांदी रिफाइनरी में ₹15 लाख की ठगी, अंतरराज्यीय गिरोह के 5 सदस्य गिरफ्तार
सारांश
Key Takeaways
- हैदराबाद के सिकंदराबाद में चांदी रिफाइनरी व्यापारी हीरालाल वर्मा से ₹15 लाख की ठगी की गई।
- अंतरराज्यीय गिरोह के पाँच सदस्य — हृदेश कुमार, सुशील कुमार वर्मा, प्रिंस उर्फ लड्डू सोनी, राजीव जैन और सोनू कुशवाहा — गिरफ्तार।
- गिरोह ने 20 मार्च 2026 को 6,350 ग्राम असली चांदी के बदले शून्य शुद्धता वाले नकली सिल्ले थमाए।
- गिरोह के मुखिया हृदेश कुमार से 8.4 किलो चांदी और ₹1.5 लाख नकद बरामद।
- गिरोह मध्य प्रदेश, ओडिशा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में भी ठगी कर चुका है।
- कार्रवाई अतिरिक्त उपायुक्त जे. नरसैया के नेतृत्व में हुई; शेष सदस्यों की तलाश जारी।
हैदराबाद के सिकंदराबाद स्थित एक चांदी रिफाइनरी में नकली सिल्ले थमाकर ₹15 लाख से अधिक की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का महाकाली पुलिस ने पर्दाफाश किया है। 20 अप्रैल 2026 को शुरू हुई कार्रवाई में पुलिस ने उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से गिरोह के पाँच सदस्यों को गिरफ्तार किया। यह गिरोह देश के कई राज्यों में इसी तरह की धोखाधड़ी को अंजाम दे चुका है।
कैसे हुई ठगी की शुरुआत
महाकाली स्ट्रीट, सिकंदराबाद पर श्री जगदंबा इंडस्ट्रीज नाम से चांदी की रिफाइनरी चलाने वाले हीरालाल वर्मा के यहाँ 20 मार्च 2026 को शाम करीब साढ़े चार बजे उनका पुराना ग्राहक राजेश एक अन्य व्यक्ति के साथ आया। दोनों अपने साथ तीन कच्ची चांदी के सिल्ले लेकर आए और हैदराबाद के चारकमान स्थित दुर्गा बुलियन रिफाइनरी की शुद्धता परीक्षण रिपोर्ट भी दिखाई।
पुराने कारोबारी संबंधों के भरोसे हीरालाल वर्मा ने बिना स्वतंत्र जाँच कराए आरोपियों को 60 प्रतिशत शुद्धता के बराबर 25 छोटे चांदी के सिल्ले दे दिए, जिनका कुल वजन करीब 6,350 ग्राम था। जब बाद में बाजार में उन सिल्लों की जाँच कराई गई तो चौंकाने वाला सच सामने आया — उनमें चांदी की मात्रा शून्य थी।
तीन मामलों में हुई ठगी
इस एक घटना के बाद इसी तरह के दो और मामले सामने आए — एक महाकाली पुलिस स्टेशन में और दूसरा मार्केट पुलिस स्टेशन में। इन मामलों में भी पीड़ितों को 6 किलो से अधिक चांदी के बराबर का नुकसान उठाना पड़ा। कुल मिलाकर तीनों मामलों में गिरोह ने हैदराबाद के व्यापारियों को भारी आर्थिक चोट पहुँचाई।
गिरोह का तरीका बेहद सुनियोजित था। पहले दो बार असली चांदी का 60 प्रतिशत शुद्धता वाला सिल्ला देकर व्यापारी का विश्वास जीता जाता था। तीसरी बार नकली रिपोर्ट दिखाकर शून्य शुद्धता वाला नकली सिल्ला थमाया जाता और बदले में असली चांदी हड़प ली जाती।
गिरोह की संरचना और गिरफ्तारी
पुलिस जाँच में खुलासा हुआ कि यह एक संगठित अंतरराज्यीय गिरोह है, जिसका मुखिया हृदेश कुमार है। गिरोह के तीन सदस्य उत्तर प्रदेश के आगरा के, एक इटावा का और एक मध्य प्रदेश का रहने वाला है। ये सभी आपस में रिश्तेदार या करीबी मित्र हैं।
20 अप्रैल 2026 को हृदेश कुमार को आगरा से गिरफ्तार किया गया। एक दिन बाद सुशील कुमार वर्मा, प्रिंस उर्फ लड्डू सोनी और राजीव जैन को आगरा और इटावा से पकड़ा गया। सोनू कुशवाहा को मध्य प्रदेश से दबोचा गया। सभी आरोपियों के खिलाफ ट्रांजिट वारंट लिया गया।
बरामदगी और आपराधिक इतिहास
गिरफ्तारी के दौरान हृदेश कुमार के पास से 8 किलो 400 ग्राम चांदी, ₹1.5 लाख नकद और एक मोबाइल फोन बरामद हुआ। शेष आरोपियों से भी मोबाइल फोन जब्त किए गए। उल्लेखनीय है कि हृदेश कुमार का पहले भी आपराधिक रिकॉर्ड है — वर्ष 2021 में मध्य प्रदेश के अशोक नगर पुलिस स्टेशन में उसके खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज था।
यह गिरोह मध्य प्रदेश, ओडिशा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में भी इसी तरह की ठगी की वारदातें कर चुका है, जो इसकी व्यापक पहुँच और सुनियोजित कार्यप्रणाली को दर्शाता है।
पुलिस कार्रवाई और आगे की जाँच
यह सफल कार्रवाई महाकाली पुलिस की टीम ने अतिरिक्त उपायुक्त जे. नरसैया, सहायक आयुक्त सी.एच. श्रीधर और एस. रवि कुमार के नेतृत्व में की। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि गिरोह के शेष सदस्यों की तलाश अभी जारी है और अन्य राज्यों में भी छापेमारी की जा रही है।
चांदी व्यापारियों के लिए यह मामला एक बड़ी चेतावनी है — भरोसेमंद ग्राहक के नाम पर भी बिना स्वतंत्र प्रयोगशाला जाँच के कोई भी लेन-देन जोखिम भरा हो सकता है। आने वाले दिनों में पुलिस अन्य राज्यों में दर्ज इसी गिरोह से जुड़े मामलों की भी समीक्षा कर सकती है।