8 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

आरबीआई का बड़ा फैसला: डिजिटल वॉलेट और प्रीपेड कार्ड के लिए नए सख्त नियमों का मसौदा जारी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
आरबीआई का बड़ा फैसला: डिजिटल वॉलेट और प्रीपेड कार्ड के लिए नए सख्त नियमों का मसौदा जारी

सारांश

आरबीआई ने डिजिटल वॉलेट और प्रीपेड कार्ड के लिए कड़े नियमों का मसौदा जारी किया है। गैर-बैंकिंग कंपनियों के लिए ₹5 करोड़ नेट-वर्थ अनिवार्य, सामान्य पीपीआई में अधिकतम ₹2 लाख की सीमा। 22 मई 2026 तक सुझाव आमंत्रित।

मुख्य बातें

आरबीआई ने 25 अप्रैल 2025 को डिजिटल वॉलेट और प्रीपेड कार्ड के लिए मसौदा 'मास्टर निर्देश' जारी किया।
सामान्य पीपीआई में अधिकतम ₹2 लाख रखने और ₹10,000 प्रति माह नकद जमा की सीमा प्रस्तावित।
गैर-बैंकिंग आवेदकों के लिए न्यूनतम ₹5 करोड़ नेट-वर्थ अनिवार्य, तीसरे वर्ष तक ₹15 करोड़ करनी होगी।
ग्राहकों के पैसे की सुरक्षा के लिए रुपया एस्क्रो खाता भारत के किसी वाणिज्यिक बैंक में रखना अनिवार्य होगा।
पीपीआई जारी करते समय हिंदी, अंग्रेजी और स्थानीय भाषा में जानकारी देना अनिवार्य किया जाएगा।
सार्वजनिक सुझावों की अंतिम तिथि 22 मई 2026 निर्धारित की गई है।

नई दिल्ली, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने डिजिटल वॉलेट, प्रीपेड कार्ड और अन्य प्रीपेड भुगतान उपकरणों (पीपीआई) के लिए एक व्यापक मसौदा 'मास्टर निर्देश' जारी किया है। इस प्रस्ताव का मकसद ग्राहक सुरक्षा को मजबूत करना, परिचालन पारदर्शिता बढ़ाना और डिजिटल भुगतान प्रणाली को और अधिक विश्वसनीय बनाना है। 22 मई 2026 तक आम जनता से इस पर सुझाव मांगे गए हैं।

क्या है आरबीआई का नया प्रस्ताव?

आरबीआई के इस मसौदे के तहत डेबिट कार्ड जारी करने वाले बैंक, 'पेमेंट और सेटलमेंट सिस्टम विभाग' (डीपीएसएस) को सूचित करने के बाद पीपीआई जारी कर सकेंगे। यह व्यवस्था बैंकिंग और गैर-बैंकिंग दोनों क्षेत्रों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय करती है।

मसौदे में यह भी कहा गया है कि किसी भी गैर-बैंकिंग आवेदक की न्यूनतम नेट-वर्थ ₹5 करोड़ होनी चाहिए और उसे अपने वैधानिक ऑडिटर का प्रमाणपत्र जमा करना होगा। इससे बाजार में अविश्वसनीय या कमजोर वित्तीय आधार वाली कंपनियों की एंट्री रोकी जा सकेगी।

नेट-वर्थ और एस्क्रो खाते की अनिवार्यता

प्रस्ताव के अनुसार, किसी भी गैर-बैंकिंग पीपीआई जारीकर्ता को अनुमति मिलने के तीसरे वित्तीय वर्ष के अंत तक अपनी न्यूनतम नेट-वर्थ बढ़ाकर ₹15 करोड़ करनी होगी। यह शर्त सुनिश्चित करती है कि बाजार में दीर्घकालिक और वित्तीय रूप से स्थिर कंपनियां ही बनी रहें।

इसके अलावा, गैर-बैंकिंग पीपीआई जारीकर्ताओं के लिए रुपया एस्क्रो खाता रखना अनिवार्य होगा। यह खाता भारत में किसी वाणिज्यिक बैंक में खोला जाना चाहिए, जिसमें पीपीआई के बदले जमा की गई राशि अलग रखी जाएगी। इससे ग्राहकों के पैसे की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

लेन-देन और जमा राशि की नई सीमाएं

मसौदे में प्रस्तावित सीमाओं के अनुसार, सामान्य उपयोग वाले पीपीआई में अधिकतम ₹2 लाख रखे जा सकते हैं। हर महीने इनमें ₹10,000 तक नकद राशि जमा करने की सीमा निर्धारित की गई है।

ट्रांजिट पीपीआई (परिवहन संबंधी) के लिए अधिकतम सीमा ₹3,000 और अन्य पीपीआई के लिए ₹10,000 तय की गई है। विदेशी मुद्रा से जुड़े पीपीआई में किसी भी महीने ₹5 लाख से अधिक की निकासी की अनुमति नहीं होगी।

ग्राहकों को मिलेगी पारदर्शी जानकारी

आरबीआई के मसौदे में यह अनिवार्य किया गया है कि पीपीआई जारी करते समय उपयोगकर्ताओं को सभी विशेषताओं, शुल्कों, वैधता अवधि और नियम-शर्तों की जानकारी सरल भाषा में दी जाए। यह जानकारी अंग्रेजी, हिंदी और स्थानीय भाषा में उपलब्ध कराने की सिफारिश की गई है।

लेन-देन विफल होने, राशि वापस आने या लेन-देन रद्द होने की स्थिति में रिफंड तुरंत संबंधित पीपीआई खाते में जमा होना चाहिए — भले ही इससे उस श्रेणी की निर्धारित सीमा का उल्लंघन हो।

व्यापक संदर्भ: क्यों जरूरी है यह कदम?

गौरतलब है कि भारत में डिजिटल भुगतान का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) के आंकड़ों के अनुसार, यूपीआई के जरिए मासिक लेन-देन अब ₹20 लाख करोड़ से अधिक हो चुका है। ऐसे में पीपीआई बाजार में नियामकीय स्पष्टता की मांग लंबे समय से थी।

यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब देश में फिनटेक कंपनियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और कई छोटे वॉलेट प्रदाताओं के बंद होने से ग्राहकों को नुकसान उठाना पड़ा है। आरबीआई का यह मसौदा उन खामियों को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

अब सभी की निगाहें 22 मई 2026 की अंतिम तिथि पर हैं, जब तक उद्योग जगत, विशेषज्ञ और आम नागरिक अपने सुझाव दे सकते हैं। इसके बाद आरबीआई अंतिम दिशा-निर्देश जारी करेगा, जो भारत के डिजिटल भुगतान परिदृश्य को नया आकार दे सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारत के तेजी से बढ़ते फिनटेक बाजार को जवाबदेह बनाने की बड़ी कोशिश है। पिछले कुछ वर्षों में कई छोटे वॉलेट प्रदाताओं के अचानक बंद होने से लाखों उपभोक्ताओं का पैसा फंसा — एस्क्रो खाते की अनिवार्यता उसी खामी को बंद करती है। विडंबना यह है कि जब भारत डिजिटल भुगतान में विश्व नेता बनने का दावा करता है, तब भी बुनियादी उपभोक्ता सुरक्षा के नियम अभी तक मसौदे के स्तर पर हैं। यह प्रस्ताव देर से आया, लेकिन सही दिशा में है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आरबीआई ने डिजिटल वॉलेट के लिए नया मसौदा क्यों जारी किया?
आरबीआई ने ग्राहक सुरक्षा, पारदर्शिता और परिचालन स्पष्टता बढ़ाने के लिए यह मसौदा जारी किया है। बढ़ते डिजिटल भुगतान बाजार में नियामकीय खामियों को दूर करना इसका मुख्य उद्देश्य है।
डिजिटल वॉलेट में अब कितनी राशि रखी जा सकेगी?
प्रस्तावित नियमों के अनुसार सामान्य उपयोग वाले पीपीआई में अधिकतम ₹2 लाख रखे जा सकेंगे। हर महीने ₹10,000 तक नकद जमा करने की सीमा भी तय की गई है।
गैर-बैंकिंग कंपनियों के लिए आरबीआई की नई शर्तें क्या हैं?
गैर-बैंकिंग पीपीआई जारीकर्ताओं के लिए न्यूनतम नेट-वर्थ ₹5 करोड़ अनिवार्य होगी, जो तीसरे वित्तीय वर्ष तक ₹15 करोड़ करनी होगी। साथ ही रुपया एस्क्रो खाता रखना भी जरूरी होगा।
आरबीआई के इस मसौदे पर सुझाव कब तक दिए जा सकते हैं?
आरबीआई ने इस प्रस्ताव पर 22 मई 2026 तक आम जनता और उद्योग जगत से सुझाव आमंत्रित किए हैं। इसके बाद अंतिम दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
पीपीआई में रिफंड की नई व्यवस्था क्या होगी?
मसौदे के अनुसार लेन-देन विफल होने, रद्द होने या अस्वीकृत होने पर राशि तुरंत पीपीआई खाते में वापस जमा होनी चाहिए। यह नियम तब भी लागू होगा जब रिफंड से उस पीपीआई श्रेणी की सीमा का उल्लंघन होता हो।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 12 महीने पहले
  8. 1 साल पहले