नीति आयोग में बड़ा बदलाव: गोबर्धन दास बने सदस्य, पीएम मोदी का जताया आभार

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नीति आयोग में बड़ा बदलाव: गोबर्धन दास बने सदस्य, पीएम मोदी का जताया आभार

सारांश

केंद्र सरकार ने नीति आयोग में बड़ा फेरबदल करते हुए इम्यूनोलॉजिस्ट गोबर्धन दास को सदस्य और अर्थशास्त्री अशोक लाहिड़ी को उपाध्यक्ष नियुक्त किया। पश्चिम बंगाल के दलित किसान परिवार से आए गोबर्धन दास ने PM मोदी का आभार जताते हुए आम लोगों के सपनों को पूरा करने का संकल्प लिया।

Key Takeaways

  • गोबर्धन दास, देश के जाने-माने इम्यूनोलॉजिस्ट, को 25 अप्रैल 2025 को नीति आयोग का सदस्य नियुक्त किया गया।
  • अशोक लाहिड़ी, बालुरघाट से भाजपा विधायक और प्रख्यात अर्थशास्त्री, को नीति आयोग का उपाध्यक्ष बनाया गया।
  • गोबर्धन दास पश्चिम बंगाल के एक दलित किसान परिवार से आते हैं और उनकी नियुक्ति सामाजिक समावेश का प्रतीक मानी जा रही है।
  • दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पीएम मोदी का आभार जताया और ग्रामीण व किसान समुदाय के जीवन स्तर सुधार का संकल्प लिया।
  • नीति आयोग की स्थापना 2015 में हुई थी; यह पुनर्गठन आर्थिक और वैज्ञानिक नीति-निर्माण को नई दिशा देने का संकेत है।

नई दिल्ली, 25 अप्रैल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने नीति आयोग के ढांचे में महत्वपूर्ण फेरबदल करते हुए नए उपाध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की है। देश के जाने-माने इम्यूनोलॉजिस्ट गोबर्धन दास को नीति आयोग का सदस्य नियुक्त किया गया है, जबकि पश्चिम बंगाल के दक्षिण दिनाजपुर जिले के बालुरघाट से भाजपा विधायक एवं प्रसिद्ध अर्थशास्त्री अशोक लाहिड़ी को आयोग का नया उपाध्यक्ष बनाया गया है।

गोबर्धन दास ने पीएम मोदी का जताया हार्दिक आभार

नियुक्ति की जानकारी सार्वजनिक होते ही गोबर्धन दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर एक भावुक पोस्ट साझा की। उन्होंने लिखा कि यह उनके जीवन का अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है और वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति हृदय से कृतज्ञ हैं, जिन्होंने उन्हें नीति आयोग के सदस्य के रूप में राष्ट्र सेवा का अवसर प्रदान किया।

दास ने अपनी विनम्र पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि वे पश्चिम बंगाल के एक सुदूर गांव के दलित वर्ग के साधारण किसान परिवार से आते हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि बचपन से मिट्टी की महक, परिश्रम का मूल्य और संघर्ष की वास्तविकता उनके जीवन के अभिन्न अंग रहे हैं।

आम लोगों के सपनों का प्रतिनिधित्व

गोबर्धन दास ने कहा कि आज उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी गई है, वह केवल एक पद नहीं, बल्कि उन जैसे लाखों-करोड़ों साधारण लोगों की आकांक्षाओं, उम्मीदों और विश्वास का प्रतिबिंब है। उनका यह बयान उस व्यापक सामाजिक संदर्भ को रेखांकित करता है जिसमें वंचित तबके से आए व्यक्ति का नीति-निर्माण की शीर्ष संस्था तक पहुंचना एक उल्लेखनीय घटना मानी जाती है।

उन्होंने यह भी कहा कि देश के समग्र विकास के लिए दूरदराज के क्षेत्रों, कृषक समुदाय और आम नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार लाना अनिवार्य है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए वे प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने का संकल्प लेते हैं।

नीति आयोग में पुनर्गठन का महत्व

नीति आयोग भारत सरकार की शीर्ष नीति-निर्माण संस्था है जिसे 2015 में योजना आयोग के स्थान पर स्थापित किया गया था। इस संस्था में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की नियुक्ति देश की दीर्घकालिक नीतियों और विकास रणनीतियों को आकार देती है। अशोक लाहिड़ी जैसे अनुभवी अर्थशास्त्री और गोबर्धन दास जैसे विज्ञान विशेषज्ञ की एक साथ नियुक्ति यह संकेत देती है कि सरकार आर्थिक नीति के साथ-साथ स्वास्थ्य और विज्ञान आधारित नीति-निर्माण को भी प्राथमिकता दे रही है।

उल्लेखनीय है कि गोबर्धन दास का इम्यूनोलॉजी के क्षेत्र में व्यापक अनुभव उन्हें स्वास्थ्य नीति, जैव प्रौद्योगिकी और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर नीति आयोग को नई दृष्टि प्रदान करने में सक्षम बनाएगा।

दास का संकल्प और आगे की राह

गोबर्धन दास ने अपनी पोस्ट में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश की प्रगति के इस सफर में थोड़ा भी योगदान कर पाना उनके लिए गर्व का विषय है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से आशीर्वाद और सहयोग की अपेक्षा जताई।

आने वाले दिनों में नीति आयोग के नए गठन के साथ सरकार की नीतिगत प्राथमिकताएं किस दिशा में आगे बढ़ती हैं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई टीम से ग्रामीण विकास, कृषि सुधार और स्वास्थ्य क्षेत्र में ठोस नीतिगत पहल की उम्मीद की जा सकती है।

Point of View

बल्कि एक सुविचारित राजनीतिक संदेश भी है — खासकर तब जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की आहटें सुनाई देने लगी हैं। दलित किसान परिवार से उठकर देश की शीर्ष नीति संस्था तक पहुंचना एक प्रेरणादायक कथा है, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि नीति आयोग की सिफारिशें जमीन पर किसानों और वंचितों की जिंदगी में कितना बदलाव लाती हैं। अर्थशास्त्री लाहिड़ी और इम्यूनोलॉजिस्ट दास की जोड़ी संकेत देती है कि सरकार आर्थिक विकास के साथ स्वास्थ्य नीति को भी केंद्र में रखना चाहती है — यह दिशा सही है, पर क्रियान्वयन की कसौटी पर ही इसकी असली कीमत आंकी जाएगी।
NationPress
25/04/2026

Frequently Asked Questions

गोबर्धन दास को नीति आयोग में क्या पद दिया गया है?
प्रख्यात इम्यूनोलॉजिस्ट गोबर्धन दास को केंद्र सरकार ने नीति आयोग का सदस्य नियुक्त किया है। यह नियुक्ति 25 अप्रैल 2025 को की गई।
नीति आयोग का नया उपाध्यक्ष कौन बनाया गया है?
अशोक लाहिड़ी को नीति आयोग का नया उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वे पश्चिम बंगाल के दक्षिण दिनाजपुर के बालुरघाट से भाजपा विधायक और जाने-माने अर्थशास्त्री हैं।
गोबर्धन दास की पृष्ठभूमि क्या है?
गोबर्धन दास पश्चिम बंगाल के एक सुदूर गांव के दलित किसान परिवार से आते हैं। वे देश के प्रसिद्ध इम्यूनोलॉजिस्ट हैं और स्वास्थ्य व विज्ञान नीति में विशेषज्ञता रखते हैं।
नीति आयोग की स्थापना कब और क्यों हुई?
नीति आयोग की स्थापना 2015 में योजना आयोग के स्थान पर की गई थी। यह भारत सरकार की शीर्ष नीति-निर्माण संस्था है जो देश की दीर्घकालिक विकास रणनीतियां तैयार करती है।
गोबर्धन दास ने नियुक्ति पर क्या कहा?
गोबर्धन दास ने 'एक्स' पर पोस्ट कर पीएम मोदी का आभार जताया और कहा कि यह पद उन जैसे लाखों आम लोगों के सपनों का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने ईमानदारी और पूर्ण जिम्मेदारी से काम करने का संकल्प लिया।
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