टिहरी जिला योजना में 30 साल की दूरदर्शिता: प्रभारी मंत्री गणेश जोशी ने दिए अहम निर्देश
सारांश
Key Takeaways
- प्रभारी मंत्री गणेश जोशी ने 25 अप्रैल 2025 को नई टिहरी में जिला योजना समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
- वर्ष 2026-27 के लिए ₹95 करोड़ 21 लाख 50 हजार की वित्तीय मांग प्रस्तुत की गई।
- 30 वर्षीय दीर्घकालिक विकास योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए, जिसमें जनप्रतिनिधियों की भागीदारी अनिवार्य होगी।
- प्रतापनगर विधायक विक्रम सिंह नेगी ने पेयजल संकट उठाया; पेयजल विभाग को तत्काल कार्यवाही के आदेश दिए गए।
- 'माई ब्लॉक माई शॉप', 'माई ब्लॉक माई लाइब्रेरी' और 'फिजिक्स वाला' निःशुल्क कोचिंग जिले के प्रमुख नवाचारों में शामिल हैं।
- टिहरी विधायक किशोर उपाध्याय और नगर पालिका अध्यक्ष मोहन रावत ने एडीबी परियोजनाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठाए।
नई टिहरी, 25 अप्रैल 2025 — टिहरी गढ़वाल के प्रभारी मंत्री एवं कृषि, किसान कल्याण व सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी की अध्यक्षता में जिला कलेक्ट्रेट सभागार, नई टिहरी में जिला योजना समीक्षा बैठक आयोजित हुई। इस महत्वपूर्ण बैठक में पेयजल संकट, पर्यटन विकास, दीर्घकालिक योजना निर्माण और वर्ष 2026-27 के लिए ₹95 करोड़ 21 लाख 50 हजार की वित्तीय मांग पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।
30 वर्षीय दूरदर्शी योजना का आह्वान
मंत्री गणेश जोशी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जिला योजना को केवल वर्तमान जरूरतों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसे आगामी 30 वर्षों की चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि हर योजना में जनप्रतिनिधियों, विधायकों और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए, ताकि योजनाएं जमीनी वास्तविकता से जुड़ी रहें।
यह निर्देश ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड के पहाड़ी जिले जलवायु परिवर्तन, पलायन और बुनियादी ढांचे की कमी जैसी दीर्घकालिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। टिहरी जैसे जलाशय-प्रधान जिले में दूरदर्शी नियोजन की आवश्यकता और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
पेयजल संकट: राष्ट्रीय चुनौती का स्थानीय चेहरा
मंत्री जोशी ने पानी की समस्या को राष्ट्रीय स्तर की चुनौती करार देते हुए कहा कि इसके समाधान के लिए सुनियोजित और प्रभावी विकास योजना तत्काल बनाई जाए। प्रतापनगर विधायक विक्रम सिंह नेगी ने बैठक में अपने क्षेत्र में पेयजल की गंभीर स्थिति का मुद्दा उठाया।
डीएफओ पुनीत तोमर ने जानकारी दी कि सड़क कटान के कारण जल स्रोतों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। जिलाधिकारी ने पेयजल विभाग को तत्काल आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए। गौरतलब है कि टिहरी बांध के बावजूद इस जिले के कई ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता एक विडंबनापूर्ण चुनौती बनी हुई है।
पर्यटन और नवाचार: जिले की नई पहचान
मंत्री गणेश जोशी ने जिलाधिकारी को पर्यटन विभाग की अलग बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए, ताकि टिहरी झील पर्यटन और अन्य पर्यटन स्थलों को नए आयाम दिए जा सकें। जिलाधिकारी ने बताया कि जिले में कई नवाचार चल रहे हैं।
इनमें प्रमुख हैं — प्रत्येक विकासखंड में महिला सशक्तिकरण के लिए 'माई ब्लॉक माई शॉप' योजना, जिला अस्पताल में महिलाओं के लिए फीडिंग रूम, सभी ब्लॉकों में 'माई ब्लॉक माई लाइब्रेरी', 'फिजिक्स वाला' के माध्यम से निःशुल्क कोचिंग और नई खेल सुविधाओं का विकास।
₹95 करोड़ की जिला योजना: क्या शामिल है?
वर्ष 2026-27 के लिए ₹95 करोड़ 21 लाख 50 हजार की वित्तीय मांग प्रस्तुत की गई। केंद्र और राज्य पोषित योजनाओं के अंतर्गत कृषि, पशुपालन, उद्यान, मत्स्य, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य विभागों के कार्यों को पीपीटी के माध्यम से प्रस्तुत किया गया।
प्रमुख कार्यों में घेरबाड़ कार्य, ट्राउट मछली उत्पादन, कीवी फल उत्पादन, गोट वैली विकास, पर्यटन व्यू पॉइंट्स, सीएचसी/पीएचसी की मरम्मत और विद्यालयों में शौचालय निर्माण शामिल हैं। टिहरी विधायक किशोर उपाध्याय और नगर पालिका अध्यक्ष मोहन रावत ने एडीबी द्वारा निर्माणाधीन आईएसबीटी और बौराड़ी मार्केट की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। धनोल्टी और टिहरी के विधायकों ने रिंग रोड निर्माण पर भी चर्चा की।
बैठक का समापन और आगे की राह
बैठक की शुरुआत में जिलाधिकारी ने मंत्री गणेश जोशी, सभी विधायकों, जिला पंचायत अध्यक्ष और जिलाध्यक्ष का पौधा भेंट कर पर्यावरण-सचेत स्वागत किया। यह प्रतीकात्मक कदम जिले की हरित विकास की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
आने वाले हफ्तों में पर्यटन विभाग की अलग समीक्षा बैठक और पेयजल संकट पर तत्काल कार्यवाही अपेक्षित है। यदि 30 वर्षीय दीर्घकालिक योजना को ईमानदारी से लागू किया गया, तो टिहरी गढ़वाल उत्तराखंड के सबसे सुनियोजित पहाड़ी जिलों में शुमार हो सकता है।