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दलबदल विरोधी कानून की मांग: अन्ना हजारे बोले- AAP के 7 सांसदों के BJP जाने पर जनता को सोचना होगा

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दलबदल विरोधी कानून की मांग: अन्ना हजारे बोले- AAP के 7 सांसदों के BJP जाने पर जनता को सोचना होगा

सारांश

सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने AAP के 7 सांसदों के BJP में जाने पर सख्त दलबदल विरोधी कानून की मांग की। बोले — स्वार्थ की राजनीति रोकने के लिए कठोर कानून जरूरी, जनता को सोचना होगा। मतदाताओं को बताया असली 'राजा'।

मुख्य बातें

अन्ना हजारे ने AAP के 7 राज्यसभा सांसदों के BJP में जाने पर सख्त दलबदल विरोधी कानून बनाने की मांग की।
राघव चड्ढा , हरभजन सिंह , स्वाति मालीवाल समेत 7 सांसदों ने शुक्रवार को AAP छोड़कर BJP की सदस्यता ली।
BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने BJP कार्यालय में इन सभी नेताओं को औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल किया।
हजारे ने मतदाताओं को 'राजा' बताते हुए कहा कि सत्ता-पैसा-सत्ता का दुष्चक्र ही राजनीतिक भ्रष्टाचार की जड़ है।
भारत का दलबदल विरोधी कानून 1985 में बना था, लेकिन इसकी खामियां आज भी दलबदल रोकने में नाकाम साबित हो रही हैं।
अन्ना हजारे ने कहा — "संविधान में राजनीतिक पार्टियों का कोई उल्लेख नहीं" , पार्टियां ही समाज में टकराव की वजह बन रही हैं।

अहिल्यानगर, 26 अप्रैल — प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने आम आदमी पार्टी (AAP) के 7 राज्यसभा सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने दलबदल विरोधी कानून को और सख्त बनाने की वकालत करते हुए कहा कि जब तक स्वार्थ की राजनीति पर अंकुश नहीं लगेगा, तब तक इस तरह की घटनाएं होती रहेंगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले में मतदाता ही असली निर्णायक शक्ति हैं।

अन्ना हजारे का सीधा बयान — संविधान में पार्टी का जिक्र नहीं

राष्ट्र प्रेस से विशेष बातचीत में अन्ना हजारे ने कहा, "संविधान में कहीं भी राजनीतिक पार्टियों या गुटों का कोई उल्लेख नहीं है।" उनके अनुसार, संविधान हमेशा से समाज और राष्ट्र के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है, लेकिन आज की राजनीतिक व्यवस्था में पार्टियां ही विवाद और टकराव की जड़ बन गई हैं।

उन्होंने कहा, "लोग अपने निजी स्वार्थ के आधार पर एक दल से दूसरे दल में चले जाते हैं। जहां उन्हें अपना फायदा दिखता है, वहीं चले जाते हैं।" हजारे ने इसे रोकने के लिए कठोर दलबदल विरोधी कानून बनाने की अपील की।

सत्ता और पैसे का दुष्चक्र — मतदाता ही असली राजा

अन्ना हजारे ने मतदाताओं को 'राजा' की संज्ञा देते हुए कहा कि सही व्यक्ति को वोट देने का निर्णय जनता के हाथ में है। उन्होंने कहा, "अगर मतदाता सोच-समझकर मतदान करें, तो सभी दलों में फैली अनियमितताओं को सुधारा जा सकता है।"

उन्होंने सत्ता-पैसा-सत्ता के दुष्चक्र को इन राजनीतिक विकृतियों की मूल वजह बताया। उनके शब्दों में, "सत्ता से पैसा और पैसे से वापस सत्ता — यह दुष्चक्र ही सारी गड़बड़ियों की जड़ है।" हजारे ने यह भी कहा कि AAP सांसदों के दलबदल पर वे सीधे कुछ नहीं कहेंगे, लेकिन "जनता को सोचना होगा।"

AAP में टूट — राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों ने थामा BJP का दामन

राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में आम आदमी पार्टी से इस्तीफे का ऐलान किया और शुक्रवार को आधिकारिक रूप से BJP की सदस्यता ग्रहण की। इसके साथ ही राघव चड्ढा ने चार अन्य सांसदों — हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, विक्रम साहनी और राजिंदर गुप्ता — के नाम भी सामने रखे, जो AAP छोड़ चुके हैं।

BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने BJP कार्यालय में इन सभी नेताओं को औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल किया। राघव चड्ढा और AAP के शीर्ष नेतृत्व के बीच कई दिनों से चल रहे मतभेद इस सार्वजनिक टूट के रूप में सामने आए।

दलबदल कानून की सीमाएं — क्यों बार-बार उठती है यह मांग?

भारत में दलबदल विरोधी कानून 1985 में संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत लागू किया गया था। हालांकि, इसमें दो-तिहाई बहुमत से विलय की अनुमति जैसे प्रावधानों ने इसे कमजोर बना दिया है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि राज्यसभा सांसदों के मामले में यह कानून और भी कम प्रभावी साबित होता है, क्योंकि उनका सीधा जनादेश नहीं होता।

गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, गोवा और कर्नाटक जैसे राज्यों में दलबदल की घटनाएं बार-बार सामने आई हैं, जिससे लोकतंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल उठते रहे हैं। अन्ना हजारे जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं की यह मांग इसीलिए बार-बार प्रासंगिक हो जाती है।

आगे क्या — AAP के लिए बड़ी चुनौती

7 राज्यसभा सांसदों के एक साथ पार्टी छोड़ने से आम आदमी पार्टी की संसदीय ताकत और राष्ट्रीय छवि दोनों को गहरा धक्का लगा है। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि AAP इस संकट से कैसे उबरती है और क्या दलबदल विरोधी कानून को सख्त बनाने की मांग संसद में नई बहस को जन्म देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारतीय राजनीति की एक गहरी बीमारी की ओर इशारा है — जहां विचारधारा नहीं, स्वार्थ पार्टी चुनता है। विडंबना यह है कि जिस AAP ने खुद को 'भ्रष्टाचार विरोधी' आंदोलन से जन्मा बताया था, उसी के 7 सांसदों का एक साथ पाला बदलना उस दावे पर सवाल खड़े करता है। 1985 का दलबदल विरोधी कानून चार दशक बाद भी बेदांत साबित हो रहा है — यह संसदीय सुधार की सबसे बड़ी विफलताओं में से एक है। जब तक कानून में 'दो-तिहाई विलय' जैसी खामियां रहेंगी, तब तक सत्ता-पैसा-सत्ता का यह दुष्चक्र चलता रहेगा।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अन्ना हजारे ने AAP के 7 सांसदों के BJP में जाने पर क्या कहा?
अन्ना हजारे ने कहा कि लोग अपने निजी स्वार्थ के लिए एक पार्टी से दूसरी पार्टी में जाते हैं और इसे रोकने के लिए सख्त दलबदल विरोधी कानून बनाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जनता को सोचना होगा।
AAP के कौन से 7 सांसद BJP में शामिल हुए?
राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, विक्रम साहनी और राजिंदर गुप्ता — ये 7 राज्यसभा सांसद AAP छोड़कर BJP में शामिल हुए। BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई।
भारत में दलबदल विरोधी कानून क्या है और यह कब बना?
भारत में दलबदल विरोधी कानून 1985 में संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत लागू किया गया था। हालांकि इसमें दो-तिहाई बहुमत से विलय की अनुमति जैसी खामियां हैं, जो इसे कमजोर बनाती हैं।
अन्ना हजारे ने मतदाताओं के बारे में क्या कहा?
अन्ना हजारे ने मतदाताओं को 'राजा' बताया और कहा कि अगर जनता सोच-समझकर मतदान करे तो सभी दलों में फैली अनियमितताओं को सुधारा जा सकता है। उन्होंने सत्ता-पैसे के दुष्चक्र को इन विकृतियों की मूल वजह बताया।
राघव चड्ढा ने AAP क्यों छोड़ी?
राघव चड्ढा और AAP के शीर्ष नेतृत्व के बीच कई दिनों से मतभेद चल रहे थे। उन्होंने अशोक मित्तल और संदीप पाठक के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पार्टी छोड़ने और BJP में जाने का ऐलान किया।
राष्ट्र प्रेस
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