जोजिला दर्रे में भीषण हिमस्खलन: श्रीनगर-लेह हाईवे बंद, तीन ड्राइवर सुरक्षित बचाए गए
सारांश
Key Takeaways
- रविवार, 27 अप्रैल को जोजिला दर्रे के शैतानी नाला के पास भीषण हिमस्खलन आया, जिससे श्रीनगर-लेह हाईवे बंद हो गया।
- हिमस्खलन में सोनमर्ग से कारगिल जा रहे दो टैंकर समेत कई वाहन बर्फ में दबकर सड़क से नीचे गिरे।
- UTDRF कारगिल, द्रास पुलिस और स्थानीय स्वयंसेवकों ने राहत अभियान चलाकर तीनों ड्राइवरों को सुरक्षित बचाया।
- 27 मार्च, 2025 को इसी दर्रे में हुए हिमस्खलन में 6 लोगों की मौत और 5 घायल हुए थे — यह एक महीने में दूसरी बड़ी घटना है।
- जोजिला टनल (14.2 किमी लंबी) निर्माणाधीन है, जो पूरी होने पर सोनमर्ग और द्रास को हर मौसम में जोड़ेगी।
- हाईवे पर बर्फ हटाने का काम जारी है, लेकिन हिमस्खलन के खतरे के कारण मार्ग अभी भी संवेदनशील बना हुआ है।
श्रीनगर, 26 अप्रैल: लद्दाख के जोजिला दर्रे में रविवार को आए भीषण हिमस्खलन के बाद श्रीनगर-लेह नेशनल हाईवे पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी गई है। द्रास सेक्टर के शैतानी नाला के निकट हुई इस घटना में सोनमर्ग से कारगिल की ओर जा रहे दो टैंकर समेत कई वाहन बर्फ की चपेट में आकर सड़क से नीचे जा गिरे। राहत अभियान चलाकर फंसे हुए तीनों ड्राइवरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है।
हिमस्खलन की घटना और राहत अभियान
रविवार, 27 अप्रैल को जोजिला दर्रे के द्रास सेक्टर में शैतानी नाला के पास अचानक हिमस्खलन आया। उस समय सड़क पर कई वाहन गुजर रहे थे, जिनमें दो टैंकर और अन्य छोटे वाहन शामिल थे। बर्फ के तेज बहाव ने इन वाहनों को सड़क से नीचे धकेल दिया।
सूचना मिलते ही यूटीडीआरएफ (UTDRF) कारगिल, द्रास पुलिस स्टेशन और स्थानीय स्वयंसेवकों की संयुक्त टीमों ने तत्काल राहत अभियान शुरू किया। कड़ी मशक्कत के बाद तीनों फंसे ड्राइवरों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और क्षतिग्रस्त वाहनों को भी बर्फ से बाहर खींचा गया।
फिलहाल श्रीनगर-लेह हाईवे बंद है और सड़क को पुनः चालू करने के लिए बर्फ हटाने का काम युद्धस्तर पर जारी है। अधिकारियों ने बताया कि बर्फबारी और हिमस्खलन के खतरे के कारण यह मार्ग अत्यंत संवेदनशील बना हुआ है।
जोजिला दर्रा — सबसे खतरनाक रास्तों में से एक
जोजिला दर्रा, श्रीनगर-लेह हाईवे पर सबसे जोखिम भरे हिस्सों में गिना जाता है। समुद्र तल से लगभग ११,५७५ फीट की ऊंचाई पर स्थित यह दर्रा शीतकाल में अक्सर बंद हो जाता है और वसंत-शुरुआत के दौरान हिमस्खलन की आशंका सर्वाधिक रहती है।
पिछले ७० वर्षों में इस रास्ते पर अनेक दुर्घटनाएं हो चुकी हैं जिनमें कई लोगों की जानें गई हैं। २७ मार्च, २०२५ को भी इसी जोजिला दर्रे में एक अलग हिमस्खलन में ६ लोगों की मौत हो गई थी और ५ अन्य घायल हुए थे। यानी एक महीने से भी कम समय में यह दूसरी बड़ी हिमस्खलन घटना है।
जोजिला टनल — स्थायी समाधान की ओर
इन बार-बार होने वाली दुर्घटनाओं और हाईवे बंद होने की समस्या के स्थायी समाधान के लिए जोजिला टनल का निर्माण किया जा रहा है। यह सुरंग जम्मू-कश्मीर के गांदरबल जिले के सोनमर्ग को लद्दाख के कारगिल जिले के द्रास से जोड़ेगी।
यह सुरंग ९.५ मीटर चौड़ी, ७.५७ मीटर ऊंची और १४.२ किलोमीटर लंबी होगी — घोड़े की नाल के आकार की सिंगल-ट्यूब, दो-लेन सड़क सुरंग, जो समुद्र तल से करीब १२,००० फीट की ऊंचाई पर निर्मित हो रही है।
इसे जेड-मोढ़ टनल के साथ जोड़कर लद्दाख को पूरे वर्ष, हर मौसम में देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने की सुविधा मिलेगी। यह परियोजना रणनीतिक और नागरिक दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
गहरा संदर्भ: बार-बार क्यों होते हैं ये हादसे?
यह ध्यान देने योग्य है कि मार्च-अप्रैल का महीना जोजिला क्षेत्र में हिमस्खलन के लिहाज से सर्वाधिक संवेदनशील होता है क्योंकि इस दौरान ऊपरी पहाड़ियों पर जमी बर्फ तापमान बढ़ने से अस्थिर हो जाती है। फिर भी, हाईवे को जल्दी खोलने का दबाव — चाहे वह व्यावसायिक हो या सैन्य आपूर्ति का — अक्सर सुरक्षा सावधानियों पर भारी पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जोजिला टनल के पूरा होने तक इस मार्ग पर रियल-टाइम हिमस्खलन चेतावनी प्रणाली और स्वचालित बाधाओं की सख्त जरूरत है। वर्तमान में मैनुअल निगरानी पर निर्भरता जोखिम को कई गुना बढ़ा देती है।
आगे क्या?
अधिकारियों के अनुसार, बर्फ हटाने का काम जारी है और स्थिति सामान्य होते ही श्रीनगर-लेह हाईवे को फिर से खोला जाएगा। हालांकि, मौसम विभाग के पूर्वानुमान और हिमस्खलन की मौजूदा आशंका को देखते हुए यात्रियों को अभी कुछ समय और इंतजार करना पड़ सकता है। जोजिला टनल के पूरा होने के बाद इस तरह की बाधाओं से स्थायी राहत मिलने की उम्मीद है।