शेयर बाजार की चाल: फेड बैठक, ईरान-अमेरिका वार्ता और कच्चा तेल तय करेंगे अगले हफ्ते का रुख
सारांश
Key Takeaways
- फेड की बैठक 28-29 अप्रैल को होगी, जो वैश्विक बाजारों की दिशा तय करेगी।
- ईरान-अमेरिका शांति वार्ता फिलहाल स्थगित है, जिससे कच्चा तेल 100 डॉलर/बैरल के ऊपर बना हुआ है।
- मारुति सुजुकी, कोल इंडिया, अदाणी पावर समेत दर्जनों कंपनियां Q4 FY26 नतीजे जारी करेंगी।
- बीते हफ्ते सेंसेक्स 1,829 अंक (2.33%25) और निफ्टी आईटी 10.31%25 टूटा।
- 28 अप्रैल को सरकार औद्योगिक उत्पादन (IIP) के आंकड़े जारी करेगी।
- निफ्टी एनर्जी (+2.63%25) और निफ्टी एफएमसीजी (+2.23%25) बीते हफ्ते हरे निशान में बंद हुए।
मुंबई, 26 अप्रैल 2025 (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला सप्ताह निर्णायक साबित हो सकता है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर बैठक, ईरान-अमेरिका शांति वार्ता की स्थिति, कच्चे तेल की वैश्विक कीमतें और देश की प्रमुख कंपनियों के चौथी तिमाही (Q4) नतीजे मिलकर बाजार की दिशा तय करेंगे। बीते सप्ताह सेंसेक्स करीब 1,829 अंक टूटा, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ी है।
फेड की बैठक और ब्याज दरों का असर
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बहुप्रतीक्षित बैठक 28-29 अप्रैल 2025 को आयोजित होगी। यह बैठक ऐसे नाजुक दौर में हो रही है जब वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है और कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है। फेड यदि ब्याज दरों में कोई बदलाव करता है या आक्रामक रुख अपनाता है, तो इसका सीधा असर विदेशी निवेशकों (FII) की भारतीय बाजार में खरीद-बिक्री पर पड़ेगा।
गौरतलब है कि पिछले कई महीनों से फेड ने दरें स्थिर रखी हैं, लेकिन बढ़ती महंगाई और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच बाजार किसी भी संकेत पर तीखी प्रतिक्रिया दे सकता है। डॉलर इंडेक्स और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर भी निवेशकों की पैनी नजर रहेगी।
ईरान-अमेरिका वार्ता और कच्चे तेल की कीमत
ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता फिलहाल स्थगित हो गई है। इस अनिश्चितता के कारण वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल जारी है। ब्रेंट क्रूड का 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बने रहना भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि इससे चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ता है और रुपये पर दबाव आता है।
यदि वार्ता में कोई सकारात्मक प्रगति होती है तो तेल की कीमतें नरम पड़ सकती हैं, जो भारतीय बाजार के लिए राहत की खबर होगी। लेकिन वार्ता टूटने या तनाव बढ़ने की स्थिति में बाजार पर और दबाव आ सकता है।
Q4 नतीजों का सीजन — कौन सी कंपनियां आएंगी सुर्खियों में
अगले सप्ताह वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही के नतीजों का सिलसिला जारी रहेगा। इस दौरान जिन प्रमुख कंपनियों के नतीजे आने हैं उनमें शामिल हैं:
एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक, बजाज हाउसिंग फाइनेंस, कोल इंडिया, पंजाब एंड सिंध बैंक, एसबीआई कार्ड्स, एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस, इटरनल, मारुति सुजुकी, अदाणी पावर, एसीसी, अदाणी एंटरप्राइजेज और गोदरेज एग्रोवेट। इन कंपनियों के नतीजे उनके संबंधित सेक्टर में सेंटीमेंट को प्रभावित करेंगे।
विश्लेषकों का मानना है कि ऑटो, एनर्जी और एफएमसीजी सेक्टर में बेहतर नतीजों की उम्मीद है, जबकि आईटी सेक्टर पर दबाव बना रह सकता है।
घरेलू आर्थिक आंकड़े और उनका महत्व
सरकार 28 अप्रैल 2025 को औद्योगिक उत्पादन (IIP) और विनिर्माण क्षेत्र के ताजा आंकड़े जारी करेगी। ये आंकड़े भारत की आर्थिक सेहत का आईना होंगे। यदि आंकड़े अनुमान से बेहतर रहे तो बाजार में खरीदारी लौट सकती है।
इसके अलावा, GST कलेक्शन, विदेशी मुद्रा भंडार और रुपये की चाल भी निवेशकों के रडार पर रहेगी।
बीते सप्ताह की बाजार समीक्षा
बीता सप्ताह भारतीय शेयर बाजार के लिए कड़वा रहा। सेंसेक्स 1,829.33 अंक (2.33%25) की गिरावट के साथ 76,664.21 पर और निफ्टी 455.60 अंक (1.87%25) की कमजोरी के साथ 23,897.95 पर बंद हुआ।
गिरावट का नेतृत्व निफ्टी आईटी ने किया, जो 10.31%25 टूटा — यह किसी एक सप्ताह में इस इंडेक्स की बड़ी गिरावटों में से एक है। इसके अलावा निफ्टी ऑटो (-2.96%25), निफ्टी सर्विसेज (-2.54%25), निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (-2.49%25), निफ्टी प्राइवेट बैंक (-1.37%25), निफ्टी रियल्टी (-1.13%25) और निफ्टी मेटल (-1.04%25) भी लाल निशान में रहे।
हालांकि, निफ्टी एनर्जी (+2.63%25), निफ्टी एफएमसीजी (+2.23%25), निफ्टी मीडिया (+1.56%25) और निफ्टी हेल्थकेयर (+0.53%25) ने हरे निशान में बंद होकर निवेशकों को कुछ राहत दी।
आने वाले सप्ताह में बाजार की दिशा काफी हद तक फेड के संकेतों और ईरान-अमेरिका वार्ता के नतीजों पर निर्भर करेगी। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे सतर्क रहें और किसी भी बड़े फैसले से पहले बाजार के संकेतों का इंतजार करें।